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कोरोना, ऑक्सीजन संकट के बीच COVID-19 ICU में 1 दिन, जानें- कैसे महामारी से कैसे निपट रहे हमारे वॉरियर्स और मरीज

देश में तेजी से फैलते कोरोना संक्रमण के बीच ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने एक दिन दक्षिण पूर्वी दिल्ली में स्थित होली फॅमिली अस्पताल में गुजारा। सुबह के 10 बजे अस्पताल में डॉ सुमित राय आईसीयू रूम नंबर 4 में आते हैं। उन्होनें नीले रंग का पीपीई गाउन पहना हुआ है। डॉक्टर नर्सों से बात करते […]

Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: May 9, 2021 1:25 PM
दक्षिण पूर्वी दिल्ली में स्थित होली फॅमिली अस्पताल में वॉरियर्स और मरीज कैसे महामारी से निपट रहे हैं। (express photo)

देश में तेजी से फैलते कोरोना संक्रमण के बीच ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने एक दिन दक्षिण पूर्वी दिल्ली में स्थित होली फॅमिली अस्पताल में गुजारा। सुबह के 10 बजे अस्पताल में डॉ सुमित राय आईसीयू रूम नंबर 4 में आते हैं। उन्होनें नीले रंग का पीपीई गाउन पहना हुआ है। डॉक्टर नर्सों से बात करते हैं जिनकी शिफ्ट दो घंटे पहले शुरू हो चुकी है।

इसके बाद डॉक्टर आईसीयू का एक राउंड लेते हैं और मरीजों के सामने लगी तख्ती को उठाकर उनका हालचाल लेते हैं। आईसीयू में ज्यादातर मरीज भारी दवा के कारण बेहोश हैं। कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए ICU में बिस्तर बढ़ाए गए हैं। ऐसे में दो बिस्तरों के बीच मात्र 4 फीट का गैप है। अस्पताल में कुल 49 वेंटिलेटर हैं, जो सभी उपयोग में हैं, और अस्थायी वेंटिलेशन के लिए छह संज्ञाहरण मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। अस्पताल ने और वेंटिलेटर की मांग की है लेकिन वे अभी तक नहीं आए हैं।

390 बिस्तरों की क्षमता वाले इस अस्पताल को अप्रैल के पहले सप्ताह में 100% कोविड सुविधा वाला अस्पताल घोषित किया गया था। तब से अस्पताल में 1,600 से ज्यादा मरीज भर्ती हो चुके हैं और अबतक 190 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

मामलों में वृद्धि को देखते हुए, नर्सिंग स्टाफ की शिफ्ट में बदलाव किए गए हैं। तीन से आठ की शिफ्ट से बदलकर दो से 12 कर दिया गया है। नर्सों ने कई मास्क और साथ ही दस्ताने और पीपीई गाउन पहने हैं। शिफ्ट के दौरान खाने का समय नहीं है।

करीब 12.30 बजे आईसीयू के दूसरे कमरे में, दरवाजे के पास लेते हुए मरीज का मॉनिटर अचानक आवाज़ करने लगा। छह लोग उसके बिस्तर की तरफ दौड़े। मरीज बेहोश था। यह देखते हुए कि उसकी ऑक्सीजन गिर रही हैम टीम ने उसे उठाया और पेट के बल लिटा दिया।

इसी बिस्तर के पास में एक 51 साल का मरीज बैठा है। जो अपनी पानी की बोतल से धीरे-धीरे पानी पी रहा है। वह थका हुआ दिख रहा है, हर सांस के लिए संघर्ष कर रहा है, और अंत में बोतल भी उसके हाथ से छूट रही है।

एक नर्स ने उसकी हालत पर ध्यान दिया और उसे एक टैबलेट दिया। जिसके माध्यम से वह अपने परिवार के सदस्यों से बात कर सकता है। वीडियो कॉल में उनका भाई कहता है कि “आप चिंता मत करो। हम सब यहां ठीक हैं। आप बस अपना ख्याल रखें।” नर्स का कहना है कि उन्होंने परिवार के सदस्यों को आईसीयू का फोन नंबर दिया है, और मरीजों को एक टैबलेट प्रदान किया है, क्योंकि यहां किसी को उनसे मिलने कि अनुमति नहीं है।

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