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…और मुंबई में उत्पात: कलाकार और किताब के बाद क्रिकेट पर निशाना

मशहूर गजल गायक गुलाम अली और पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी के आक्रामक विरोध के बाद सोमवार को शिवसेना ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष शहरयार खान को निशाने पर लिया।

Author मुंबई | October 20, 2015 9:21 AM
’सोमवार की सुबह बीसीसीआइ के दफ्तर में सौ के लगभग शिव सैनिक घुस गए। उन्होंने काले झंडे और शहरयार वापस जाओ के बैनर लहराते हुए पाकिस्तान मुदार्बाद के नारे लगाए। ’शिवसैनिक भारत और पाकिस्तान के बीच दिसंबर में होनेवाले संभावित क्रिकेट मैचों का विरोध कर रहे थे। (एक्सप्रेस फोटो)

मशहूर गजल गायक गुलाम अली और पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी के आक्रामक विरोध के बाद सोमवार को शिवसेना ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष शहरयार खान को निशाने पर लिया।

शिव सैनिक बीसीसीआइ के मुंबई स्थित दफ्तर में भगवा और काले झंडे लेकर घुस गए। उन्होंने बीसीसीआई अध्यक्ष शशांक मनोहर और शहरयार खान मुर्दाबाद के नारे लगाए, जो दोनों देशों के बीच संभावित क्रिकेट शृंखला की संभावना पर बातचीत करने जा रहे थे। इस हंगामे के चलते सोमवार होनेवाली बातचीत स्थगित करनी पड़ी।यह अब मंगलवार को दिल्ली में हो सकती है। पुलिस ने 10-15 शिव सैनिकों को गिरफ्तार कर बीसीसीआई मुख्यालय की सुरक्षा बढ़ा दी है। आइसीसी और विपक्षी दलों ने जहां इसकी निंदा की है, वहींशिव सेना ने इस उग्र प्रदर्शन का समर्थन किया है।

इस उग्र प्रदर्शन की कड़ी प्रतिक्रिया हुई। शिवसेना के हंगामे पर कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि आखिर शिवसेना की गुंडागर्दी के खिलाफ सूबे के मुख्यमंत्री और कितने दिनों तक मौन धारण करते रहेंगे। दूसरी ओर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता माधव भंडारी ने अप्रत्यक्ष रूप से शिवसेना के इस विरोध का समर्थन करते हुए कहा कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच नहीं होगा तो क्या आसमान टूट जाएगा।

शिवसेना सांसद संजय राऊत ने हंगामे का समर्थन करते हुए कहा कि शिव सैनिकों ने जो किया वह उचित था। उनका विरोध अपराध नहीं है। देश की जो भावना है, उसे शिवसेना ने व्यक्त किया है। हम लंबे समय से पाकिस्तान का विरोध करते आ रहे हैं। जब तक पाकिस्तान हमारे देश में आतंकवादी भेजता रहेगा तब तक तब तक हमारे देश के लोग उसके साथ कोई रिश्ता नहीं रखना चाहते हैं। हमने कोई गलती नहीं की है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता राहुल नार्वेकर ने कहा कि शिवसेना सत्तारूढ़ होते हुए भी विरोध के असंवैधानिक तरीके अपना रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस राजनैतिक तौर पर मजबूर नजर आ रहे हैं। यह दुखद है।

आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता प्रीति शर्मा मेनन ने सोमवार की घटना की निंदा करते हुए कहा कि शिव सेना पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए क्योंकि यह बीते पचास सालों से नफरत की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि अपने आप को महाराष्ट्र की आवाज कहने वाली पार्टी बीते पचास सालों में कभी अपने दम पर सत्ता में नहीं पहुंची।

सोमवार की सुबह बीसीसीआइ के दफ्तर में सौ के लगभग शिव सैनिक घुस गए। उन्होंने काले झंडे और शहरयार वापस जाओ के बैनर लहराते हुए पाकिस्तान मुदार्बाद के नारे लगाए। शिवसैनिक भारत और पाकिस्तान के बीच दिसंबर में होनेवाले संभावित क्रिकेट मैचों का विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि भारत के सैनिक और नागरिक पाक हमलों में शहीद हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में वह पाकिस्तान के किसी भी नागरिक को भारत की जमीन पर कदम नहीं रखने देंगे।

भारत और पाकिस्तानी क्रिकेट शृंखला के बीच में आ रही मुश्किलों का हल निकालने को लेकर सोमवार को शहरयार और शशांक मनोहर के बीच बातचीत होनी थी। शहरयार के साथ पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड के कार्यकारी प्रमुख नजम सेठी भी मुंबई में थे। संभावना जताई जा रही है कि भारत और पाकिस्तान के बीच दुबई में मैच खेले जाएंगे या दिसंबर में त्रिकोणीय श्रंखला का आयोजन किया जा सकता है जिसमें बांग्लादेश की क्रिकेट टीम शामिल हो सकती है।

इसकी भनक लगने पर शिव सैनिक विरोध करने बीसीसीआई पहुंच गए। शिवसेना सांसद अरविंद सावंत का कहना था कि पाकिस्तान हमारे जवानों को मारता है, सैनिकों के सिर काटता है ऐसे में हमें उसके साथ क्रिकेट की चर्चा क्यों करनी चाहिए। दूसरी ओर सेना विभाग प्रमुख पांडुरंग सकपाल का कहना था कि शिवसेना इस बात पर अडिग है कि भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच नहीं होने चाहिए। हमारे सरकार में शामिल होने का मतलब यह नहीं कि शिवसेना अपने रुख से हट जाए।

सप्ताह भर पहले ही शिव सैनिकों ने पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी की किताब के लोकार्पण समारोह का आयोजन करने वाले सुधींद्र कुलकर्णी पर काला रंग डाला था और समारोह में व्यवधान डालने की धमकियां दी थी। उससे पहले पाकिस्तानी गायक गुलाम अली के एक कार्यक्रम का विरोध कर उसे स्थगित करवा दिया था।

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