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SGPC ने पास किया आरएसएस के खिलाफ प्रस्ताव, मोदी सरकार से मांग- संघ के एजेंडे पर नहीं करें काम

बता दें कि यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है, जब केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन जारी हैं। इनमें मुख्य तौर पर पंजाब के किसान हिस्सा ले रहे हैं, जो कि अधिकतर सिख धर्म से हैं।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र अमृतसर | Updated: April 2, 2021 2:31 PM
SGPC, RSS, Bibi Jagir Kaurइन प्रस्तावों को SGPC अध्यक्ष बीबी जागीर कौर और अन्य सदस्यों ने पारित किया। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

सिख धर्म की सबसे बड़ी समितियों में से एक शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर विरोध जताया है। एसजीपीसी ने अपनी बैठक में आरएसएस की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि संघ दूसरे धर्मों की आजादी छीनकर हिंदू राष्ट्र बनाने की कोशिश में जुटा है। कमेटी ने प्रस्ताव में केंद्र सरकार से कहा है कि वह सभी धर्मों के अधिकारों और आजादी की रक्षा के लिए काम करे, न कि आरएसएस की कोशिशों को लागू करने में जुट जाए।

एसजीपीसी ने इस प्रस्ताव के जरिए कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी तत्व अल्पसंख्यकों को दबाने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें सजा दी जानी चाहिए। प्रस्ताव में कहा गया कि भारत एक बहुधर्मीय, बहुभाषीय, बहुजातीय देश है। यहां हर धर्म का देश की स्वतंत्रता में अहम योगदान है। खासकर सिख समुदाय का, जिसने 80 फीसदी से ज्यादा बलिदान दिए हैं।

गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने आगे कहा, “दुखद है कि अब लंबे समय से दूसरे धर्मों की धार्मिक स्वतंत्रता को दबाया जा रहा है, ताकि देश को हिंदू राष्ट्र बनाया जा सके। अल्पसंख्यकों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दखल के जरिए निशाना बनाया जा रहा है।

एसजीपीसी ने आरएसएस पर अल्पसंख्यक समुदायों को उनके मामलों में हस्तक्षेप करने की धमकी देने का आरोप लगाया। कहा कि 17वीं शताब्दी में मुगलों ने भी इस तरह के प्रयास किए थे, जिनका सिख गुरुओं ने जोरदार विरोध किया था। नौवें सिख गुरु गुरु तेग बहादुर ने अन्य समुदायों की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।

बैठक में एसजीपीसी अध्यक्ष बीबी जागीर कौर और अकाल तख्त जत्थेदार भी उपस्थित थे। इस दौरान कुछ और अहम प्रस्ताव भी पास कराए गए। बता दें कि यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है, जब केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन जारी हैं। इनमें मुख्य तौर पर पंजाब के किसान हिस्सा ले रहे हैं, जो कि अधिकतर सिख धर्म से हैं। इसके अलावा हाल ही में सिखों के एक समूह को ननकाना साहिब के कार्यक्रम के लिए पाकिस्तान जाने से भी रोक दिया गया था। इसे लेकर सिखों में नाराजगी है।

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