Kumar Vishwas On Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी की करारी हार हुई है। सीएम ममता बनर्जी ने हार के बाद इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। इसे लेकर कवि कुमार विश्वास ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में एक निश्चित मर्यादा होती है जिसका पालन करना आवश्यक है।

कुमार विश्वास ने मीडिया से बातचीत में कहा, “जब अति हो जाती है तो उसकी वर्जना होती है। हार के चुनावों में जो लोग सड़क पर हैं, उनके हाथों में किसी पार्टी का झंडा नहीं है। उनके हाथों में तिरंगा है या भगवा ध्वज है। आप एक बहुत बड़े वृहत्तर समाज को, उनकी भावनाओं को अनवरत आहत करेंगे। आप अगर निरंकुश तरीके से काम करेंगे तो प्रजा इसी तरह का दंड देती है।”

कुमार विश्वास ने आगे कहा, “यह लगातार हम लोकतंत्र में देखते हैं और मैं स्वयं इसका भोगी हूं क्योंकि दो माह पूर्व मेरे पांच आयोजन थे वो निरस्त कराए गए। हमने निजी जगह पर करने के लिए कहा था तो वहां पर भी पुलिस आ गई।” कुमार विश्वास ने कहा, “लोकतंत्र की एक मर्यादा होती है, उनके मना करने से कुछ नहीं होता है। राज्यपाल महोदय जिस दल के पास जिस दल के पास सर्वाधिक दल होंगे तो उसके नेता को बागडोर सौंप देंगे। लेकिन मैं आशा करता हूं कि उन्हें इस स्थिति पर मंथन करना चाहिए।”

वे बड़ी योद्धा हैं- कुमार विश्वास

कुमार विश्वास ने कहा, “उन्हें इस पर पुनर्विचार करना चाहिए, वो बड़ी योद्धा हैं और बड़ी लड़ती रही हैं, वामपंथ के जिन असुरी शक्तियों के खिलाफ उन्होंने युद्ध लड़ा था, कालांतर में वो सब असुर उनकी पार्टी में आ गए। मैं नई सरकार को भी ये सलाह दूंगा कि वे ध्यान रखें कि जिनकी अस्थियों पर ये ध्वज फहराया गया है, उन्हीं का सम्मान हो। ऐसा ना हो कि जो लोग वामपंथ के समय में पटका पहनकर काम करते थे, फिर टीएमसी में आ गए और वहीं लोग चोला बदलकर आ जाएंगे तो बंगाल को अपने दुखों से मुक्ति नहीं मिल पाएगी।”

ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार किया

टीएमसी नेता ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में आया परिणाम सभी के लिए काला दिन है। उनकी पार्टी ने इस फैसले को चुनाव परिणामों में कथित हेरफेर के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध बताया। पीटीआई समाचार एजेंसी के अनुसार, बुधवार को कालीघाट स्थित अपने आवास पर नवनिर्वाचित विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ एक बंद कमरे में हुई बैठक में उन्होंने कहा, “अगर वे चाहें तो राष्ट्रपति शासन लागू कर सकते हैं। अगर वे चाहें तो मुझे बर्खास्त कर सकते हैं।” बनर्जी ने कार्यकर्ताओं से कहा, “इसे एक काले दिन के रूप में दर्ज रहने दें।” पढ़ें पूरी खबर…