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केदारनाथ में आई आपदा के लिए तीर्थयात्रियों की भोग विलासिता दोषी : शंकराचार्य

शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि जो लोग उत्तराखंड में आकर तीर्थयात्रा के नाम पर भोग-विलास करते हैं, शराब पीते हैं वे सब नर्क में जाएंगे

Author हरिद्वार | April 13, 2016 11:10 PM
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती (एक्सप्रेस आर्काइव)

ज्योतिष पीठ व द्वारिका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने अब केदारनाथ में आई आपदा के लिए उन तीर्थयात्रियों के सिर पर ठीकरा फोड़ दिया है, जो उत्तराखंड में तीर्थयात्रा के नाम पर आकर होटलों में शराब पीते हैं और भोग-विलासिता करते हैं। शंकराचार्य बुधवार को बैसाखी और अर्द्धकुंभ मेला स्नान के अवसर पर आयोजित पत्रकार वार्ता में बोल रहे थे। इससे एक दिन पहले शंकराचार्य ने महाराष्ट्र में सूखे का कारण शिरडी के सांई बाबा के भक्तों द्वारा सांई बाबा की पूजा करना बताया था, जिससे पूरे देश में शंकराचार्य के बयान को लेकर विवाद छिड़ गया था। अब शंकराचार्य ने केदारनाथ में आई आपदा के बारे में बयान देकर नया विवाद छेड़ दिया है।

शंकराचार्य ने कहा कि केदारनाथ और उत्तराखंड में आई आपदा का कारण एक तो गंगा में लगातार बनाए जा रहे बांध हैं। दूसरा कारण अलकनंदा नदी में बांध बनाकर धारी देवी के मंदिर को डुबोना है। और तीसरा कारण उत्तराखंड में गंगा के किनारे-किनारे बने होटलों में ठहरने वाले यात्रियों द्वारा भोग-विलास करना और शराब पीना है। जो लोग उत्तराखंड में आकर तीर्थयात्रा के नाम पर भोग-विलास करते हैं, शराब पीते हैं वे सब नर्क में जाएंगे और तीर्थस्थानों पर भोग-विलासिता और शराब तीर्थयात्रियों ने पी तो गंगा नाराज हो गई। इसी कारण उत्तराखंड में आपदा आई। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पहले श्रद्धालु तीर्थयात्रा की भावना से आते थे। तीर्थयात्रा के लिए मन की पवित्रता, वाणी में संयम होना चाहिए, तभी तीर्थयात्रा का फल मिलता है। साथ ही उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में तीर्थयात्रा की परंपरा आदि जगद्गुरुशंकराचार्य ने शुरू की थी, इसलिए देहरादून में जौलीग्रांट हवाई अड्डे का नाम आदि जगद्गुरु शंकराचार्य के नाम पर रखा जाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि मोदी के दो साल के शासनकाल में न तो भ्रष्टाचार पर कोई कार्रवाई हुई और न ही विदेशों से काला धन वापस लाने के लिए कोई कार्रवाई की गई।

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संपादकीय : भय बनाम आस्था

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