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नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध अपराध: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग की नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने को बुधवार को अपराध करार दिया।
Author नई दिल्ली | October 12, 2017 01:36 am
दुष्कर्म की प्रतीकात्मक तस्वीर।

सुप्रीम कोर्ट ने 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग की नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने को बुधवार को अपराध करार दिया। इसके साथ ही उसने कहा कि बलात्कार कानून मनमाना है और यह संविधान का उल्लंघन है। बलात्कार के अपराध को परिभाषित करने वाली भारतीय दंड संहिता की धारा 375 में एक अपवाद धारा है। जो कहती है कि यदि पत्नी की आयु 15 वर्ष से कम नहीं है तो उसके साथ पति द्वारा यौन संबंध बनाया जाना बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता। जबकि अपनी सहमति देने की उम्र 18 वर्ष तय है। शीर्ष अदालत ने कहा कि बलात्कार संबंधी कानून में 375 का यह अपवाद अन्य अधिनियमों के सिद्धांतों के प्रति विरोधाभासी है और यह बालिका के अपने शरीर पर उसके खुद के संपूर्ण अधिकार और स्व निर्णय के अधिकार का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता के पीठ ने देश में बाल विवाह की परंपराओं पर भी चिंता जताई। पीठ ने कहा कि संसद द्वारा सामाजिक न्याय का कानून जिस भावना से बनाया गया, उसे उसी रूप में लागू नहीं किया गया।

पीठ ने स्पष्ट किया कि वह वैवाहिक बलात्कार के मुद्दे का निपटारा नहीं कर रही है, क्योंकि संबंधित पक्षों में से किसी ने यह मामला उसके समक्ष नहीं उठाया है। अलग और समवर्ती फैसला लिखने वाले न्यायमूर्ति गुप्ता ने कहा कि सभी कानूनों में विवाह की आयु 18 वर्ष है और भारतीय दंड संहिता के तहत बलात्कार संबंधी कानून में दी गई छूट या अपवाद एकपक्षीय, मनमाना है और बालिका के अधिकारों का उल्लंघन करता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह बाकी पेज 8 परअपवाद संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन है। अदालत ने केंद्र और राज्यों की सरकारों से कहा कि बाल विवाह रोकने की दिशा में वह सक्रिय कदम उठाएं। पीठ ने अक्षय तृतीया के अवसर पर हजारों की संख्या में होने वाले बाल विवाह पर भी सवाल उठाया।

 

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