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मुस्लिमों को 5% आरक्षण देने, सावरकर को भारत रत्न की मांग छोड़ने को तैयार हुई शिवसेना, कांग्रेस-NCP संग कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर मंथन

कांग्रेस और एनसीपी ने बैठक के दौरान शिवसेना से मुस्लिमों को शिक्षा के क्षेत्र में 5% आरक्षण देने के लिए राजी कर लिया है। यह योजना पूर्ववर्ती कांग्रेस और एनसीपी सरकरार के कार्यकाल में शुरु की गई थी, लेकिन सरकार बदलने के साथ ही यह योजना भी लागू नहीं हो सकी थी।

Author मुंबई | Updated: November 15, 2019 10:50 AM
शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी के बीच न्यूनतम साझा कार्यक्रम को लेकर सहमति बनी। (फाइल फोटो)

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में अपने एक बयान में शिवसेना पर गठबंधन खत्म करने का आरोप लगाया था।। वहीं शाह के बयान के एक दिन बाद ही यानि कि गुरुवार को शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। दरअसल शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के नेताओं ने गुरुवार को एक संयुक्त बैठक की, जिसमें एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर चर्चा की गई। शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे ने इस बैठक में शिरकत की। मीटिंग में बताया कि एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम तैयार किया गया है, जिसे अब तीनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व के पास भेजा जाएगा, यदि पार्टी आलाकमान इस न्यूनतम साझा कार्यक्रम को अपनी सहमति दे देती है तो जल्द ही राज्य में शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की सरकार बन सकती है।

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस और एनसीपी ने बैठक के दौरान शिवसेना से मुस्लिमों को शिक्षा के क्षेत्र में 5% आरक्षण देने के लिए राजी कर लिया है। यह योजना पूर्ववर्ती कांग्रेस और एनसीपी सरकरार के कार्यकाल में शुरु की गई थी, लेकिन सरकार बदलने के साथ ही यह योजना लागू नहीं हो सकी थी। ऐसे में अगर शिवसेना-कांग्रेस और एनसीपी का गठबंधन वाली सरकार बनती है तो उक्त योजना फिर से लागू की जाएगी। इसके साथ ही न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत शिवसेना, वीर सावरकर को भारत रत्न देने की अपनी मांग से भी पीछे हट सकती है!

इनके अतिरिक्त कांग्रेस और एनसीपी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में कुछ वादे किए थे, जैसे किसानों का लोन माफ करना, 10 रुपए में खाना, बेरोजगार युवाओं को मासिक भत्ता, नई इंडस्ट्री में स्थानीय युवाओं का नौकरी के लिए कोटा आदि भी न्यूनतम साझा कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, 17-18 नवंबर को शरद पवार और सोनिया गांधी की दिल्ली में मुलाकात हो सकती है, जिसमें शिवसेना से गठबंधन पर बातचीत हो सकती है।

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र चुनावों में भाजपा और शिवसेना गठबंधन को स्पष्ट जनादेश मिला था, लेकिन दोनों पार्टियों के बीच सीएम पद को लेकर पेंच फंस गया। दरअसल शिवसेना ढाई-ढाई साल के लिए सीएम पद पर दोनों पार्टियों का कब्जा चाहती थी, लेकिन भाजपा ने इससे साफ इंकार कर दिया। इसके बाद शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन करने का फैसला किया है। वहीं चुनाव के बाद कई दिनों तक भी जब कोई भी पार्टी सरकार बनाने का आंकड़ा पेश नहीं कर पायी तो राज्य में फिलहाल राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है।

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