Punjab News: पंजाब कांग्रेस में हफ्तों से चल रही आंतरिक कलह के बाद पार्टी के हाई कमान ने शनिवार को भूपेश बघेल को एआईसीसी के राज्य प्रभारी पद से हटाकर सचिन पायलट को नियुक्त किया। पार्टी सूत्रों का दावा है कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री बघेल की राज्य इकाई में साख उन आरोपों से धूमिल हो गई है कि वे राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का पक्ष ले रहे हैं।

उनका पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के साथ विवाद चल रहा है। चन्नी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले वड़िंग को हटाकर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनना चाहते हैं और उन्होंने बघेल द्वारा सुलह कराने के प्रयासों को ठुकरा दिया है।

सचिन पायलट जैसे निष्पक्ष व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपी गई – कांग्रेस सांसद

पंजाब के एक वरिष्ठ कांग्रेस सांसद ने कहा, “राज्य इकाई इस बदलाव से खुश होगी क्योंकि अब सचिन पायलट जैसे निष्पक्ष व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे नए सिरे से काम शुरू कर सकते हैं और सभी पक्षों की बात सुन सकते हैं।”

बघेल को एआईसीसी का असम प्रभारी नियुक्त किया गया है। उन्होंने इस नई जिम्मेदारी के लिए शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “सभी नवनियुक्त महासचिवों/राज्य प्रभारियों को भी बधाई। पंजाब के सभी कांग्रेस कार्यकर्ता साथियों और नेताओं को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद।”

चन्नी ने फेरबदल के लिए हाई कमान को धन्यवाद देते हुए कहा, “पंजाब कांग्रेस के प्रभारी महासचिव के रूप में श्री सचिन पायलट जी की नियुक्ति पर हार्दिक स्वागत है। इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए कांग्रेस पार्टी हाई कमान को दिल से धन्यवाद।”

इस बदलाव का स्वागत करते हुए वड़िंग ने बघेल की तारीफ की और उन्हें अपना मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि बघेल के मार्गदर्शन ने जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, “व्यक्तिगत रूप से मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है और मैं उनका सदा ऋणी रहूंगा।” वड़िंग ने कहा कि पायलट की ऊर्जा और गतिशीलता चुनावों से पहले पार्टी की शक्ति को और बढ़ाएगी।

प्रताप बाजवा ने पायलट की नियुक्ति का स्वागत किया

पंजाब में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री पायलट की नियुक्ति का स्वागत किया। बाजवा ने फेसबुक पर लिखा, “पंजाब कांग्रेस के प्रभारी महासचिव श्री सचिन पायलट का हार्दिक स्वागत है। संगठन को मजबूत करने और पंजाब में कांग्रेस को आगे ले जाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने की उम्मीद है।”

चन्नी के करीबी एक नेता ने बघेल की पक्षपातपूर्ण भूमिका को उनके सत्ता से बेदखल होने का कारण बताया। उन्होंने कहा, “यह हमारे लिए बड़ी राहत की बात है। वे जनता और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की नब्ज समझने में नाकाम रहे। हमने उन्हें बार-बार कहा कि बदलाव जरूरी है, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी। अब हमें पूरा यकीन है कि आने वाले दिनों में वड़िंग को हटा दिया जाएगा और कांग्रेस आखिरकार आगामी विधानसभा चुनावों पर ध्यान केंद्रित कर सकेगी।”

गुरदासपुर के सांसद और राजस्थान के प्रभारी एआईसीसी नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी पायलट को बधाई देते हुए कहा, “उनका अनुभव, नेतृत्व और जनता से जुड़ाव पंजाब में कांग्रेस संगठन को नई ताकत और गति प्रदान करेगा। उनके सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं।”

बघेल ने किस प्रकार कंट्रोल खो दिया होगा?

