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शाहीन बाग की महिलाओं ने रखा मौन व्रत

शाहीन बाग में दो महीने से बड़ी संख्या में महिलाएं नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ धरने पर बैठी हैं। महिलाओं से मंगलवार को जब बात करने की कोशिश की गई तो इशारों में उन्होंने कहा कि वे आज बात नहीं कर सकतीं। साथ ही वहां मौजूद वॉलिंटियर भी महिलाओं से बात करने रोक रहे थे।

Author Updated: February 12, 2020 12:59 AM
शाहीन बाग में दो महीने से बड़ी संख्या में महिलाएं नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ धरने पर बैठी हैं।

निर्भय कुमार पांडेय

आम आदमी पार्टी को दिल्ली विधानसभा में मिली जबरदस्त जीत से शाहीन बाग का धरनास्थल बेखबर रहा। यहां मंगलवार को सुबह से ही महिलाएं मौन व्रत पर रहीं। उनके सहयोग के लिए कुछ युवा, कॉलेज के छात्र-छात्राएं और पुरुष भी मुंह पर काली पट्टी बांध कर मौन व्रत पर थे। भले ही धरनास्थल पर मौजूद लोगों का कहना था कि यह निर्णय एक दिन पूर्व जामिया और तुगलकाबाद में पुलिस के लाठी चार्ज के विरोध में था। पर माना जा रहा है कि रणनीति के तहत यह निर्णय लिया गया था।

विधानसभा चुनाव पूर्व शाहीन बाग को भाजपा ने चुनावी मुद्दा बनाया था और धरने पर बैठी महिलाओं के लिए कई प्रकार की अफवाहें फैलाई गईं थीं। धरने पर बैठी महिलाओं ने चुनाव परिणाम के दिन चुप्पी साध कर यह संदेश देना चाहा कि उनका विरोध सही मायने में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) के खिलाफ हैं और धरना तब तक चलता रहेगा, जब तक उनकी मांग नहीं मान ली जातीं।

शाहीन बाग में दो महीने से बड़ी संख्या में महिलाएं नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ धरने पर बैठी हैं। महिलाओं से मंगलवार को जब बात करने की कोशिश की गई तो इशारों में उन्होंने कहा कि वे आज बात नहीं कर सकतीं। साथ ही वहां मौजूद वॉलिंटियर भी महिलाओं से बात करने रोक रहे थे। वहीं, धरने में आ रहीं महिलाओं ने कहा कि शाहीन बाग का धरना दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मुद्दा नहीं था। वह दो महीने से हाल में संशोधित किए गए काले नागरिकता कानून के खिलाफ हैं और यह धरना तब तक जारी रहेगा, जब तक उन्हें सरकार की ओर से लिखित में आश्वासन नहीं मिल जाता। इसके साथ ही धरनास्थल पर इंडिया गेट का एक ढांचा बनाया गया है। यहां मौजूद लोगों ने कहा कि यह धरना तभी खत्म होगा, जब सरकार उनकी मांगे मान लेगी।

किसी पार्टी से संबंध नहीं
वहीं, धरने में शामिल शहनवाज खान ने बताया कि मौन व्रत रखकर यह संदेश देना चाहते हैं कि हम किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं है। जो लोग धरने को राजनीतिक चश्मे से देख रहे थे, दिल्ली की जनता ने उन्हें सबक सिखा दिया है। उनका आरोप था कि सोमवार को एक बार फिर से दिल्ली पुलिस ने निहत्थे जामिया के विद्यार्थियों और तुगलकाबाद में लोगों पर लाठी चार्ज किया था। इस घटना को कहीं से जायज नहीं ठहराया जा सकता। यही कारण है कि धरनास्थल पर एक दिन का मौन व्रत रखा गया है।

धरनास्थल पर नहीं गहमा-गहमी
शाहीन बाग में धरनास्थल पर अन्य दिनों की तुलना में कोई गहमा-गहमी नहीं थी। अन्य दिनों में जहां लोगों को स्टेज से संबोधित किया जाता था। वहीं, मंगलवार को सभी लोगों ने मुंह पर काली पट्टी बांध रखी थी और इस बात से पूरी तरह से बेखबर थे कि दिल्ली के चुनाव परिणाम किसके पक्ष में आए हैं। इसके साथ ही वहां मौजूद वॉलिंटियर भी लोगों से अपील कर रहे थे कि यदि चुनाव परिणाम की बात करनी है तो अपने घर जाकर बातें करे या फिर धरनास्थल से दूर जाकर इस मुद्दे पर चर्चा करें।

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