बनारस के मणिकर्णिका घाट के मंदिर में भरा सीवर का पानी, कांग्रेस नेता ने उठाए सवाल, पूछा- हिंदुत्व के रक्षक हैं या भक्षक?

सीनियर कांग्रेस नेता अजय राय ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल किया है कि आप हिंदुत्व के रक्षक हैं या भक्षक?

Manikarnika Ghat
बनारस के मणिकर्णिका घाट के मंदिर में सीवर का पानी भर गया है। (फोटो- Twitter/Ajayrai)

बनारस के मणिकर्णिका घाट को दुनियाभर में एक प्रसिद्ध जगह के रूप में जाना जाता है। लेकिन इस बार एक ऐसा मामला सामने आया है, जिससे भगवान शिव के भक्तों को काफी कष्ट पहुंचा है।

बनारस के मणिकर्णिका घाट के मंदिर में सीवर का पानी भर गया है। ये हाल केवल मणिकर्णिका घाट का नहीं है, बल्कि शहर के कई मंदिरों में सीवर का पानी भरा हुआ है।

ऐसे में सीनियर कांग्रेस नेता अजय राय ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल किया है कि आप हिंदुत्व के रक्षक हैं या भक्षक?

उन्होंने मणिकर्णिका घाट का वीडियो भी ट्विटर पर पोस्ट किया है और लिखा है कि बाबा महा शमशान नाथ को सीवर के गंदे पाने में डूबे देखकर मन बहुत द्रवित हो गया है। न केवल शहर में बल्कि अधिकतर मंदिरों में सीवर के पानी में देवी देवता डूबे हुए हैं। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आप ही बताइए यह हिंदुत्व के रक्षक हैं या भक्षक?

ट्विटर पर लोग अजय राय के पोस्ट पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। @kalyan_ganguly नाम के यूजर ने लिखा कि हे राम ऐसा अनर्थ।

@PremK_Thakur72 नाम के यूजर ने पीएम मोदी और सीएम योगी को टैग करते हुए इस वीडियो के रिप्लाई में कहा कि आपने ना ही देश के लिए काम किया और ना देश के लोगों के लिए और ना ही भगवान के लिए। आपने किसी भी काम में 100 फीसदी नहीं दिया। आप भगवान को ही बचा लेते, जिसकी वजह से आज तक वोट बैंक बनाए हुए हैं और भक्तों को बरगलाकर रखे हुए हैं।

क्या है मणिकर्णिका घाट

बनारस के मणिकर्णिका घाट को मुक्ति का मार्ग बताया गया है। कहा जाता है कि यहां पर चिता का जलना सौभाग्य की बात होती है। कहते हैं कि यहां अंतिम संस्कार करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस घाट का आलम यह है कि यहां पर हमेशा शव दहन चल रहा होता है। इस घाट पर जलती आग कभी नहीं बुझती है।

यहां के बारे में एक प्रसंग है कि देवी पार्वती का कर्ण फूल इसी स्थान पर एक कुंड में गिर गया था। भगवान शंकर ने तमाम मुश्किलों के बावजदू इसे ढूंढ़कर निकाला था। ऐसा कहा जाता है कि तभी से इस स्थान का नाम मणिकर्णिका पड़ गया। कहा यह भी जाता है कि कर्णफूल माता ने पार्वती के कर्ण फूल को यहां जानबूझकर छिपा दिया था। दरअसल कर्णफूल चाहती थीं कि शिव जी अधिक समय पर यहां रुकें। और इस जगह को देव आगमन से पुण्य मिले।

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