सांसदों की बगावत के बाद एमएलसी सचिन अहीर का पार्टी छोड़कर जाना शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे के लिए बड़ा झटका है। सचिन अहीर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के साथ चले गए हैं। सचिन अहीर ने वर्ली में आदित्य ठाकरे के राजनीतिक आधार को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी।
सचिन अहीर 1999, 2004 और 2009 में एनसीपी नेता के रूप में वर्ली से विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं। सचिन अहीर वर्ली के ताकतवर राजनेताओं में से एक हैं।
जुलाई, 2019 में आए थे शिवसेना के साथ
जुलाई, 2019 में वह एनसीपी छोड़कर उस वक्त की अविभाजित शिवसेना के साथ आ गए थे। इसके बाद उन्होंने वर्ली में आदित्य ठाकरे को आगे बढ़ाने का काम किया और उनके लिए समर्थन जुटाया।
67,427 वोटों से जीते थे आदित्य ठाकरे
शिवसेना के कई नेताओं का कहना है कि 2019 में जब आदित्य ठाकरे वर्ली से पहली बार चुनाव जीते तो सचिन अहीर ने पर्दे के पीछे से उनके लिए काफी काम किया था। उस चुनाव में आदित्य ठाकरे ने एनसीपी के उम्मीदवार सुरेश माने को 67,427 वोटों से हराया था।
जून, 2022 में सचिन अहीर को शिवसेना ने विधान परिषद में भेजा था लेकिन अब अहीर के पार्टी छोड़ने के बाद शिंदे खेमे को वर्ली में एक मजबूत नेता मिल गया है।
कम हो गई शिवसेना (यूबीटी) की बढ़त
सचिन अहीर के जाने से आदित्य ठाकरे के लिए बड़ी राजनीतिक मुश्किल और भी खड़ी हो गई है क्योंकि 2024 के विधानसभा चुनाव में आदित्य की जीत का अंतर काफी कम हो गया था। तब आदित्य ने शिवसेना के उम्मीदवार मिलिंद देवड़ा को सिर्फ 8,801 वोटों से हराया था।
2024 के लोकसभा चुनाव में भी शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत को वर्ली विधानसभा क्षेत्र से बहुत मामूली बढ़त मिली। यह बढ़त सिर्फ 6,715 वोटों की थी। बढ़त को कम होने को देखते हुए कहा जा सकता है कि वर्ली का विधानसभा क्षेत्र अब शिवसेना (यूबीटी) और आदित्य ठाकरे के लिए आसान नहीं है।
सचिन अहीर का विधान परिषद सदस्य के रूप में कार्यकाल जुलाई, 2028 तक है और उनके आने से शिंदे की शिवसेना को मुंबई और वर्ली में एक अनुभवी चेहरा मिल गया है।
जब सचिन अहीर से पूछा गया कि क्या वह भविष्य में वर्ली से चुनाव लड़ेंगे तो सचिन अहीर ने कहा कि एकनाथ शिंदे उन्हें जो भी जिम्मेदारी देंगे, उसे वह पूरी लगन से निभाने की कोशिश करेंगे जबकि इससे पहले उन्होंने आदित्य ठाकरे को एक मैसेज भेज कर कहा था कि वह वर्ली से उनके खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेंगे।
आदित्य ठाकरे का कहना है कि जिन लोगों को पार्टी ने बहुत कुछ दिया, वह केवल निजी स्वार्थ के लिए पार्टी छोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि वर्ली शिवसेना यूबीटी का गढ़ था, है और रहेगा, चाहे कोई भी पार्टी में शामिल हो या छोड़े, हमारे गढ़ को कोई नुकसान नहीं होगा।
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