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शंघाई के भारतीय दूतावास में काम कर रहा था CPC का सदस्य, चीन की सत्ताधारी पार्टी की 7 शाखाओं का भारत से है संबंध

चीन दुनियाभर में जासूसी करा रहा है। सीपीसी के सदस्य बड़ी कंपनियों, वाणिज्य संगठनों और देशों के दूतावासों तक घुसपैठ कर चुके हैं। लीक हुए डेटा में यह खुलासा हुआ है।

कोरोना वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों की भी जासूसी करा रहा चीन।

चीन घुसपैठ और जासूसी करने से बाज नहीं आ रहा है। अब लीक हुए डेटा से उसकी कलई खुल गई है। कम्युनिस्ट पार्टी के जासूस दुनिया की बड़ी कंपनियों में भी घुसपैठ कर चुके हैं। जो कंपनियां कोरोना का टीका बना रही हैं उसमें भी चीनी पार्टी ने अपने सदस्यों को नियुक्त करवा दिया है।

चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC) की सात शाखाओं का संबंध भारत के साथ है। द इंडियन एक्सप्रेस समेत इंटरनैशनल कंसोरटियम ऑफ जर्नलिस्ट को मिले आंकड़ों के मुकाबले शंघाई में भारतीय दूतावास में भी सीपीसी का एक सदस्य काम कर रहा था। पहली बार सामने आए डेटा के मुताबिक चीन में कम्युनिस्ट पार्टी शाखाओं में बंटी हुई है। पार्टी की कमिटी सभी बड़े कॉर्पोरेशन में काम करती है और यह सीधे चीनी राष्ट्रपति को रिपोर्ट करती है।

लीक हुए डेटा से खुलासा हुआ है कि सीपीसी की लगभग 79000 अलग-अलग तरह की शाखाएँ हैं। 19.5 लाख लोग सीपीसी के सदस्य के रूप में काम करते हैं। यह भी पता चला है कि सीपीसी के सदस्य बहुदेशीय कंपनियों में काम कर रहे हैं। इसमें बैंकिंग, डिफेंस, फार्मास्युटिकल और फाइनैंशनल सेक्टर भी शामिल है। इन कंपनियों में एएनजेड, HSBC, Pfizer, Astrazeneca, