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सीएम बनने का ख्वाब ले 4000 KM की जन आशीर्वाद यात्रा पर जूनियर ठाकरे, एक दिन पहले किसानों के बीच भरी थी हुंकार

शिवसेना नेताओं को मानना है कि अगर आदित्य को सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट किया जाता है तो बीजेपी को कड़ी टक्कर मिल सकती है। चुनाव में शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है।

Author जलगांव | July 18, 2019 6:45 PM
शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे। फोटो: Facebook/Aditya Thackeray

महाराष्ट्र में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। मुख्यमंत्री बनने का ख्वाब लेकर शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने गुरुवार (18 जुलाई 2019) से 4000 किलोमीटर की ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ शुरू कर दी है। आदित्य ने जलगांव से जन यात्रा की शुरुआत की। इस दौरान उनके साथ पार्टी के अन्य सीनियर नेता भी मौजूद थे।  बुधवार को जूनियर ठाकरे ने पिता के साथ मिलकर किसान रैली का आयोजन कर किसानों के बीच हुंकार भरी थी।

रैली के दौरान उन्होंने कहा ‘आज शिवसेना को महाराष्ट्र के घर-घर तक पहुंचाने के लिए नए युग की शुरुआत हो रही है। इसी के दम पर हम नए महाराष्ट्र का निर्माण करेंगे। शिवसेना देश के युवा, किसानों और महिलाओं के लिए खड़ी है। मेरे लिए यह कोई वोट मांगने की यात्रा नहीं है। मेरे लिए यह तीर्थ यात्रा की तरह है। मैंने बीते सालों में अपने पिता और दादा (बाल ठाकरे) से समस्याओं को कैसे सुलझाना है इसे सिखने की कोशिश की है।

इस दौरान जलगांव के शिवसेना विधायक ने कहा ‘हम आदित्य ठाकरे को राज्य के मुख्यमंत्री पद पर देखना चाहते हैं।’ वहीं इस यात्रा पर युवा सेना के नेता प्रवेश युवा सेना के पदाधिकारी पुरवेश सरनाईक ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा ‘आदित्य जी ने खुद को एक नेता के तौर पर राज्य में पहले ही स्थापित कर लिया है। शिवसेना का एक-एक कार्यकर्ता उन्हें मुख्यमंत्री पद पर देखना चाहता है। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे जो भी निर्णय लेंगे हम उसे मानेंगे।’

बता दें की आदित्य अपनी इस यात्रा को एक कार के जरिए ही पूरा करेंगे। इस दौरान वह मजदूरों, महिलाओं, गरीबों से बातचीत करेंगे। कई शिवसेना नेताओं को मानना है कि अगर 29 वर्षीय युवा नेता आदित्य को सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट किया जाता है तो बीजेपी को कड़ी टक्कर मिल सकती है। चुनाव में शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है। राज्य में अभी बीजेपी की सरकार है। मालूम हो कि शिवसेना ने अपना आखिरी विधानसभा चुनाव अकेले ही लड़ा था। पार्टी ने बीजेपी के साथ तीन दशक पुराना गठबंधन तोड़कर चुनाव में अपनी किस्तम आजमाई थी।

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