शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज सिंह चौहान महाराष्ट्र में थे। यहां वह अचानक ही पुणे स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र पहुंच गए।
द इंडियन एक्सप्रेस के Delhi Confidential कॉलम में सूत्रों के हवाले से छपी रिपोर्ट के अनुसार, शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र के कामकाज पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और उसके सीनियर अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा।
बताया जा रहा है कि उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नर्सरी का काम फेल हो गया है और संस्था द्वारा विकसित की जा रही अंगूर की किस्में बेअसर हैं।
मीडिया से बोले- कई चीजों को ठीक करने की जरूरत
राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र पर मीडिया से बातचीत करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “अंगूर हमारी कॉमर्शियल क्रॉप है। महाराष्ट्र में देश का 80% अंगूर होता है लेकिन अंगूर उत्पादक किसानों के सामने जलवायु परिवर्तन, ज्यादा बारिश जैसी समस्याएं आ रही हैं। उसके कारण अंगूर की फसल को ज्यादा नुकसान हो रहा है। अलग-अलग तरह के वायरस का अटैक, उन परिस्थितियों में संस्थान को क्या काम करना चाहिए, व्यापक हित में उसपर व्यापक पैमाने पर चर्चा हुई है।”
उन्होंने कहा, “मैंने नर्सरी को भी देखा है, अलग-अलग वैरायटी बनाई जरूर है लेकिन उनमें से कुछ वैरायटी फेमस नहीं हुईं तो आज की जरूरत के हिसाब से हम ज्यादा उत्पादन देने वाली, एक्सपोर्ट क्वालिटी की और अच्छी वैरायटी कैसे बना पाएं उसपर विचार विमर्श हुआ है।”
कृषि मंत्री ने यह भी कहा, “ग्रीन प्लांट सेंटर हम यहां शुरू कर रहे हैं, उसका काम बहुत धीमी गति से चल रहा है। ग्रीन प्लांट सेंटर का मतलब ये है कि किसानों को स्वस्थ पौधें मिलें, रोग मुक्त पौधें मिलें, उसका भी मैंने यहां आज समीक्षा की है। उसका काम मुझे संतोषजनक नहीं लगा। कई दिन हो गए, कई चीजें की जा रही हैं लेकिन कई चीजों को ठीक करने की जरूरत है। हमने संस्थान के सामने जो चुनौती और समस्याएं हैं, उनपर भी बातचीत की है।”
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कृषि मंत्री ने कहा, “हमारा प्याज फिलहाल बांग्लादेश नहीं पहुंच पा रहा है। परिणामस्वरूप, प्याज के बाजार भाव में भारी गिरावट आई है। आज से, NAFED 12.35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से प्याज की खरीद शुरू करेगा।” पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
