ताज़ा खबर
 

गुलाम अली समारोह: शिवसेना ने कहा, आतंकवाद और संस्कृति एकसाथ नहीं चल सकते

गुलाम अली के संगीत समारोह को जबरन रद्द कराए जाने के मुद्दे पर शिवसेना ने कहा है कि सैनिक शहीद हो रहे हों और यहां आनंद उठाया जाता रहे..

Author मुंबई | October 8, 2015 10:37 PM
गुलाम अली के संगीत समारोह को जबरन रद्द कराए जाने के मुद्दे पर राजनीतिक एवं सांस्कृतिक जगत के निशाने पर आई शिवसेना ने कहा है कि सैनिक शहीद हो रहे हों और यहां आनंद उठाया जाता रहे।

गुलाम अली के संगीत समारोह को जबरन रद्द कराए जाने के मुद्दे पर राजनीतिक एवं सांस्कृतिक जगत के निशाने पर आई शिवसेना ने कहा है कि सैनिक शहीद हो रहे हों और यहां आनंद उठाया जाता रहे। इसके साथ ही शिवसेना ने यह भी कहा कि वह तब तक पाकिस्तान का ‘बहिष्कार’ जारी रखेगी, जब तक वह देश आतंकी गतिविधियों को रोक नहीं देता।

पड़ोसी देश द्वारा ‘संघर्ष विराम का उल्लंघन’ किए जाने के कारण भारतीय सैनिकों को हो रही पीड़ा के प्रति असंवेदनशील बने रहना मुश्किल बताते हुए शिवसेना की युवा शाखा के प्रमुख आदित्य ठाकरे ने कहा, ‘‘हम यहां आनंद नहीं उठा सकते, जबकि हमारे सैनिक कष्ट उठा रहे हों।’’

आदित्य ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम सभी को गुलाम अली के गीत पसंद हैं। लेकिन हमें सैनिकों के प्रति थोड़ी संवेदना रखने की जरूरत है। हर रोज संघर्षविराम उल्लंघन हो रहे हैं। हम यहां आनंद नहीं उठा सकते, जबकि हमारे सैनिक कष्ट उठा रहे हों।’’

युवासेना के प्रमुख और शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य ने कहा, ‘‘आतंकवाद और संस्कृति एकसाथ नहीं चल सकते। हम उनके संगीत या कला के विरोधी नहीं हैं। लेकिन हम ऐसे समय पर आनंद नहीं उठा सकते जब हमारे सैनिक कष्ट उठा रहे हों।’’

जब आदित्य से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा शो को सुरक्षा देने के प्रस्ताव के बारे में पूछा गया तो युवा सेना के नेता ने वापस निशाना साधते हुए कहा, ‘‘मुख्यमंत्री को पहले राज्य की जनता को सुरक्षा उपलब्ध करवानी चाहिए और फिर किसी समारोह को सुरक्षा देने की बात करनी चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर में लोग आतंकी गतिविधियों से प्रभावित हो रहे हैं। जब तक यह आतंकवाद नहीं रोका जाता, तब तक पाकिस्तान के साथ कोई वार्ता नहीं होनी चाहिए और तब तक उस देश का बहिष्कार किया जाना चाहिए।’’

गुलाम अली का संगीत समारोह कल षणमुखानंद हॉल में होना था लेकिन शिवसेना की ओर से इस शो में व्यवधान पैदा करने की धमकी दिए जाने के बाद बुधवार रात इसे रद्द कर दिया गया। समारोह के आयोजकों ने इस समारोह का आयोजन मशहूर गजल गायक जगजीत सिंह को श्रद्धांजलि के रूप में करने का फैसला किया था। आयोजकों ने उद्धव ठाकरे के साथ मुलाकात के बाद शो को रद्द करने की घोषणा की।

गुलाम अली इससे पहले जगजीत सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए कई भारतीय गायकों के साथ कार्यक्रम पेश कर चुके हैं। कांग्रेस और राकांपा ने भी समारोह को जबरन रद्द कराए जाने के लिए शिवसेना पर निशाना साधा।

भारत के कलाकारों और बुद्धिजीवियों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाओं के अलावा पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने भी शो रद्द किए जाने पर निराशा जाहिर की। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण तत्व है और उनका देश इसे ‘प्रोत्साहित’ करता है।

शिवसेना के नेता संजय राउत ने मुंबई में कहा, ‘‘हमने गुलाम अली के संगीत समारोह को रद्द करके शहीद भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी है।’’

इससे पहले, शिवसेना की सिने शाखा चित्रपट सेना ने षणमुखानंद हॉल के प्रबंधन को एक पत्र में लिखा था कि यदि वह किसी भी पाकिस्तानी कलाकार को बुलाता है तो उसे ‘‘शिवसेना और देशभक्त लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।’’

चित्रपट सेना के पदाधिकारी मंगेश सतामकर ने पत्र में कहा कि शिवसेना का रुख यही रहा है कि जबतक पाकिस्तान आतंकी गतिविधियों को रोक नहीं देता, तब तक उसके साथ कोई सांस्कृतिक, खेल और राजनीतिक संबंध नहीं रखा जाना चाहिए।

हालांकि राकांपा ने गुलाम अली के समारोह को रद्द किए जाने को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया और शिवसेना के दोहरे मापदंडों की निंदा की। राकांपा के प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि करगिल युद्ध के बाद शिवसेना प्रमुख दिवंगत बाल ठाकरे ने पाकिस्तानी क्रिकेटर जावेद मियांदाद की मेजबानी अपने आवास ‘मातोश्री’ पर की थी।

मलिक ने कहा कि शिवसेना जनता की भावनाओं पर राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह के दोहरे मापदंड निंदनीय हैं। कला, संस्कृति, खेल जैसे क्षेत्र अवरोधों को तोड़ने और द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने में मदद करते हैं।’’

महाराष्ट्र कांग्रेस ने बुधवार शाम शिवसेना पर हमला बोलते हुए कहा था कि पार्टी ऐसी ओछी राजनीति में उलझी है क्योंकि सरकार में उसे हाशिए पर डाल दिया गया है। कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा था कि शिवसेना को अपने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिए केंद्र और राज्य सरकार की आलोचना करने के अलावा कोई और काम नहीं है।

सावंत ने कहा था, ‘‘शिवसेना की बातों को (सरकार के अंदर) कोई महत्व नहीं मिलता और इसीलिए वह इस तरह की ओछी राजनीति कर रही है। भारत और पाकिस्तान के बीच के मुद्दे केंद्र द्वारा सुलझाए जाने चाहिएं। कला, संस्कृति और खेलों को इसमें नहीं खींचना चाहिए।’’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App