भारत में मैनुअल स्कैवेंजिंग पर कानूनी प्रतिबंध लगे एक दशक से अधिक समय बीत चुका है। केंद्र सरकार ने सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई को पूरी तरह मशीनीकृत बनाने के लिए NAMASTE (National Action for Mechanised Sanitation Ecosystem) जैसी योजनाएं शुरू की हैं। इसके बावजूद सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान होने वाली मौतें आज भी देश के सामने एक गंभीर मानवीय और प्रशासनिक चुनौती बनी हुई हैं।

मार्च 2026 में लोकसभा में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा पेश आंकड़ों के अनुसार, 2017 से अब तक देश में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान कम से कम 622 सफाई कर्मचारियों की मौत हुई है। इनमें से 539 परिवारों को पूरा मुआवजा मिला, 25 परिवारों को आंशिक मुआवजा दिया गया जबकि 52 परिवार आज भी मुआवजे से वंचित हैं। इसके अलावा 6 मामलों को बिना किसी समाधान के बंद कर दिया गया।

यूपी में सबसे ज्यादा मौतें

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 86 मौतें दर्ज की गईं। लेकिन इनमें 13 परिवारों को अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला जबकि 2 परिवारों को केवल आंशिक मुआवजा दिया गया।

दिल्ली में 62 मौतों में से 9 परिवारों को मुआवजा नहीं मिला। महाराष्ट्र में भी 9 परिवार भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। गुजरात में दो परिवारों को मुआवजा नहीं मिला जबकि एक मामला बंद कर दिया गया।

जिला स्तर पर भी तस्वीर चिंताजनक है। उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में 16 मौतें हुईं लेकिन केवल आठ परिवारों को पूरा मुआवजा मिला। छह परिवारों को कोई सहायता नहीं मिली और दो मामलों को बंद कर दिया गया। चंदौली और अंबेडकर नगर जैसे जिलों में भी मृतकों के परिवार आज तक सहायता की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

राज्यमौतेंं
उत्तर प्रदेश86
महाराष्ट्र82
तमिलनाडु77
हरियाणा76
गुजरात73
दिल्ली62

कानून के बावजूद क्यों हो रही मौतेंं?

भारत में ‘हाथ से मैला ढोने वालों के रोजगार पर प्रतिबंध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013’ (The Prohibition of Employment as Manual Scavengers and their Rehabilitation Act, 2013) लागू है। इस कानून के तहत किसी व्यक्ति को सीवर या सेप्टिक टैंक में बिना सुरक्षा उपकरण और सुरक्षा मानकों के उतारना प्रतिबंधित है।

सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा था कि सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान होने वाली हर मौत राज्य की जवाबदेही है। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मशीनों के उपयोग को प्राथमिकता देने, सुरक्षा उपकरण सुनिश्चित करने और पीड़ित परिवारों को समय पर मुआवजा देने के निर्देश दिए।

इसके बावजूद हर साल ऐसी मौतें सामने आती हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि स्थानीय निकाय और निजी ठेकेदार आज भी कई स्थानों पर मशीनों के बजाय मजदूरों को सीधे जहरीली गैसों से भरे सीवर में उतार देते हैं।

2023 के सर्वे में एक भी मैनुअल स्कैवेंजर नहीं

सरकार ने संसद में बताया कि 2023 में किए गए सर्वेक्षण में देश के किसी भी जिले में एक भी मैनुअल स्कैवेंजर नहीं मिला।

लेकिन यह दावा कई सवाल खड़े करता है। सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि 2013 और 2018 के सर्वेक्षणों में कुल 58098 मैनुअल स्कैवेंजर चिन्हित किए गए थे जिनमें से 32473 केवल उत्तर प्रदेश में थे।

विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि देश में अब कोई मैनुअल स्कैवेंजर नहीं है तो फिर हर साल सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान मजदूरों की मौतें कैसे हो रही हैं? यह विरोधाभास बताता है कि सर्वेक्षण और जमीनी वास्तविकता के बीच बड़ा अंतर मौजूद है।

NAMASTE योजना से क्या बदला?

केंद्र सरकार ने 2023-24 में NAMASTE योजना शुरू की। इसका उद्देश्य है-

-सीवर सफाई का पूर्ण मशीनीकरण
-सफाई कर्मचारियों का कौशल विकास
-स्वास्थ्य बीमा
-सुरक्षा उपकरण
-वैकल्पिक रोजगार

31 दिसंबर 2025 तक देशभर में 89114 सीवर एवं सेप्टिक टैंक सफाई कर्मचारियों का वेरिफिकेशन किया गया।

राज्यसत्यापित कर्मचारी
उत्तर प्रदेश12418
महाराष्ट्र8595
गुजरात7634
पश्चिम बंगाल7630
तमिलनाडु6981

