शक्ति कांत दास को शिवसेना ने कहा- यस मैन दास, आरबीआई के लिए खतरनाक गवर्नर

‘वह(शक्ति कांत) मोदी सरकार की हर अच्छी और बुरी नीतियों में सर हिलाकर सहमति देने के लिए जाने जाते हैं। शक्ति कांत ने आंख बंद कर पीएम मोदी द्वाराकी गई नोदबंदी का समर्थन किया था।

आरबीआई के गवर्नर शक्ति कांत दास

केंद्र में बीजेपी सरकार की सहयोगी शिवसेना ने बीते दिनों नियुक्त किए गए आरबीआई गवर्नर शक्ति कांत दास पर हमला करते हुए उन्हें केंद्रीय बैंक के लिए खतरनाक बताया है। इसके साथ ही शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी पर भी हमला किया है। शिवसेना ने कहा कि, भाजपा सरकार ऐसे लोगों को नहीं पसंद करती, जो सच बोलते हैं। भाजपा को सिर्फ सहमति में सर हिलाने वाले लोग ही पसंद आते हैं। शिवसेना ने शक्ति कांत की डिग्री पर भी सवाल उठाए।

शिवसेना ने कहा, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के बीते दोनों गवर्नर रघुराम राजन और उर्जित पटेल को पूरी दुनिया अर्थशास्त्री के तौर पर जानती थी। लेकिन नए गवर्नर केवल स्नातक हैं। जिन्हें इकनॉमिक्स की बिल्कुल भी जानकारी नहीं है। शक्ति कांत एक आईएएस अधिकारी हैं। जिन्होंने इतिहास में स्पेशलाइजेशन किया है।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना और दोपहर का सामना के जरिए तीखा हमला करते हुए कहा, ‘वह(शक्ति कांत) मोदी सरकार की हर अच्छी और बुरी नीतियों में सर हिलाकर सहमति देने के लिए जाने जाते हैं। शक्ति कांत ने आंख बंद कर पीएम मोदी द्वाराकी गई नोदबंदी का समर्थन किया था। जब नए गुलाबी रंग के 2,000 रुपए के नोट पर सवाल उठाए गए तो उन्होंने एक हास्यास्पद बयान दिया कि जिन नोट से जो खून बहता है, वो असली होते हैं’।

शिवसेना ने लिखा है कि, आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने नोटबंदी का खुलकर विरोध किया। हालांकि बाद में उन्होंने यह पद छोड़ना ही बेहतर समझा। वहीं बीते दिनों गवर्नर पद से इस्तीफा देने वाले उर्जित पटेल ने केंद्रीय बैंक की स्वायत्ता बनाए रखने के लिए अपना पद छोड़ दिया। वर्तमान समय में देश में आर्थिक अराजकता का माहौल है। नोटबंदी और जीएसटी से हालत बुरी हो चुकी है। रुपया भी गिरता जा रहा है।

बता दें कि, भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी शिवसेना हमेशा ही मुखर ही है। बीते दिनों उर्जित पटेल के इस्तीफे के बाद शिवसेना ने सरकार पर तंज के जरिए हमला किया था। उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘हर किसी को इसकी उम्मीद पहले से ही थी। आखिरकार आज उर्जित पटेल ने गर्वनर पद से इस्तीफा दे ही दिया’। उद्धव ठाकरे ने कटाक्ष करते हुए कहा था कि, ‘रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नये मुखिया की तलाश की बजाए केंद्र सरकार को ऐसी हर संस्था को अपने अधीन कर लेना चाहिए’।

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