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शत्रुघ्‍न ने नहीं स्‍वीकारी पीएम पद पर ममता की दावेदारी, भाषण में बचकर निकल गए

भाजपा के बागी नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने पीएम पद पर ममता की दावेदारी नहीं स्वीकारी। इस सवाल पर बचते हुए उन्होंने कहा कि यह हमारा काम नहीं है। इसका फैसला जनता करेगी।

Author Updated: January 19, 2019 6:16 PM
(Photo: ANI)

भारतीय जनता पार्टी के बागी नेता शत्रुघ्न सिन्हा शुक्रवार (18 जनवरी) को कोलकाता पहुंचे। यहां वे शनिवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ ‘ब्रिगेड परेड ग्राउंड’ में आयोजित ‘एकजुट भारत रैली’ में शामिल होने पहुंचे थे। इस मौके पर जब उन्हें ‘प्रधानमंत्री पद पर ममता बनर्जी की दावेदारी’ के बारे में पूछा गया तो वे इससे बचते दिखे। शत्रुघ्‍न ने पीएम पद पर ममता की दावेदारी को खुले तौर पर स्वीकार नहीं की। एएनआई के अनुसार, भाजपा सांसद ने कहा, “वह सही मायनो में एक राष्ट्रीय नेता हैं। वे वास्तव में अनुभवी हैं। अभी यह देखने का समय है कि जनता क्या फैसला लेती है। वायदे और प्रदर्शन में काफी अंतर है। इस अंतर को दूर करने की जरूरत है। देश की जनता यह तय करेगी कि अगला प्रधानमंत्री कौन होगा? यह हमारा काम नहीं है।”

सिन्हा को यह विश्वास है कि आने वाला चुनाव काफी रोमांचक होगा। सिन्हा ने कहा, “यह चुनाव इस बात पर नहीं होने जा रहा है कि किसके पास क्या है और क्या नहीं? यह चुनाव काम करने वाले तथा काम नहीं करने वाले और जनता की शक्ति तथा उदंड्ता के बीच होने वाला है। मैं अभी भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधि के तौर पर नहीं बोल रहा हूं, बल्कि यशवंत सिन्हा के नेतृत्व में गठित राष्ट्रीय मंच के साथ आया हूं। यह एक राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि आंदोलन है। यहां आने वाले लोग के बीच मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं हैं, बल्कि यहां नोटबंदी, जीएसटी सहित अन्य चीजें हमारे मुद्दे हैं।” वहीं, राम मंदिर के मुद्दे पर पूछे गए एक सवाल में सिन्हा ने कहा, “खामोश” और फिर चलते बने।

मंच से संबोधन के समय शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, “अटल जी के समय लोकशाही थी, वहीं, मोदी जी के समय में तानाशाही है। रातों-रात नोटबंदी का फैसला लिया गया। इसका असर ये हुआ कि अपने ही पैसों के लिए लोगों को लाइन में लगना पड़ गया। उद्योग-धंधे बंद हो गए। लोग बेरोजगार हो गए। घर की महिलाएं, जो अपने पिता व पति से बचाकर कुछ पैसे रखती थीं, ताकि वह पैसा विपरित परिस्थितियों में काम आए, उनके हाथ से निकल गए। अभी इसका असर कम भी नहीं हुआ कि जीएसटी लागू कर दिया गया। इस गब्बर सिंह टैक्स से फायदा सिर्फ चार्टर अकाउंटेंट को हुआ। व्यवसायियों को काफी परेशानी हुई। इसे क्या कहेंगे, नीम पर करेला।”

सिन्हा ने कहा, “जब आप देश की जनता से कुछ छिपाएंगे तो लोग कहेंगे ही, ‘चौकीदार ही चोर है।’ देश के बड़े बुद्धिजीवी ने कहा कि एक-एक राफेल में काफी ज्यादा नुकसान हुआ। 126 की जरूरत थी, 36 लिया गया। हवाई जहाज का दाम जहां 500 करोड़ के आसपास था, उसे करीब 1600 करोड़ में लिया गया। देश की कंपनी HAL ने सुखोई बनाया, लेकिन उसे यह काम नहीं दिया गया। वहीं, एक नये कंपनी को यह काम दे दिया। जिस कंपनी ने साइकिल का चक्का नहीं बनाया था, उसे हवाई जहाज का ठेका दे दिया गया। जनधन योजना, मुद्रा योजना, उज्जवला योजना, मेक इन इंडिया सहित सभी सिर्फ वायदे बनकर रह गए।”

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