ताज़ा खबर
 

पर्यावरण के प्रति बेहद संवेदनशील थीं शीला

1998 में जब शीला दीक्षित पहली बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं, तब दिल्ली में हरित क्षेत्र कुल भूभाग का महज आठ फीसद था। प्रदूषण का भयावह हाल था।

Author नई दिल्ली | Updated: July 22, 2019 5:37 AM
शीला दीक्षित तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रही थीं। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः ताशी तोबग्याल)

प्रतिभा शुक्ल

पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की अंत्येष्टि रविवार को सीएनजी चालित शवदाह गृह में की गई। सीएनजी चालित शवदाह गृह में उनकी अंत्येष्टि का होना अकारण नहींबल्कि यह उनके पर्यावरण प्रेम की वजह से किया गया। उन्होंने सीएनजी शवदाह गृह सेवा की शुरुआत अपने तीसरे कार्यकाल में की थी और इच्छा जताई थी कि उनके अंतिम संस्कार में सीएनजी का उपयोग किया जाए। उन्होंने अपने कार्यकाल में दिल्ली के हरित क्षेत्र को बढ़ाने, सौ फीसद सीएनजी आधारित सार्वजनिक परिवहन व दिल्ली मेट्रो जैसे पर्यावरण अनुकूल काम किए।

दीक्षित के करीबियों के मुताबिक वे पर्यावरण के प्रति बेहद संवेदनशील थीं। उनके निजी सचिव रहे एके त्रिपाठी ने बताया कि 1998 में जब शीला दीक्षित पहली बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं, तब दिल्ली में हरित क्षेत्र कुल भूभाग का महज आठ फीसद था। प्रदूषण का भयावह हाल था। हालत ऐसे थे कि आइटीओ चौराहे पर थोड़ी देर खड़े होने पर चेहरे और कपड़ों पर कालिख जमा हो जाती थी। ऐसे में उन्होंने दिल्ली से औद्योगिक इकाइयों को हटाया और पूरी सार्वजनिक परिवहन सेवा को सीएनजी पर लाने का काम किया। सीएनजी की कमी और अदालत की तीन दिन की मोहलत के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। सीएनजी बसें लाने से लेकर 60 हजार आॅटो व करीब इतनी ही टैक्सियों को सीएनजी पर लाने का काम किया।

त्रिपाठी बताते है कि उन्होंने दिल्ली के वन क्षेत्र (हरित क्षेत्र) को आठ से बढ़ाकर 30.9 फीसद कर दिया था। दिल्ली मेट्रो के निर्माण में तेजी लाने के लिए भी उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी ताकि लोगों को पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था मिल सके। त्रिपाठी बताते हैं कि उनकी कोशिश रहती थी कि मेट्रो या फ्लाइओवर को बनाने में पेड़ों को कम से कम नुकसान पहुंचे। पेड़ों को काटने की बजाय स्थानांतरित करने का काम भी उन्हीं के कार्यकाल में हुआ। उनकी करीबी रहीं पूर्व मंत्री प्रोफेसर किरण वालिया ने बताया कि उन्होंने सभी स्कूलों में पर्यावरण क्लब बनवाए।

बच्चों में पर्यावरण के प्रति समझ व जिम्मेदारी पैदा करने के लिए वे यमुना की सफाई में अपने साथ स्कूली बच्चों को भी लाती थीं। प्रोफेसर वालिया ने बताया कि उन्होंने भागीदारी योजना के तहत आरडब्लूए के साथ हरित व नीले कूड़े को अलग करने की योजना शुरू की थी। त्रिपाठी बताते हैं कि शीला दीक्षित ने मोतीलाल नेहरू मार्ग पर स्थित अपने सरकारी आवास में उन्होंने हरित क्षेत्र विकसित कर रखा था, जहां विभिन्न प्रजातियों के पौधे थे। यह क्षेत्र स्कूली बच्चों के लिए बनवाया था। जहां दिल्ली के तमाम स्कूलों के बच्चे आते थे। यहां गौरैया और चमगादड़ संरक्षण का काम भी किया। दीक्षित ने खरपतवार जलाने के खिलाफ भी कानून बनाया।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 पंचतत्व में विलीन हुईं शीला दीक्षित, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
2 नसीरुद्दीन ने अब दिया ‘मॉब लींचिंग’ पर बयान, कहा- काफी दर्द झेला है
3 लोकसभा में कांग्रेस के सदस्य तो बढ़े पर प्रभाव नहीं