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शशि थरूर की ब्रिटेन को खरी-खरी- अपने बच्‍चों से क्‍यों नहीं कहते कि हमारे पास जो पैसा है वह लूट से मिला है

थरुर ने कहा कि,' ब्रिटेन के लोगों को भूलने की ये ऐतिहासिक आदत है, वे अपने दागदार अतीत की जानकारी बच्चों को नहीं देते।'

केरल के तिरुअनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर। (File photo)

कांग्रेस सांसद और देश के जाने माने राजनीतिज्ञ शशि थरुर निश्चित रुप से अपने समय के एक बेहतरीन वक्ता है। हालांकि उनकी राजनीतिक विचारधारा से कई लोग इत्तेफाक नहीं रख सकते हैं लेकिन उपनिवेशवाद, राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों पर जब बहस होती है तो उनका कोई सानी नहीं है। ख़ासकर तब जब आत्मश्लाघा में डूबे ब्रिटिश समुदाय को आईना दिखाने की बात हो। शशि थरुर जिन तर्कों और समझ के साथ अपना पक्ष रखते हैं वो विरोधी को भी उनका कायल बना देता है। हाल ही में ब्रिटेन के टीवी चैनल, चैनल-4 से बातचीत के दौरान उन्होंने अपने ब्रिटिश साम्राज्य अपनी तार्किक बुद्धि का फिर से परिचय दिया। शशि थरुर ने ब्रिटेन के बुद्धिजीवियों के समक्ष सवाल खड़ा किया और पूछा कि अंग्रेज अपने बच्चों को स्कूलों में साम्राज्यवाद के इतिहास के बारे में क्यों नहीं पढ़ाते हैं।

शशि थरुर ने अपनी आने वाली किताब ‘इनग्लोरियस एम्पायर’ के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि, ‘ब्रिटेन के लोग अपनी नयी पीढ़ी को ये नहीं सिखाते हैं कि ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति और समृद्धि के लिए जिस धन-संपति की ज़रुरत हुई उसे अंग्रेजों ने अपने उपनिवेशों में लूटपाट के जरिये हासिल की।’ यहां ये बताना बहुत महत्वपूर्ण है कि भारत लगभग 200 सालों तक ब्रिटेन का उपनिवेश बना रहा। थरुर ने कहा कि,’ ब्रिटेन के लोगों को भूलने की ये ऐतिहासिक आदत है, वे अपने दागदार अतीत की जानकारी बच्चों को नहीं देते।’ उपनिवेशवाद के मुद्दे पर ब्रिटेन के लोगों को फटकार लगाते हुए उन्होंने कहा कि, ’18वीं शताब्दी की शुरुआत में ब्रिटेन दुनिया के एक सबसे अमीर देश (भारत) में पहुंचा और 200 सालों तक लूटने के बाद इसे दुनिया के सबसे गरीब देश में तब्दील कर दिया।’

जब उनसे ये पूछा गया कि, ‘क्या व्यापारिक संबंधों में भारत का के साथ क्या कोई दुराग्रह है? उन्होंने कहा कि, ‘अब हालात बदल चुके हैं, और अब दो संप्रभु देशों के बीच व्यापारिक संबंध हो रहे हैं, उन्होंने ये भी जोड़ा कि अब भारत की अर्थव्यवस्था ब्रिटेन के बराबर है।’

हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें इतिहास का ज्ञान होना चाहिए। बकौल शशि थरुर, ‘यदि हमें ये पता नहीं है कि हमारा उदगम कहां से हुआ है, तो आप जिस ओर जा रहे हैं, उसके बारे में तय कैसे करेंगे।’ शशि थरुर इससे पहले ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में एक विस्तृत व्याख्यान दे चुके हैं कि आखिर क्यों नहीं भारत की आर्थिक बर्बादी के लिए अंग्रेजों को क्षतिपूर्ति देनी चाहिए।

 

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