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हर घर में बेचैनी, असंतोष है, पहली बार BJP समर्थक भी उठा रहे आवाज- बड़े भाजपा नेताओं ने माना

हालांकि, एक केंद्रीय मंत्री बोले- जब तक तीन साल और नहीं हो जाते, तब तक किसी को बीजेपी या फिर मोदी पर निर्णय करने की जरूरत नहीं है। पीएम मोदी की करिश्माई छवि और लोकप्रियता ने बीजेपी को राष्ट्रीय राजधानी में बढ़त दिलाई, जहां पर हमने पार्टी को और मजबूत किया।

Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली | Updated: May 31, 2021 9:41 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्चुअल रैली के दौरान उनका संबोधन सुनते हुए पार्टी समर्थक। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

मोदी सरकार के सात साल पूरे होने पर BJP भले ही विभिन्न मोर्चों पर बड़े कामों और उपलब्धियों के दावे कर रही हो, पर पार्टी अंदरखाने में ही समर्थक नीतियों और कार्यशैलियों को लेकर सवाल उठे रहे हैं। ऐसा 2014 में मोदी के पीएम बनने के बाद पहली बार हुआ है। यह बात भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता भी मानते हैं।

ऐसे नेताओं का कहना है कि पार्टी लाइन से जुड़े हर घर में बेचैनी और असंतोष पनपा हुआ है। नाम न बताने की शर्त पर प्रमुख राज्यों में पार्टी प्रभारी और शीर्ष नेता ने बताया कि 2014 के बाद से यह उनके लिए अब तक का सबसे बुरा वक्त है। पार्टी के ईमानदार लोग तो साथ हैं, पर 2014 के बाद पहली बार हमें अपने समर्थकों के बीच में से ही नेतृत्व क्षमता को लेकर आवाजें सुनाई दे रही हैं। लेकिन इस चीज को ठीक नहीं किया जा सकता है।उन्होंने आगे बताया, “पार्टी नेतृत्व लोगों में पनपे रोष और नाराजगी के बारे में जानती है। हम आगे की रणनीति तैयार करते वक्त इन चीजों का ध्यान रख रहे हैं। हम अगर अपनी खोई हुई पूरी जमीन न हासिल कर सके, तो कम से कम कुछ तो हाथ आएगा।” समझा जा सकता है कि यह टिप्पणी उन्होंने खफा वर्ग को साधने को लेकर कही।

यहां तक कि कई नेताओं ने कहा कि सामाजिक या सार्वजनिक कठिनाई के दौरान (नोटबंदी, जीएसटी, प्रवासी मजदूर संकट आदि के बाद) पार्टी का बचाव मोदी की “ईमानदार और प्रतिबद्धता” वाली छवि के जरिए किया गया और केंद्र की योजनाओं द्वारा अच्छी साख बनाने की कोशिश की गई।

पार्टी के एक अन्य नेता और राज्यसभा सांसद ने भी बताया, “पार्टी और सरकार को बेहद सावधानी से आगे बढ़ना होगा, क्योंकि हम पर हमले और आलोचना का खतरा बन गया है और वह ढाल उतनी मजबूत नहीं है, जितनी कि कुछ महीने पहले थी।”

हालांकि, एक केंद्रीय मंत्री बोले- जब तक तीन साल और नहीं हो जाते, तब तक किसी को बीजेपी या फिर मोदी पर निर्णय करने की जरूरत नहीं है। पीएम मोदी की करिश्माई छवि और लोकप्रियता ने बीजेपी को राष्ट्रीय राजधानी में बढ़त दिलाई, जहां पर हमने पार्टी को और मजबूत किया। समझदार नेताओं को जब लगे कि उनके दांव काम नहीं कर रहे, तो उन्हें अपनी चाल बदल देनी चाहिए। हम समीक्षा करेंगे और झटकों और चोटों के बाद भी आगे बढ़ते रहेंगे।

कोविड-टास्क फोर्स के साथ करीब से काम करने वाले एक अन्य नेता ने कहा, अच्छी बात है कि कोरोना के केस कम हो रहे हैं और हम अगस्त तक कम से कम 30-40 करोड़ वैक्सिनेशन (एक शॉट) का लक्ष्य हासिल करने में सक्षम दिख रहे हैं। वैसे, लोग डर और गुस्से में हैं, पर सुधार करने से अच्छा कुछ और नहीं हो सकता।

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