सरकार आने वाले खरीफ सीजन से पहले खाद (उर्वरकों) का भंडारण तेज़ी से कर रही है। इसकी बड़ी वजह पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति और शिपिंग में आईं रुकावट है। लेकिन अब सरकार के सामने एक और बड़ी चुनौती -घटिया यानी मानक से कम इनपुट्स (substandard inputs) की बिक्री की है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा (मध्य प्रदेश) में मौजूदा रबी सीजन (2025-26) के दौरान खाद के नमूने ‘मानक के अनुरूप नही’ (non-standard) पाए गए। इंडियन एक्सप्रेस को मिले दस्तावेजों से यह जानकारी सामने आई है।
दस्तावेज़ों के अनुसार, डायमोनियम फॉस्फेट (DAP) और अमोनियम फॉस्फेट सल्फेट (APS) के नमूने- जिन्हें Indian Farmers Fertiliser Cooperative Limited (IFFCO) ने बनाया है। जनवरी में विदिशा में ‘मानक के अनुरूप नहीं’ पाए गए। इसके बाद अधिकारियों ने IFFCO को संबंधित खाद के लॉट और उस बैच की बिक्री ‘तुरंत’ बंद करने का आदेश दिया जिनके नमूने परीक्षण में असफल रहे थे।
DAP का सैंपल फेल
DAP (18-46-0) में दानेदार नाइट्रोजन (18 प्रतिशत) और फॉस्फोरस (46 प्रतिशत) होता है। बुवाई के समय किसानों द्वारा बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि यह बीज अंकुरण में मदद करता है। मौजूदा रबी सीजन की बुवाई के दौरान विदिशा के जिला अधिकारियों ने 20 दिसंबर 2025 को गंज बसौदा से IFFCO के DAP का एक नमूना लिया और उसे भोपाल स्थित उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला (Fertiliser Quality Control Laboratory) में रासायनिक विश्लेषण के लिए भेजा।
12 जनवरी 2026 की परीक्षण रिपोर्ट में भोपाल स्थित उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला के सहायक रासायनिक विशेषज्ञ ने कहा, ”यह नमूना निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है और ‘नॉन-स्टैंडर्ड’ पाया गया।”
रिपोर्ट के अनुसार, IFFCO के DAP नमूने में नाइट्रोजन की मात्रा केवल 16.73 प्रतिशत पाई गई जो निर्धारित 18 प्रतिशत से कम है। वहीं फॉस्फोरस 42.17 प्रतिशत पाया गया जो तय मानक 46 प्रतिशत से कम है।
वितरण पर तत्काल रोक
परीक्षण रिपोर्ट जारी होने के कुछ दिनों बाद विदिशा के उप संचालक कृषि के. एस. खापेड़िया ने 21 जनवरी को आदेश जारी कर DAP के उस लॉट और बैच (01/Nov 2025) की बिक्री और वितरण को तुरंत रोकने के निर्देश दिए। इसका नमूना ‘नॉन-स्टैंडर्ड’ पाया गया था।
खापेड़िया ने Fertiliser (Control) Order, 1985 के तहत जारी आदेश में लिखा, ”उक्त उर्वरक के लॉट/बैच का वितरण तुरंत बंद करें। यह जानकारी भी तुरंत उपलब्ध कराएं कि जिले के किन-किन उर्वरक विक्रेताओं को यह खाद सप्लाई की गई थी और कितनी मात्रा में दी गई थी।”
ना सिर्फ DAP बल्कि IFFCO के APS (20:20:0:13) का एक सैंपल जिसमें नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P) और सल्फर (S) नॉन-स्टैंडर्ड पाए गए। किसान APS का इस्तेमाल तिलहन, दलहन, गन्ना, धान और कपास जैसी फसलों के लिए करते हैं। अधिकारियों ने पिछले साल 1 दिसंबर को विदिशा ब्लॉक से APS का एक नमूना लिया और उसे जांच के लिए ग्वालियर के उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला में भेजा।
अपनी रिपोर्ट में लैब ने बताया कि उपलब्ध फॉस्फोरस की मात्रा निर्धारित 20 प्रतिशत के मुकाबले कम (18.34 प्रतिशत) पाई गई। इसी तरह, सल्फर की मात्रा भी तय 13 प्रतिशत से कम (11.43 प्रतिशत) पाई गई।
इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए भेजे गए ईमेल का IFFCO ने कोई जवाब नहीं दिया।
TSP में कमी
इंडियन एक्सप्रेस को मिले दस्तावेज़ों से यह भी पता चला है कि ट्रिपल सुपर फॉस्फेट (TSP) के एक नमूने को भी ‘नॉन-स्टैंडर्ड’ पाया गया। इसे इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) द्वारा बनाया है। TSP में 46 प्रतिशत फॉस्फेट होता है। इसे फॉस्फोरस की कमी को दूर करने और जड़ों के तेज विकास, फूल आने तथा फल बनने में मदद के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
अधिकारियों ने पिछले साल 24 दिसंबर को सिरोंज ब्लॉक (विदिशा) से TSP का नमूना लिया और उसे जांच के लिए भोपाल की फर्टिलाइजर क्वॉलिटी कंट्रोल लैब में भेजा। टेस्ट में पाया गया कि उर्वरक में फॉस्फोरस की मात्रा केवल 40.13 प्रतिशत थी जो निर्धारित 46 प्रतिशत से काफी कम है।
इसके बाद अधिकारियों ने जनवरी में आदेश जारी कर कंपनी को उस उर्वरक के लॉट और बैच की बिक्री तुरंत बंद करने के निर्देश दिए जो ‘नॉन-स्टैंडर्ड’ पाया गया था।
नॉन-स्टैंडर्ड इनपुट पर शिवराज ने जताई चिंता
पिछले कुछ महीनों के दौरान कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि से जुड़े घटिया सामानों की बिक्री पर चिंता जताई है। कृषि मंत्रालय ने किसानों से अपील की है कि अगर कोई उन्हें बीज, उर्वरक या कीटनाशक जैसे नकली कृषि इनपुट बेचने की कोशिश करे तो वे तुरंत हेल्पलाइन नंबर (18000-180-1551) पर इसकी शिकायत करें।
मुख्य उर्वरकों के नमूनों का फेल होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन और शिपिंग में आई बाधाओं के बीच आने वालसे खरीफ सीजन की मांग पूरी करने के लिए तेजी से उर्वरकों का भंडारण कर रही है। हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि खरीफ 2026 के लिए पर्याप्त उर्वरक स्टॉक उपलब्ध है।
एक अधिकारी ने इस महीने की शुरुआत में कहा, ”आज (15 अप्रैल) के अनुसार कुल उर्वरक स्टॉक 184 लाख टन है जबकि पिछले साल यह 160 लाख टन था।”
2025 के खरीफ सीजन में सरकार ने यूरिया की जरूरत 185.39 लाख टन, DAP की 56.99 लाख टन, म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) की 11.13 लाख टन और NPKS की 76.11 लाख टन आंकी थी।
इंपोर्ट पर भारत की निर्भरता
भारत अपनी खाद की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। देश में सीमित स्टॉक होने के कारण उर्वरक उत्पादन के लिए जरूरी प्रमुख कच्चे माल के आयात पर भी काफी निर्भरता है। इसमें फॉस्फेटिक और पोटाशिक (P&K) उर्वरकों के लिए फॉस्फोरिक एसिड, रॉक फॉस्फेट, सल्फर, अमोनिया और म्यूरेट ऑफ पोटाश जैसे इंटरमीडिएट्स शामिल हैं। इसके साथ ही यूरिया उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस भी शामिल है।
उदाहरण के लिए 2024-25 के दौरान भारत ने अपनी रॉक फॉस्फेट की जरूरतों का 86 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा किया। इसी तरह सल्फर की बात करें तो आयात में हिस्सेदारी 52 प्रतिशत रहीजहकि यूरिया क्षेत्र के लिए प्राकृतिक गैस में 78 प्रतिशत, जटिल उर्वरकों के लिए अमोनिया में 75 प्रतिशत, फॉस्फोरिक एसिड में 52 प्रतिशत और म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) में 100 प्रतिशत आयात पर निर्भरता रही।
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