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इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप में “कॉपी बॉय” थे शिवसेना नेता संजय राउत, राज ठाकरे ने दी नई नौकरी फिर ऐसे बदलती गई किस्मत

संजय राउत ने अपना करियर इंडियन एक्सप्रेस के मराठी अखबार के साथ वितरित की जाने वाली पत्रिका 'लोकप्रभा' में बौतर एक 'कॉपी बॉय' के रूप में शुरू किया।

Author नई दिल्ली | Updated: December 8, 2019 1:24 PM
राज्य सभा सांसद और शिवसेना नेता संजय राउत। (ANI)

महाराष्ट्र में शिवसेना की अगुवाई वाली सरकार के गठन में शिवसेना के दिग्गज नेता और राज्य सभा सांसद संजय राउत ने अहम भूमिका निभाई। इंडियन एक्सप्रेस के कॉलम इनसाइड ट्रैक में छपी खबर के मुताबिक इसकी एक बड़ी वजह है नेताओं संग संजय राउत का व्यवहार। वो जानते हैं कि राजनीति में दोस्त कैसे बनाए जाते हैं। खास बात है कि राउत ने अपना करियर इंडियन एक्सप्रेस के मराठी अखबार के साथ वितरित की जाने वाली पत्रिका ‘लोकप्रभा’ में बौतर एक ‘कॉपी बॉय’ के रूप में शुरू किया।

इस दौरान उनकी मुलाकात दिवंगत शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे से हुई और वो उन्हें काम के लिए शिवसेना की पत्रिका ‘मार्मिक’ में ले आए। बाल ठाकरे भी एक वक्त में ‘लोकप्रभा’ के लिए कार्टून बनाते थे। बताया जाता है कि बाल ठाकरे संजय राउत के काम से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने राउत के शिवसेना के वैचारिक मुखपत्र ‘सामना’ का संपादक बना दिया।

इसके बाद जब बाल ठाकरे ने अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी उद्धव ठाकरे को घोषित किया तो राज ठाकरे पार्टी से बाहर हो गए। इस दौरान संजय राउत शिवसेना के साथ जुड़े रहे और बाल ठाकरे की सार्वजनिक आवाज बने। हालांकि राउत निजी तौर पर राज ठाकरे के दोस्त बने रहे। महत्वपूर्ण बात यह है कि संजय राउत एनसीपी चीफ शरद पवार के भी काफी करीब हैं। शिवसेना के पुराने नेता तो उन्हें पार्टी में पवार के आदमी के रूप में संदर्भित करते थे। मगर एनसीपी को शिवसेना को समर्थन देने में मनाने के लिए शरद पवार संग उनके मधुर रिश्ते की एक बड़ी वजह रही।

बता दें कि महाराष्ट्र में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। हालांकि गठबंधन में चुनाव लड़ीं भाजपा और शिवसेना ने सरकार बनाने के लिए जरुरी 145 से ज्यादा सीटें जीत ली थीं। मगर साल 2014 में हुए विधानसभा चुनाव के मुकाबले 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को कम सीटें मिलीं। दूसरी तरफ गठबंधन की सहयोगी शिवसेना ने भाजपा को उसका कथित वादा याद दिलाते हुए कहा कि सरकार में दोनों पार्टियों की 50-50 की हिस्सेदारी होगी, चूंकि चुनाव पूर्व दोनों पार्टियों में इस पर सहमति बनी थी। भाजपा आलाकमान ने शिवसेना संग पूर्व में किए गए किसी भी वादे से साफ इनकार कर दिया।

चुनाव परिणाम बाद दोनों पार्टियों में तनातनी का दौर कई दिनों तक जारी रहा। शिवसेना एनसीपी-कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने की कोशिश में जुट गई। विरोधियों से मधुर रिश्ते के चलते संजय राउत को खासतौर पर इस काम में लगाया गया, मगर अजित पवार ने अचानक भाजपा को समर्थन देकर देवेंद्र फडणवीस को एक बार फिर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने में बड़ी भूमिका निभाने की कोशिश की। इसके बदले में उन्हें उप मुख्यमंत्री का पद दिया गया। मगर एनसीपी चीफ शरद पवार की चतुर रणनीति की चलते सारी उम्मीदें धराशाई हो गई और फडणवीस और अजित पवार को पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

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