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अर्थव्यवस्था पर शिवसेना ने दी मोदी सरकार को नसीहत- गंभीरता से लें मनमोहन की सलाह

शिवसेना ने मुखपत्र सामना में एक लेख के जरिए यह सलाह दी है। मनमोहन ने कहा है कि अर्थव्यवस्था के मौजूदा हालातों ने देश को लंबे समय की मंदी की तरफ धकेल दिया है।

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धीमी अर्थव्यवस्था पर शिवसेना ने कहा है कि मोदी सरकार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सलाह को गंभीरता से लेना चाहिए। शिवसेना के मुताबिक अगर मोदी सरकार ऐसा करेगी तो यह राष्ट्रहित में होगा। हाल ही में मनमोहन सिंह ने एक वीडियो जारी कर मोदी सरकार के पहले और दूसरे कार्यकाल में लिए गए फैसलों को अर्थव्यवस्था के लिए घातक बताया था। उन्होंने कहा है कि अर्थव्यवस्था के मौजूदा हालातों ने देश को लंबे समय की मंदी की तरफ धकेल दिया है। सरकार आर्थिक मोर्चे पर आलोचनाओं के घेरे में है।

शिवसेना ने मुखपत्र सामना में एक लेख के जरिए सलाह दी है। शिवसेना ने सामना में लिखा ‘देश में आर्थिक मंदी के कारण जो भंयकर स्थिति उत्पन्न हुई है, इसकी भविष्यवाणी मनमोहन सिंह ने चार साल पहले ही कर दी थी। उस दौरान उनका मजाक उड़ाया गया था। सच तो यह है कि उन्होंने बुरे दौर में भी अर्थव्यवस्था के लिए परिश्रम किया। अगर उन्हें मौजूदा समय में इसमें गलतियां नजर आ रही होंगी तो उन्हें इसके लिए बोलने का हक है। उन्होंने कहा है कि सरकार की नीतियों की वजह से लाखों लोगों पर नौकरी गंवाने का संकट आ गया है।’

लेख के अंत में कहा गया कि ‘बीते कई सालों से अर्थव्यवस्था का संबंध पार्टी फंड, चुनाव जीतने और घोड़ा बाजार आदि तक के लिए ही सीमित रह गया है। इससे देश की व्यवस्था को चोंट पहुंच रही है। आर्थिक मंदी पर राजनीति न करें। विशेषज्ञों की मदद लेकर देश की तस्वीर बदलें। मनमोहन सिंह ने भी यही सलाह दी है। इनकी सलाह को गंभीरता से लेने में ही राष्ट्र का हित है।’

मालूम हो कि पूर्व प्रधानमंत्री ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर घटकर पांच प्रतिशत पर आने के बाद उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि आर्थिक हालात ‘बेहद चिंताजनक हैं और यह नरमी मोदी सरकार के तमाम कुप्रबंधनों का परिणाम है। पहली तिमाही में 5 फीसदी की जीडीपी वृद्धि दर दर्शाती है कि हम लंबे समय तक बने रहने वाली आर्थिक नरमी के दौर में हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी से बढ़ने की क्षमता है। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भारत इसी दिशा में चलना जारी नहीं रख सकता। इसलिए मैं सरकार से अपील करता हूं कि वह प्रतिशोध की राजनीत को त्याग कर मानव निर्मित संकट से अर्थव्यवस्था को निकालने के लिए सुधी जनों की आवाज सुनें।’

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