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मथुरा की जेल में 23 साल पहले भी हुई थी महिला को फांसी देने की तैयारी, अब शबनम के लिए तैयार हुआ ‘फंदा’

23 साल पहले 1998 में भी एक महिला को फांसी की सजा सुनाई गई थी लेकिन राष्ट्रपति ने दया याचिका स्वीकार कर ली थी और उसकी सजा उम्रकैद में तब्दील हो गई थी। अब एक बार फिर से मथुरा की जेल में फांसी की तैयारियां की जा रही हैं।

shabnam caseसहेली के गले पर हाथ रखकर खड़ी आरोपी शबनम और उसका प्रेमी सलीम (इंडियन एक्सप्रेस फाइल फोटो)

आजादी के बाद पहली बार किसी महिला की फांसी होने जा रही है। हालांकि अभी शबनम का डेथ वॉरंट जारी नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि शबनम की फांसी की फरमान कभी भी आ सकता है। बता दें कि मथुरा में ही महिला का फांसीघर है। यहां तैयारियां जारी हैं। अभी तक इस फांसी को लेकर संशय बना हुआ है। मथुरा जेल में सरगर्मियां तेज हैं।

मथुरा जेल में 1870 में इस फांसीघर को बनाया गया था। अंग्रेजों ने इस फांसीघर को बनाया था। मथुरा के फांसीघर में दशकों से कोई फांसी नहीं हुई है इसलिए इसकी हालत खराब हो गई है। 23 साल पहले मथुरा की जेल में अप्रैल 1998 में एक महिला को फांसी की सजा दी गई थी लेकिन बाद में राष्ट्रपति ने उसकी दया याचिका स्वीकर कर ली और उसकी सजा उम्रकैद में तब्दील कर दी थी। तब से आज तक किसी महिला को फांसी की सजा नहीं सुनाई गई है।

कैसे हो रही फांसी की तैयारी?

मथुरा प्रशासन फांसीघर की कमियों को दूर करने में लगा है। पवन जल्लाद फांसीघर का जायजा लेने गए थे और कमियों के बारे में प्रशासन को सूचित कर चुके हैं। जिसे फांसी होती है उसके लिए भी जेल में कुछ नियम होते हैं। जिसे फांसी दी जानी होती है उसे पहले सुरक्षा में तन्हाई में रखा जाता है। इस जगह से फांसीघर की दूरी लगभग 200 मीटर है। शबनम की फांसी की तारीख नहीं तय है लेकिन तैयारियों जोरों पर हैं।

क्या है अपराध?

शबनम के परिवार के लोग भी कह रहे हैं कि उसका अपराध माफ करने योग्य नहीं है। दरअसल 13 साल पहले 14 अप्रैल 2008 को अमरोहा के बावनखेड़ी में शबनम ने अपने परिवार के 7 लोगों की हत्या कर दी थी। शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने ही परिवार के खाने में जहर मिला दिया था। आधी रात शबनम ने कुल्हाड़ी गला काटकर अपने माता पिता, भाई, भाभी और बुआ की लड़की की हत्या कर दी थी।

उसने अपने 11 महीने के भतीजे को भी मार दिया था। हत्या के बाद शबनम पुलिस को भी गुमराह कर रही थी। शबनम के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सहायता राशि की भी घोषणा कर दी थी। बाद में शबनम ने अपना गुनाह कबूल कर लिया।

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