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जब देश का मुखिया अधर्म आचरण करता हो, तब अकाल-सूखे जैसी आपदाएं आती हैं : स्वरूपानंद

शंकराचार्य ने कहा, ‘हर मुखिया (देश या राज्य) का व्यवहार धर्म के आचरण के अनुपालन में होना चाहिये, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हुआ हो।’

Author हरिद्वार | April 14, 2016 12:12 PM
द्वारिका-शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती (फाइल एएनआई फोटो)

शारदापीठ व बद्रिकापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने बुधवार (13 अप्रैल) को कहा कि जब भी देश या राज्य का मुखिया धर्म या सदाचार की राह से भटकता है तो सूखा जैसी आपदाये आना अवश्यंभावी है। कनखल स्थित शंकराचार्य पीठ परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्वरूपानंद ने कहा कि राजसत्ता सदैव ही धर्मसत्ता से निर्देशित होती आयी है और धर्म और सदाचार के आचरण से विमुख होते ही सूखा, अकाल तथा अन्य आपदाये आती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब अकाल, सूखा तथा अन्य आपदाएं आती हैं और यह स्थिति तब आती है जब देश का मुखिया अधर्म आचरण करता हो।’’

शंकराचार्य ने कहा कि सभी चीजों को व्यवस्थित रखने के लिये मुखिया को धर्म के हिसाब से उचित आचरण करना चाहिये। हालांकि, इस संबंध में उन्होने किसी राजनेता का नाम नहीं लिया लेकिन कहा कि शासन करने वाले सभी लोगों को इस स्वर्णिम नियम का पालन करना चाहिये। शंकराचार्य ने कहा, ‘हर मुखिया (देश या राज्य) का व्यवहार धर्म के आचरण के अनुपालन में होना चाहिये, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हुआ हो।’

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में देश की राजनीति दिशाहीन हो गयी है और लोककल्याण के कार्य नहीं हो रहे हैं।

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संपादकीय : भय बनाम आस्था

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