सरकार के अनुसार इनमें से 73,864 (82.88 प्रतिशत) कर्मचारियों को आयुष्मान भारत अथवा राज्य सरकारों की स्वास्थ्य योजनाओं से जोड़ा गया। 2024-25 से इस योजना में कचरा बीनने वालों (Waste Pickers) को भी शामिल किया गया। मार्च 2026 तक देश में 2.34 लाख से ज्यादा वेस्ट पिकर्स इस योजना के अंतर्गत लाए जा चुके हैं।

NAMASTE योजना का उद्देश्य टेक्नोलॉजी के जरिए सफाई कर्मचारियों को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य उपलब्ध कराना है। फिर भी सरकार ने संसद में स्वीकार किया कि उसके पास यह आंकड़ा उपलब्ध नहीं है कि मशीनों के इस्तेमाल से कर्मचारियों की आय कितनी बढ़ी, उत्पादकता में कितना सुधार हुआ या दुर्घटनाओं में कितनी कमी आई। इसका स्पष्ट मतलब है कि योजना लागू होने के बावजूद उसके परिणामों का व्यवस्थित मूल्यांकन अभी तक नहीं किया गया है।

लगातार बढ़ रहीं शिकायतें

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के अनुसार 2025 में 842 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें प्रमुख शिकायतें थीं वेतन का भुगतान नहीं होना, सुरक्षा उपकरण उपलब्ध न कराना, जातिगत भेदभाव और सेवा संबंधी अनियमितताएं।

सबसे ज्यादा शिकायतें दिल्ली (140), उत्तर प्रदेश (130) और महाराष्ट्र (95) से प्राप्त हुईं। यह संकेत देता है कि केवल मशीनें उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, कार्यस्थल पर श्रम अधिकारों और सुरक्षा मानकों का पालन भी उतना ही आवश्यक है।

सबसे खतरनाक गैसें

गैसप्रभाव
Hydrogen Sulphideकुछ सेकेंड में बेहोशी
Methaneविस्फोट
Carbon Monoxideदम घुटना
Ammoniaफेफड़ों को नुकसान

Source: Occupational Safety and Health Administration (OSHA), WHO

सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही का

संसद में जब सरकार से पूछा गया कि मशीनों के उपयोग के नियमों का उल्लंघन करने वाले नगर निकायों या ठेकेदारों के विरुद्ध कितनी कार्रवाई हुई तो सरकार ने कहा कि केंद्रीय स्तर पर ऐसा कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है क्योंकि यह राज्यों का विषय है।

यही जवाबदेही का सबसे बड़ा संकट है। मौतें राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज होती हैं। लेकिन जिम्मेदारी राज्यों और स्थानीय निकायों पर छोड़ दी जाती है। परिणामस्वरूप अधिकांश मामलों में न तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई होती है और न ही पीड़ित परिवारों को समय पर न्याय मिल पाता है।

सीवर में होने वाली मौतें केवल वर्कप्लेस पर होने वाली दुर्घटनाएं मात्र नहीं हैं। बल्कि यह सामाजिक असमानता, प्रशासनिक लापरवाही और तकनीकी विफलता का संयुक्त परिणाम हैं। भारत अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में वैश्विक पहचान बना रहा है लेकिन आज भी मजदूर जहरीली गैसों से भरे सीवर में बिना पर्याप्त सुरक्षा के उतरने को मजबूर हैं।

जब तक सीवर सफाई का पूर्ण मशीनीकरण, ठेकेदारों की जवाबदेही, समयबद्ध मुआवजा, सुरक्षा उपकरणों की अनिवार्यता और पुनर्वास योजनाओं का प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया जाता तब तक ऐसी मौतें रुकना कठिन होगा। किसी भी आधुनिक लोकतंत्र में यह स्वीकार्य नहीं हो सकता कि स्वच्छता व्यवस्था की कीमत किसी मजदूर को अपनी जान देकर चुकानी पड़े।

सीवर सफाई मौतें (2017-2026): मुआवजे का सच

सीवर सफाई मौतें (2017-2026): मुआवजे का सच

लोकसभा में पेश आधिकारिक आंकड़े, मार्च 2026
2017 से अब तक कुल मौतें
622
सीवर व सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान
मुआवजे की स्थिति
539
पूर्ण मुआवजा मिला
25
आंशिक मुआवजा
52
मुआवजे से वंचित
6
बिना समाधान बंद
राज्यवार तस्वीर
उत्तर प्रदेश
86 मौतें
13 परिवार वंचित • 2 को आंशिक मुआवजा
महाराष्ट्र
82 मौतें
9 परिवार भुगतान का इंतजार कर रहे
तमिलनाडु
77 मौतें
राष्ट्रीय आंकड़ों में शामिल
हरियाणा
76 मौतें
राष्ट्रीय आंकड़ों में शामिल
गुजरात
73 मौतें
2 परिवार वंचित • 1 मामला बंद
दिल्ली
62 मौतें
9 परिवार आज भी मुआवजे से वंचित
2013 अधिनियम व 2023 सुप्रीम कोर्ट फैसले के बावजूद 52 परिवार आज भी न्याय की प्रतीक्षा में
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