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शेहला हत्याकांड: ‘सबूत’ गुम करने पर सीबीआइ के दो अफ़सरों के ख़िलाफ़ जांच

चार साल पहले भोपाल में हुई आरटीआइ कार्यकर्ता शेहला मसूद की हत्या के सिलसिले में केंद्रीय जांच ब्यूरो अपने दो बड़े अफसरों की भूमिका की जांच कर रहा है। इन अफसरों पर हत्याकांड एक संदिग्ध के खिलाफ ‘अहम सबूत’ गायब करने का आरोप है, जिसके कारण जांच पर असर पड़ा। सूत्रों का कहना है किफरवरी […]

Author April 4, 2015 9:32 AM
शेहला मसूद की अगस्त 2011 में भोपाल में उसके घर के पास हत्या कर दी गई थी।

चार साल पहले भोपाल में हुई आरटीआइ कार्यकर्ता शेहला मसूद की हत्या के सिलसिले में केंद्रीय जांच ब्यूरो अपने दो बड़े अफसरों की भूमिका की जांच कर रहा है। इन अफसरों पर हत्याकांड एक संदिग्ध के खिलाफ ‘अहम सबूत’ गायब करने का आरोप है, जिसके कारण जांच पर असर पड़ा।

सूत्रों का कहना है किफरवरी 2014 में तत्कालीन सीबीआइ निदेशक रंजीत सिन्हा ने इन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिक जांच का आदेश दिया था। प्राथमिक जांच में इस केस की जांच कर रहे डीआइजी और पड़ताल अधिकारी अरुण बोथरा को अहम साक्ष्य गायब करने का दोषी पाया गया बोथरा के अलावा सीबीआइ एक संयुक्त निदेशक के खिलाफ जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच का आदेश हत्या के मुकदमे की सुनवाई के दौरान दिया गया था। उस समय पाया गया कि दो पेन ड्राइव में महफूज रखे गए महत्त्वपूर्ण साक्ष्य के डाटा गायब कर दिए गए हैं।

शेहला मसूद की अगस्त 2011 में भोपाल में उसके घर के पास हत्या कर दी गई थी। मध्य प्रदेश सरकार ने इस मामले को सीबीआइ के हवाले कर दिया था। सीबीआइ ने इस मामले में मई 2012 में जाहिदा परवेज, सबा फारूकी, शाकिब अली (डैंजर), इरफान और ताबिश के खिलाफ इंदौर की सीबीआइ अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया था।

सीबीआइ का कहना है कि शेहला मसूद का कत्ल मोहब्बत में डाह का मामला दिखता है। उसने दावा किया कि मुख्य अभियुक्त जाहिदाष शेहला कई भाजपा विधायक ध्रुव नारायण सिंह से करीबी को लेकर ईर्ष्या करती थी। शेहला को रास्ते से हटाने के लिए उसने भाड़े के हत्यारों की मदद ली और बड़ी सफाई से कत्ल की इस वारदात को अंजाम दिया। हत्या में शामिल सभी लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर मुकदमा चल रहा है। इस हत्याकांड ने राजनीतिक हल्कों को सन्न कर दिया था, क्योंकि जांच में सामने आ रहा था कि शेहला के रिश्ते काफी रसूखदार लोगों और नेताओं से थे, इसमें एक सांसद का नाम भी था।

एक अधिकारी ने अपनी पहचान न जाहिर करते हुए इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जांच के दौरान सेंट्रल फारेंसिक साइंस लेबोरेट्री (सीएफएसएल) ने पाया कि दो पेन ड्राइव गुम हैं। सीएफएसएल को जिस लिफाफे में पेन ड्राइव भेजी गई थीं, उसमें दो कम थीं। लिफाफे में 23 पेन ड्राइव मिली थीं ,जबकि 25 का जिक्र किया गया था।

अधिकारी ने बताया कि एक कनिष्ठ प्रशासनिक कर्मचारी ने जांचकर्ताओं को बताया कि दो अफसरों ने लिफाफे से दो पेन ड्राइव निकालने का आदेश दिया था। दरअसल इन पेन ड्राइव में उस संदिग्ध के खिलाफ मजबूत साक्ष्य थे, जिसके खिलाफ मामले की जांच चल रही है। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि अधिकारियों ने जान-बूझकर साक्ष्य गायब किए ताकि संदिग्ध के खिलाफ मामले को कमजोर किया जा सके। प्रारंभिक जांच जनवरी 2015 में पूरी हुई और अभियोजन के निदेशक की राय का इंतजार है। सीबीआइ के एक प्रवक्ता ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। इस बारे में कुछ टिप्पणी करना ठीक नहीं होगा, क्योंकि मामला अदालत में विचाराधीन है।

इस मामले में जब इंडियन एक्सप्रेस ने अरुण बोथरा का पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने आरोपों से इनकार किया। बोथरा का कहना था कि उन्होंने कुछ गलत नही किया।

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