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शिवसेना ने बीजेपी से पूछा- RSS कार्यकर्ताओं को राज्यपाल बना सकते हो, फिर भागवत को राष्ट्रपति क्यों नहीं

उद्धव ठाकरे ने मीडिया से बात करते हुए कहा, राज्यपालों की नियुक्ति को देखिए। जब आरएसएस कार्यकर्ताओं को राज्य का गवर्नर (राज्यपाल) बनाया जा सकता है तो भगवात को राष्ट्रपति बनाने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।

शिवसेना सांसद संजय राउत ने सोमवार को कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत राष्ट्रपति पद के लिए अच्छी पसंद होंगे।

आरएसएस के सरसंघ चालक मोहन भागवत की राष्ट्रपति पद की सदस्यता के समर्थन में बीजेपी की कथित अनिच्छा को लेकर शिवसेना ने भाजपा पर सवाल उठाए है। साथ सेना ने एक बार फिर से राष्ट्रपति के लिए भागवत के नाम को आगे बढ़ाने की वकालत की। शिवसेना के सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब बीजेपी पार्टी आरएसएस को लोगों पर विश्वास करके उन्हें राज्यपाल पद पर नामित किया जा सकता है तो देश का नेतृत्व करने में उनको कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हमारी दिल से इच्छा है कि बीजेपी की ओर से भागवत के नाम को राष्ट्रपति पद के लिए बढ़ाया जाना चाहिए। भागवत, हिंदू राष्ट्र के हमारे संकल्प के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार हैं।

उद्धव ठाकरे ने मीडिया से बात करते हुए कहा, राज्यपालों की नियुक्ति को देखिए। जब आरएसएस कार्यकर्ताओं को राज्य का गवर्नर (राज्यपाल) बनाया जा सकता है तो भगवात को राष्ट्रपति बनाने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। शिवसेना के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने राष्ट्रपति के लिए शरद पवार का नाम लिया था। उद्धव ने इस संबंध में अपना रुख साफ करते हुए कहा कि राष्ट्रपति पद को लेकर पवार और उनके बीच कोई चर्चा नहीं हुई है। ठाकरे ने कहा कि किसके मन में क्या चल रहा है उनको इसकी जानकारी नहीं है।

उद्धव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष किया कि पवार उनके गुरु हैं। उन्हें पद्मविभूषण पुरस्कार भी दिया है। ठाकरे ने किसानों के कर्जमाफी की मांग की और पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने पर नाराजगी भी जताई। छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ जवानों पर हुए हमले को लेकर भी शिवसेना ने बीजेपी पर निशाना साधा।

बता दें कि इसी साल जुलाई में देश के नए राष्ट्रपति को चुना जाना है। बताया जा रहा है कि प्रसिडेंट बनने की रेस में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का नाम सबसे आगे चल रहा है। इस बीच शिवसेना ने राष्ट्रपति पद के लिए संघ प्रमुख मोहन भागवत का नाम उठाया था। हालांकि भागवत ने इसे खारिज करते हुए जोर देकर कहा था कि यदि उनके नाम का प्रस्ताव आता भी है तो वह इसे स्वीकार नहीं करेंगे।

 

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