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मराठवाड़ा में जल संकट पर बोली शिवसेना- पानी की जगह बीयर पीना हमारी संस्कृति नहीं

सामना संपादकीय में कहा गया, "कुछ भाजपा मंत्रियों का नजरिया है कि बीयर बनाने वाली इकाइयों को निरंतर पेयजल आपूर्ति होनी चाहए। लेकिन लोग चाहते हैं कि पहले लोगों की जिंदगियां बचाई जानी चाहिए।"
Author मुंबई | April 18, 2016 19:08 pm
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा मराठवाड़ा क्षेत्र के सूखाग्रस्त औरंगाबाद में शराब बनाने वाली इकाइयों में जलापूर्ति बंद करने की मांग करने के दो दिन बाद पार्टी ने सोमवार (18 अप्रैल) को कहा कि पानी की जगह बीयर पीना हमारी संस्कृति नहीं है। शिवसेना ने प्रदेश की ग्रामीण विकास मंत्री पंकजा मुंडे की इस टिप्पणी को लेकर उन पर परोक्ष रूप से निशाना साधा कि औद्योगिक इकाइयों को जल की आपूर्ति उनके अपने कोटे से की गई। पार्टी ने कहा कि जनता के बीच भावनाएं यह हैं कि औद्योगिक इकाइयों को बचाने के बजाय मानव जीवन बचाना प्राथमिकता होनी चाहिए।

शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के एक संपादकीय में पार्टी ने कहा, “मराठवाड़ा में बीयर बनाने के दस उद्योग हैं। सूखे की वर्तमान स्थिति को देखते हुए उनके जल में 20 प्रतिशत की कटौती की गई। लेकिन ये उद्योग भी बचाने की जरूरत है क्योंकि हजारों लोगों की जिंदगियां इन पर निर्भर है। सरकार को जल्द ही बीच का रास्ता निकालना होगा।”

संपादकीय में कहा गया कि सरकार को यह समझना चाहिए कि फिलहाल जल का उपयोग सिर्फ मानवीय जीवन बचाने के लिए होना चाहिए। इसमें कहा गया, “जल की जगह बीयर पीना हमारी संस्कृति नहीं है और सूखाग्रस्त क्षेत्रों में रह रहे लोग बोतलबंद पेयजल खरीदने की स्थिति में नहीं है।”

इसमें कहा गया, “कुछ भाजपा मंत्रियों का नजरिया है कि बीयर बनाने वाली इकाइयों को निरंतर पेयजल आपूर्ति होनी चाहए। लेकिन लोग चाहते हैं कि पहले लोगों की जिंदगियां बचाई जानी चाहिए।”

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