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दुनिया के सबसे ऊंचे शिखर पर छठी बार धरा कदम

जज्बे के बूते उत्तराखंड के लवराज सिंह धर्मशक्तू ने सबसे ऊंचे पर्वत शिखर एवरेस्ट पर एक बार नहीं छह बार तिरंगा फहराकर एक नया इतिहास ही रच डाला।

Author देहरादून | May 31, 2017 4:20 AM
Mount Everest Height, Mount Everest News, Mount Everest latest news, Nepal Mount Everest, Mount Everest hindi news, Survey of India Mount Everestमाउंट एवरेस्ट या माउंट कोमोलांगमा (एवरेस्ट का तिब्बती नाम)। (AP Photo/Tashi Sherpa)

सुनील दत्त पांडेय

किसी में जज्बा हो तो वह बड़े से बड़े लक्ष्य को भी आसानी से हासिल कर लेता है। जज्बे के बूते उत्तराखंड के लवराज सिंह धर्मशक्तू ने सबसे ऊंचे पर्वत शिखर एवरेस्ट पर एक बार नहीं छह बार तिरंगा फहराकर एक नया इतिहास ही रच डाला। ऐसा करने वाले लवराज देश के एकमात्र पर्वतारोही बन गए हैं।
लवराज की इस सफलता से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अधिकारी और जवान भी गर्व महसूस कर रहे हैं। लवराज बीएसएफ में सहायक सेनानायक के पद पर देहरादून के डोईवाला में तैनात हैं। शनिवार 27 मई की सुबह लवराज के लिए एक नया सवेरा लेकर आई। आठ घंटे की खड़ी चढ़ाई के बाद शनिवार की सुबह छह बजकर दस मिनट पर लवराज ने एवरेस्ट की चोटी पर छठीं बार अपने पग रखे और तिरंगा फहरा दिया।

जब लवराज की सफलता की सूचना उनकी पत्नी रीना कौशल को मिली तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पडेÞ। लवराज की पत्नी रीना भी देश की जानी-मानी पर्वतारोही हैं। लवराज की पत्नी रीना कौशल साउथ पोल तक पहुंचने पहली भारतीय महिला हैं। सन् 2000 में लेह में उनकी पहली मुलाकात लवराज से हुई और इसके चार साल बाद शादी हो गई। रीना और लवराज का पांच साल का बेटा ओजस है। दोनों उसे एक कुशल पर्वतारोही बनाना चाहते हैं।
13 अप्रैल को शुरू की थी चढ़ाईअपनी ऐतिहासिक सफलता की कहानी लवराज ने इस साल 27 मार्च को लिखनी शुरू की। जब नई दिल्ली में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने भारतीय पर्वतारोहण संस्थान और तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) के संयुक्त पर्वतारोही दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस दल के बाकी सदस्यों को क्या मालूम था कि उनके दल के एक वरिष्ठ सदस्य एवरेस्ट के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेंगे। इस साल की 13 अप्रैल को इस संयुक्त पर्वतारोही अभियान दल ने एवरेस्ट की चढ़ाई शुरू की थी। ठीक 44 दिन बाद शुक्रवार 26 मई की रात साढेÞ दस बजे लवराज के नेतृत्व में दल के अन्य सदस्यों योगेन्द्र गर्ब्याल, राहुल जरगल, एन जागोई ने एवरेस्ट की अंतिम और ऐतिहासिक चढ़ाई शुरू की थी। लवराज ने अपने साथी योगेन्द्र के साथ एवरेस्ट पर कदम रखा। उसके बाद उनके दो अन्य साथी राहुल जरगल और एन जागोई ने सुबह पौने आठ बजे एवरेस्ट पर कदम रखकर अपने साथियों के साथ खुशी साझा की।

 

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