Mahua Moitra Security Controversy: पश्चिम बंगाल की सत्ता से बाहर होने के बाद तृणमूल कांग्रेस के नेता लगातार चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इसमें से एक नाम सांसद महुआ मोइत्रा का भी है। हाल ही में महुआ मोइत्रा ने नादिया जिला प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए कि शुक्रवार देर रात उन्हें सर्किट हाउस स्थित उनके कमरे से जबरन बेदखल करने की कोशिश की।

इसको लेकर जारी सियासत के बीच कांग्रेस घटना के बाद पश्चिम बंगाल में सियासी पारा चढ़ गया है और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर भी खुलकर महुआ मोइत्रा के समर्थन में सामने आ गए हैं।

दरअसल, यह पूरा विवाद 15 अगस्त की रात का है, जब महुआ मोइत्रा संसद सत्र के बाद कृष्णानगर स्थित सर्किट हाउस में रात्रि प्रवास के लिए रुकी थीं। महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि एक मौजूदा सांसद होने के नाते उन्हें वहां ठहरने का पूरा अधिकार था। हालांकि, जिला अधिकारियों द्वारा उन्हें आधी रात को ही कमरा खाली करने और वहां से निकलने के लिए दबाव बनाया जा रहा था, जिसका उद्देश्य केवल उन्हें परेशान करना था।

बाहर मेरे खून के प्यासे लोग बैठे हैं – महुआ मोइत्रा

घटना के तुरंत बाद 15 अगस्त की आधी रात को महुआ मोइत्रा ने सांसदों के वैश्विक संगठन अंतर-संसदीय संघ (IPU) को टैग करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा, “प्रिय IPU संसद, मैं भारत में एक मौजूदा महिला सांसद हूं। सरकार ने मुझे रात 9:47 बजे और फिर 10:52 बजे सरकारी गेस्ट हाउस में अपना कमरा खाली करने के लिए कहा, जबकि बाहर बीजेपी के समर्थक मेरे खून के प्यासे बैठे हैं।”

अगले दिन शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर टीएमसी सांसद ने भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा, “यह भारत में लोकतंत्र की स्थिति है।” मोइत्रा का आरोप है कि जब उन्होंने कमरा छोड़ने से इनकार कर दिया, तो सर्किट हाउस के बाहर भारी भीड़ इकट्ठा हो गई और ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने लगी, जिससे उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ गई।

समर्थन में उतरे शशि थरूर

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने महुआ मोइत्रा की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र और राज्य प्रशासन से सुरक्षा देने की अपील की। थरूर ने सोशल मीडिया पर लिखा, जब भीड़ उसके खिलाफ उग्र हो रही है, तो टीएमसी सांसद को सरकारी आवास खाली करने के लिए कहने के बजाय सरकार को उन्हें तुरंत सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए।”

थरूर ने देश के सभी लोकतंत्रवादियों से महुआ मोइत्रा के साथ एकजुटता दिखाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में इस तरह के बुनियादी मुद्दों पर चर्चा नहीं होनी चाहिए, खासकर उस दिन जब हमारे स्वतंत्रता संग्राम की परिणति हुई थी।” थरूर ने अपने इस कड़े संदेश का अंत ‘#StandWithMahua’ हैशटैग के साथ किया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र

मामले की गंभीरता को देखते हुए महुआ मोइत्रा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि नादिया जिला प्रशासन ने उन्हें उस सर्किट हाउस से जबरन निकालने की कोशिश की, जिसमें एक कमरा शुरुआत में आधिकारिक तौर पर उन्हें ही आवंटित किया गया था। उन्होंने अध्यक्ष से महिला सांसदों के सम्मान और गरिमा की रक्षा करने की गुहार लगाई है।

अपने पत्र में कृष्णानगर से टीएमसी सांसद ने लिखा, “मैं आपसे विनम्र निवेदन करती हूं कि आप इस मामले पर तत्काल ध्यान दें और एक उदाहरण स्थापित करने तथा देश भर में महिला सांसदों की गरिमा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।” इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के मानसिक उत्पीड़न और प्रशासनिक मनमानी के खिलाफ वह जल्द ही अदालत का रुख करेंगी।

मोइत्रा ने बयां की पूरी क्रोनोलॉजी

महुआ मोइत्रा ने सर्किट हाउस में अपने प्रवास का पूरा विवरण साझा करते हुए बताया कि वे प्रक्रिया के तहत ही वहां रुकी थीं। उन्होंने कहा, “मैं शाम लगभग 6.15 बजे सर्किट हाउस के कमरे में गई। कर्मचारियों ने मुझे मेरे सामान्य कमरे में पहुंचाया, जो साफ-सुथरा और तैयार था। शाम 7 बजे मेरे कमरे में चाय परोसी गई और रात 9.20 बजे कमरे में ही भोजन परोसा गया।”

उन्होंने सवाल उठाया कि जब सब कुछ औपचारिक और व्यवस्था के तहत चल रहा था, तो अचानक रात 9:45 बजे के बाद प्रशासन ने किस दबाव में आकर उन्हें आधी रात को बाहर निकालने का फरमान सुना दिया। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक गलियारों और राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है।

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