पंजाब में चुनाव से पहले ही कांग्रेस को खानी पड़ी मुंह की, विपक्ष के दबाव में बदलना पड़ा प्रभारी - Jansatta
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पंजाब में चुनाव से पहले ही कांग्रेस को खानी पड़ी मुंह की, विपक्ष के दबाव में बदलना पड़ा प्रभारी

पंजाब चुनाव: शीला दीक्षित को सौंपी जा सकती हैं प्रदेश कांग्रेस कमान, सिख दंगों पर विवाद के चलते कमल नाथ ने दिया था इस्‍तीफा।

Author नई दिल्‍ली | June 16, 2016 5:40 PM
हाल ही में हुए राज्‍यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग झेलने के बाद पार्टी राज्‍य में संगठन को मजबूत करना चाहती है ताकि चुनाव प्रचार के दौरान किसी तरह की समस्‍या ना हो।

कांग्रेस पार्टी के वरिष्‍ठ नेता कमल नाथ के इस्‍तीफा देने के बाद पंजाब के लिए नए प्रभारी की तलाश शुरू हो गई थी। न्‍यूज चैनल India Today और Times Now की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी ने दिल्‍ली की पूर्व मुख्‍यमंत्री शीला दीक्षित को राज्‍य में अगले साल होने वाले चुनावों को देखते हुए कमान सौंपी है। जबकि NDTV का कहना है कि शीला दीक्षित को उत्‍तर प्रदेश चुनाव में पार्टी का चेहरा बनाकर पेश किया जा सकता है। पार्टी के वरिष्‍ठ नेता कमल नाथ ने 1984 सिख विरोधी दंगों में कथित भूमिका को लेकर नए विवाद के बीच 15 जून की रात, पंजाब का प्रभार लौटा दिया था। उन्होंने पार्टी अध्‍यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अपनी मंशा साफ की थी। सोनिया गांधी ने बिना किसी देरी के कमल नाथ का इस्‍तीफा मंजूर कर लिया था।

पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। हाल ही में हुए राज्‍यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग झेलने के बाद पार्टी राज्‍य में संगठन को मजबूत करना चाहती है ताकि चुनाव प्रचार के दौरान किसी तरह की समस्‍या ना हो। इसी को देखते हुए वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता कमल नाथ को पंजाब का प्रभारी बनाया गया था।

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कमल नाथ ने सोनिया को लिखे अपने पत्र में कहा था, ‘‘…मैं आग्रह करता हूं कि मुझे (पंजाब में) मेरे पद से मुक्त किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो कि पंजाब से असल मुद्दों से ध्यान नहीं भटके।’’

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पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमल नाथ ने कहा कि वह ‘‘पिछले कुछ दिन में नयी दिल्ली में 1984 के दर्दनाक दंगों को लेकर पैदा गैरजरूरी विवाद से जुड़े घटनाक्रम से आहत’’ हैं। उन्होंने यह कदम ऐसे समय उठाया जब अकाली दल, भाजपा और आप ने इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख विरोधी दंगों में कमलनाथ की कथित भूमिका को लेकर उन पर तथा कांग्रेस पर हमला किया था। उनकी नियुक्ति को सिखों के ‘‘जख्मों पर नमक छिड़कने’’ जैसा बताते हुए तीनों दल इस नियुक्ति को बड़ा तूल देने की तैयारी में थे।

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