अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने गुरुवार को कहा कि वह मुश्किल समय में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि जब वह अपने जीवन के एक कठिन दौर से गुजर रहे थे, तब ममता बनर्जी उनके साथ मजबूती से खड़ी रहीं थीं। टीएमसी के सांसद ने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए अब उनका कर्तव्य है कि वह भी पार्टी और उसके नेतृत्व के साथ खड़े रहें।

‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, ”मेरे मुश्किल समय में तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी मेरे साथ खड़ी रहीं। ऐसे समय में मेरा नैतिक और राजनीतिक दायित्व है कि मैं उनके साथ खड़ा रहूं।”

‘ममता बनर्जी एक जुझारू नेता हैं’

हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और पार्टी के भीतर उभरी चुनौतियों के बीच सिन्हा ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी बागी गुट का हिस्सा नहीं बनने जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ”मैं उन लोगों का आभारी हूं जिन्होंने मुझे तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया लेकिन मेरा सैद्धांतिक रुख यह है कि मुझे इस समय ममता बनर्जी के साथ खड़ा रहना चाहिए।”

टीएमसी सांसद ने यह भी कहा कि चुनावी नतीजों के आधार पर ममता बनर्जी की राजनीतिक ताकत को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ”ममता बनर्जी एक जुझारू नेता हैं। उन्हें अब भी 41 प्रतिशत मत मिले हैं जो यह दिखाता है कि राज्य में उनका जनाधार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।”

लालच के लिए नहीं बदलूंगा अपना रास्ता

शत्रुघ्न सिन्हा ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, ”कुछ लोग मजबूरी, डर या प्रलोभन के चलते ममता बनर्जी से दूर हुए होंगे लेकिन मैं अपना रास्ता नहीं बदलूंगा।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं है बल्कि सिद्धांतों और रिश्तों का भी सवाल है। उनके अनुसार, जिन लोगों ने कठिन समय में उनका साथ दिया, उनके प्रति वफादार रहना उनकी राजनीतिक और व्यक्तिगत प्रतिबद्धता का हिस्सा है।

शत्रुघ्न सिन्हा के इस बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भविष्य और पार्टी के भीतर संभावित पुनर्गठन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व में भरोसा जता रहे हैं और संगठन को मजबूत करने के पक्ष में हैं।

28 साल पहले ममता बनर्जी ने क्यों छोड़ी थी कांग्रेस?

4 मई 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के साथ ही ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक पतन की पटकथा लिखी जाने लगी। टीएमसी एक ऐसी पार्टी जिसकी स्थापना आज से 28 साल पहले हुई थी आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। यह कहानी भारतीय राजनीति के इतिहास के उस मोड़ की है जिसने पश्चिम बंगाल की राजनीति को ना सिर्फ हमेशा के लिए बदल दिया बल्कि देश को एक ऐसा राजनेता दिया जिसने भविष्य में ‘कम्युनिस्टों के अजेय गढ़’ को ढहा दिया।