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महाराष्ट्र : शिवसेना की नाराजगी, मंत्रियों पर आरोप रहे सुर्खियों में

महाराष्ट्र में इस साल सत्तारूढ़ भाजपा-शिवसेना गठबंधन में मनमुटाव और झगड़े, कई मंत्रियों के खिलाफ आरोप, किसानों की समस्याएं, याकूब मेमन की फांसी और डांस बारों से संबंधित मुद्दे सुर्खियों में छाए रहे..
Author मुंबई | December 20, 2015 00:31 am
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस (पीटीआई फाइल फोटो)

महाराष्ट्र में इस साल सत्तारूढ़ भाजपा-शिवसेना गठबंधन में मनमुटाव और झगड़े, कई मंत्रियों के खिलाफ आरोप, किसानों की समस्याएं, याकूब मेमन की फांसी और डांस बारों से संबंधित मुद्दे सुर्खियों में छाए रहे। राकांपा प्रमुख शरद पवार के गृहक्षेत्र बारामती में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा सहित अन्य बड़े लोगों के दौरे की खबरें भी सुर्खियों में रहीं। गत 31 अक्तूबर को एक साल पूरा करने वाली देवेंद्र फडणवीस सरकार शिवसेना के साथ अंदरूनी कलह से परेशान रही। शिवसेना पिछले साल दिसंबर में सरकार में शामिल हुई थी।

कल्याण डोंबिवली नगर निगम चुनावों से पहले भी सत्तारूढ़ गठबंधन में मनमुटाव सार्वजनिक रूप से दिखा। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने धमकी दी कि यदि भाजपा अपना ‘अहंकार’ नहीं छोड़ती है तो वे अपना समर्थन वापस ले लेंगे। फडणवीस ने तब शिवसेना से कहा कि वह भाजपा को कम करके न आंके और कहा कि उनकी पार्टी ने ‘चूड़ियां नहीं पहन रखी हैं’। नगर निकाय में त्रिशंकु स्थिति उत्पन्न होने पर भाजपा और शिवसेना ने कड़वाहट के बीच लड़े गए चुनाव के द्वेष को पीछे छोड़ते हुए सत्ता में साझेदारी का फैसला किया।

अक्तूबर में सत्तारूढ़ गठबंधन सहयोगियों के बीच मनमुटाव गहराने के बीच शिवसेना मुंबई में अंतरराष्ट्रीय बाबा साहब आंबेडकर स्मारक और दो मेट्रो लाइनों के भूमि पूजन सहित मोदी के कार्यक्रमों से दूर रही। समारोहों के लिए भाजपा ने उद्धव को भी महत्त्व नहीं दिया और वे सूखा प्रभावित मराठवाड़ा के बीड़ चले गए जहां पार्टी ने परेशान किसानों को सहायता बांटी।

फरवरी में पवार ने मोदी को पश्चिमी महाराष्ट्र के बारामती में आमंत्रित किया जिससे राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगने लगीं। आठ महीने बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली भी बारामती गए। मोदी ने हालांकि महाराष्ट्र में चुनावों के दौरान एनसीपी (राकांपा) को ‘नेचुरली करप्ट पार्टी’ करार दिया था लेकिन फरवरी के दौरे में एक नए तरह का मिलन दिखा जहां प्रधानमंत्री का सुर कुछ अलग था। प्रधानमंत्री ने पवार को एक अनुभवी नेता करार देते हुए कहा था, ‘मैं शरद पवार से एक महीने में दो बार से ज्यादा बात करता हूं। शरद पवार ने हमेशा किसानों के दुख के बारे में सोचा है’। यहां तक कि बारामती और पुणे में सिलसिलेवार कार्यक्रमों में शामिल हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली एक रात के लिए बारामती के नजदीक स्थित पवार के गोविंद बाग आवास में ठहरे। मोदी राष्ट्रीय राजधानी में पवार के 75 साल पूरे होने पर आयोजित भव्य समारोह में भी शामिल हुए और राकांपा प्रमुख की राजनीतिक कुशाग्रता की प्रशंसा की। सत्तरूढ़ गठबंधन सहयोगियों के बीच मनमुटाव के चलते राज्य मंत्रिमंडल के विस्तार में भी विलंब हुआ। शिवसेना के सरकार में शामिल होने के बाद फडणवीस सरकार के मंत्रियों की संख्या 10 से बढ़कर 30 हो गई। वर्तमान में 20 मंत्री भाजपा से और 10 मंत्री शिवसेना से हैं।

महिला और बाल कल्याण मंत्री पंकजा मुंडे पर जून में सरकार संचालित स्कूलों के लिए 206 करोड़ रुपए मूल्य की चीजें खरीदने के ठेके देने से संबंधित एक घोटाले में शामिल होने का आरोप लगा। बाद में शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े पर ठेके देने में अनियिमितताओं का आरोप लगा। आरोप में कहा गया कि उनके विभाग ने आवश्यक ई निविदा के बिना 191 करोड़ रुपए के ठेके को अंतिम रूप दिया। विपक्ष ने तावड़े की इंजीनियरिंग दिग्री फर्जी होने का भी आरोप लगाया। राज्य विधानसभा में इन मुद्दों को उठाते हुए विपक्ष ने पंकजा और तावड़े के इस्तीफों की मांग की।

कांग्रेस ने जून में आरोप लगाया कि जल आपूर्ति मंत्री बबनराव लोनिकर की दो पत्नियां हैं, लेकिन निर्वाचन आयोग के समक्ष अपने हलफनामे में उन्होंने केवल एक पत्नी का नाम दिया है। गृह राज्य मंत्री रंजीत पाटील भी चुनावी हलफनामे में संपत्ति का पूरा ब्योरा नहीं देने के आरोपों में घिरे। मार्च में जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन एक स्कूल के समारोह में रिवॉल्वर ले कर जाने से विवादों में उलझे।

फडणवीस ने नवंबर में शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की तीसरी पुण्यतिथि पर उनके लिए एक स्मारक की घोषणा की। इस कदम को दोनों सहयोगी दलों के बीच रिश्तों में बर्फ पिघलने के रूप में देखा गया। यह साल पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता नारायण राणे के लिए निराशाजनक रहा जो कंकावली निर्वाचन क्षेत्र से पिछले साल विधानसभा चुनाव हार गए थे। राणे ने अप्रैल में बांद्रा विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव भी लड़ा, लेकिन वापसी के प्रयास विफल रहे। मुंबई में 1993 में हुए बम विस्फोटों के मामले में दोषी याकूब मेमन को 30 जुलाई को नागपुर केंद्रीय कारागार में फांसी दे दी गई।

फरवरी में तर्कवादी गोविंद पानसरे की हत्या हो गई। पुलिस ने घटना के सात महीने बाद इस मामले में सनातन संस्था के एक स्वयंसेवी को गिरफ्तार किया। सुप्रीम कोर्ट ने ने पिछले महीने महाराष्ट्र सरकार को आदेश दिया कि वह दो हफ्ते के भीतर डांस बारों को दोबारा खोलने के लिए लाइसेंस देना शुरू करे। फडणवीस ने कहा था कि उनकी सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करती है, लेकिन वह सैद्धांतिक रूप से डांस बारों को पुन: खोलने के खिलाफ है और सभी कानूनी विकल्प आजमाए जाएंगे ।

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