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इथियोपिया में 7 भारतीय बंधक

भारतीय कर्मचारियों को इथियोपिया की तीन अलग-अलग जगहों पर बंधक रखा गया है। कर्मचारियों के परिजनों के ई-मेल के मुताबिक इन सभी को ओरोमिया और अहमरा स्टेट में बंधक बनाया गया है। बंधक बनाए गए कर्मचारियों के हवाले से परिजनों ने अपने ईमेल में कहा है कि काम रोके जाने और भुगतान नहीं किए जाने के बाद वहां के स्थानीय लोग दहशत में आ गए हैं।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (File Photo, Source- REUTERS)

अफ्रीकी देश इथियोपिया में भारत के सात नागरिकों को बंधक बना लिया गया है। ये सभी कर्ज में फंसी भारतीय कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आइएल एंड एफएस) के कर्मचारी हैं। इथियोपिया से स्थानीय लोगों ने इन सभी को 25 नवंबर को अगवा कर लिया और इन्हें दो प्रांतों में तीन जगहों पर ले जाकर बंधक बना लिया। आइएल एंड एफएस की एक परियोजना के लिए स्थानीय लोग काम कर रहे थे और अरसे से भुगतान नहीं मिलने से बिफरे हुए थे। बंधकों तक पहुंच बनाने के लिए विदेश मंत्रालय ने इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा स्थित भारतीय दूतावास के जरिए संपर्क साधने का प्रयास शुरू किया है। दूतावास के अधिकारी वहां इथियोपिया पुलिस के अधिकारियों के मार्फत वार्ता कर रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से जुड़ी सरकारी क्षेत्र की कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आइएल एंड एफएस) का कर्ज संकट शुरू होने के असर के तौर पर यह बड़ा मामला सामने आया है। लगभग 91 हजार करोड़ रुपए के कर्ज से जूझ रही इस कंपनी का प्रबंधन अक्तूबर में भारत सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया। इस कंपनी ने दुनिया भर में चल रही अपनी परियोजनाओं में भुगतान रोक दिया है। इथियोपिया में हाईवे निर्माण की विभिन्न परियोजनाओं के लिए भी फंड रोक दिया गया है। भारत-स्पेन के संयुक्त उपक्रम के तहत आइएल एंड एफएस वहां हाईवे निर्माण की बड़ी परियोजना पर काम कर रहा था।

अगवा किए गए एक कर्मचारी चैतन्य हरी ने ट्विटर पर भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से संपर्क किया है। अन्य कई कर्मचारियों के परिजनों ने विदेश मंत्रालय, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री कार्यालय को ईमेल भेजकर मदद की गुहार लगाई है। इन सभी ने स्पेन सरकार को, इथियोपिया के मंत्रियों और विश्व बैंक के प्रतिनिधियों को भी अलग-अलग पत्र भेजा है। इन लोगों के मुताबिक, भुगतान नहीं मिलने के कारण इथियोपिया के कर्मचारी अरसे से धमकियां दे रहे थे। 25 नवंबर को तड़के कर्मचारियों को अगवा कर लिया गया। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने चैतन्य हरी से मिली जानकारी के हवाले से बताया कि बंधक बनाए गए भारतीयों को भोजन, पानी और अन्य जरूरत की वस्तुएं नहीं लेने दी जा रही हैं। बंधक बनाने वाले स्थानीय लोग कह रहे हैं कि जाने दिया गया तो उनका भुगतान कभी नहीं मिलेगा।

भारतीय कर्मचारियों को इथियोपिया की तीन अलग-अलग जगहों पर बंधक रखा गया है। कर्मचारियों के परिजनों के ई-मेल के मुताबिक इन सभी को ओरोमिया और अहमरा स्टेट में बंधक बनाया गया है। बंधक बनाए गए कर्मचारियों के हवाले से परिजनों ने अपने ईमेल में कहा है कि काम रोके जाने और भुगतान नहीं किए जाने के बाद वहां के स्थानीय लोग दहशत में आ गए हैं। इन सभी का कहना है कि स्थानीय अधिकारी और पुलिस भी स्थानीय लोगों का पक्ष ले रहे हैं।

विदेश मंत्रालय और इथियोपिया में भारतीय दूतावास के अधिकारी पूरे मामले पर नजर रखे हुए हैं। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक इथियोपिया के अधिकारियों और आइएल एंड एफएस प्रबंधन के साथ संपर्क बनाए रखा गया है। पीड़ित कर्मचारियों के परिजनों के मुताबिक, आइएल एंड एफएस के प्रबंधन का कहना है कि रिजर्व बैंक ने कंपनी के फंड भेजने पर रोक लगा रखी है। विदेश मंत्रालय ने बंधक बनाए गए एक कर्मचारी सुखविंदर सिंह खोखर के बेटे से कहा कि है इथियोपिया के स्थानीय लोगों से संपर्क साधा जा रहा है।
आइएल एंड एफएस प्रबंधन ने विदेश मंत्रालय को बताया है कि रिजर्व बैंक की पाबंदियों के कारण वे भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। इथियोपिया में यह कंपनी बीते नौ महीने से कर नहीं जमा कर पाई है। बताते चलें कि भारी कर्ज संकट से जूझ रही इस कंपनी के प्रबंधन को अक्तूबर में सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया था। सरकार ने कंपनी का प्रबंधन संभालने के लिए छह सदस्यीय बोर्ड का गठन किया है। आइएल एंड एफएस एक सरकारी क्षेत्र की कंपनी है, जिसकी 40 सहायक कंपनियां हैं। वर्ष 1987 में सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया, यूनिट ट्रस्ट आॅफ इंडिया और हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी ने ढांचागत परियोजनाओं को कर्ज देने के लिए यह कंपनी बनाई थी।

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