राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (SCP) के अध्यक्ष शरद पवार ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि वे पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सर्वदलीय बैठक बुलाएं। साथ ही इस गंभीर विषय पर वो अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों से सलाह लें ताकि संघर्ष का भारत पर क्या असर पड़ेगा, इसकी समीक्षा हो पाए।
शरद पवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया घोषणाओं पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच प्रधानमंत्री द्वारा किए गए ऐलान देश की अर्थव्यवस्था पर दूरगामी असर डाल सकते हैं। इससे आम लोगों, उद्योग जगत और निवेशकों के बीच असहजता का माहौल बना है।
अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है व्यापक प्रभाव
शरद पवार ने कहा, “पश्चिम एशिया में अस्थिर और युद्ध जैसे हालात के बीच प्रधानमंत्री ने दो दिन पहले कुछ घोषणाएं कीं। इनका देश की अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इन अचानक हुए ऐलानों से आम नागरिकों, उद्योग-व्यापार क्षेत्र और निवेशकों में चिंता का माहौल पैदा हुआ है। यह स्थिति निश्चित रूप से गंभीर है।”
एनसीपी प्रमुख ने प्रधानमंत्री से सभी दलों के नेताओं को विश्वास में लेने की अपील की। उन्होंने कहा, “इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री को अपनी अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। राष्ट्रीय हित से जुड़े मामलों में सभी दलों के नेताओं को डिसिजन मेकिंग में शामिल करना देशहित के लिए बेहद जरूरी है।”
नीतियों पर व्यापक चर्चा जरूरी
पवार ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार को अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों से तुरंत सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने कहा, “मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में केंद्र सरकार को अधिक संवेदनशीलता और व्यापक चर्चा को प्राथमिकता देनी चाहिए। प्रधानमंत्री को देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और संबंधित विशेषज्ञों की बैठक बुलाकर स्थिति की विस्तृत समीक्षा करनी चाहिए। भविष्य की नीतियों पर व्यापक चर्चा जरूरी है।”
उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा हालात में लोगों के बीच भरोसा और स्थिरता बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। गौरतलब है कि शरद पवार की यह टिप्पणी उस वक्त आई है जब प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को सिकंदराबाद में लोगों से कई अपीलें की थीं। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से जहां संभव हो “वर्क फ्रॉम होम” अपनाने, ईंधन की खपत कम करने, एक साल तक विदेश यात्रा टालने, स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने, खाने के तेल की खपत घटाने, प्राकृतिक खेती अपनाने और सोने की खरीद सीमित करने की अपील की थी।
आयात पर निर्भरता कम करने की अपील
प्रधानमंत्री ने आयात पर निर्भरता कम करने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा था कि हर परिवार को खाने के तेल की खपत घटानी चाहिए और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना चाहिए। ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो और पर्यावरण की रक्षा भी हो सके। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के आयात पर होने वाले भारी खर्च का जिक्र करते हुए किसानों से इनके इस्तेमाल को कम करने की अपील की।
ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने लोगों से मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने, कार पूलिंग अपनाने, माल ढुलाई में रेलवे को प्राथमिकता देने और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ाने का आग्रह किया। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलमार्ग की नाकेबंदी के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। यह समुद्री मार्ग खाड़ी क्षेत्र के तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न वैश्विक व्यवधानों को देखते हुए दूसरे दिन फिर खर्च में कटौती की अपील दोहराई और कोविड-काल की आदतें अपनाने को कहा। वडोदरा में सोमवार को देर रात एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने लोगों से ईंधन की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन एवं इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक उपयोग करने और सोने की खरीद कुछ समय के लिए टालने की अपील की। इससे पहले गिर सोमनाथ में आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव के दौरान उन्होंने 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण की याद दिलाते हुए कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत भारत को झुका नहीं सकती या दबाव में नहीं ला सकती है। पूरी खबर पढ़ें…