चन्नी और वडिंग गुट पिछले कई महीनों से सत्ता संघर्ष में उलझे हुए हैं। इसमें चन्नी गुट मौजूदा राज्य कांग्रेस अध्यक्ष के कामकाज के तरीके से नाखुश होकर उन्हें पद से हटाने की कोशिश कर रहा है। बघेल को आंतरिक कलह को समाप्त करने के लिए तैनात किया गया था। उन्होंने चंडीगढ़ में बैठकें कीं और वारिंग के साथ कई जिलों का दौरा किया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से विवाद को मतभेद बताया और चेतावनी दी कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने लगभग 92 नेताओं से परामर्श के आधार पर 15 जुलाई को कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल को एक रिपोर्ट सौंपी। उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था में तत्काल बदलाव की कोई आवश्यकता नहीं है, यह तर्क देते हुए कि ऐसे निर्णय गुड्डा-गुड्डी का खेल नहीं हैं। इसके बाद हाई कमान ने व्यवस्था में तत्काल कोई बदलाव नहीं किया, जिससे चन्नी गुट छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री से नाराज हो गया।

इससे आंतरिक कलह का अंत नहीं हुआ। चन्नी के सहयोगी नेताओं ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री से मिलने से इनकार कर दिया और जुलाई के अंत में राज्य की उनकी दूसरी यात्रा के दौरान बघेल वापस जाओ के नारे लगाए गए। पिछले महीने, पार्टी कार्यकर्ताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक से पहले श्री मुक्तसर साहिब शहर में वड़िंग और बघेल को निशाना बनाते हुए पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए।

कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के एक सूत्र ने कहा, “बघेल अपने खिलाफ चल रही उस धारणा को संभाल नहीं पाए कि वह वारिंग का साथ दे रहे थे। और यही उनके निष्कासन का मुख्य कारण हो सकता है। प्रभारी एआईसीसी को तटस्थ रहना होगा और यही सबसे महत्वपूर्ण है।”

हालांकि, पार्टी के एक वर्ग ने दावा किया कि यह बदलाव नियमित फेरबदल का हिस्सा था, न कि राज्य इकाई में किसी असंतोष को दूर करने का प्रयास। दिल्ली में एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, “इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए, राज्य चुनावों से पहले ऐसी चीजें होती रहती हैं। राज्य इकाई में गुटबाजी इसलिए भी है क्योंकि यह परंपरा रही है कि जो भी राज्य प्रमुख होता है, चुनाव के बाद वही मुख्यमंत्री बनता है। अब, अगर दो वरिष्ठ नेता इस पद पर नजर रखे हुए हैं, तो उनके और उनके समर्थकों के बीच कुछ प्रतिस्पर्धा होना स्वाभाविक है।”

सुरजेवाला को गुजरात का प्रभारी बनाया

कांग्रेस ने फेरबदल के तहत कई अन्य नियुक्तियों की भी घोषणा की। रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात का प्रभारी एआईसीसी महासचिव नियुक्त किया गया है, जहां 2027 के अंत में चुनाव होने हैं। पार्टी ने बताया कि वे कर्नाटक के प्रभारी का पद भी संभालते रहेंगे।

झारखंड के लोहरदगा से कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने एआईसीसी के छत्तीसगढ़ प्रभारी के रूप में पायलट का स्थान लिया है, जबकि डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद को केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला के स्थान पर महाराष्ट्र प्रभारी नियुक्त किया गया है। कर्नाटक के एमएलसी पीवी मोहन आंध्र प्रदेश में पार्टी के मामलों की देखरेख करेंगे, उन्होंने मणिकम टैगोर का स्थान लिया है जो वर्तमान में तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष हैं।

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पंजाब में फरवरी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की राजनीतिक पार्टियों की सोशल मीडिया पर तू-तू मैं-मैं बेहद नीचे गिरती दिख रही है। हाल ही में एक एआई वीडियो शेयर किया गया, जिसमें पगड़ी पहने एक सिख नेता को महिलाओं के ऑफ शोल्डर कपड़ों में दिखाया गया। इसके अलावा, एक वीडियो में क्लासरूम में मुख्यमंत्री को थप्पड़ मारने जैसी हरकतें भी दिखाई दीं। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…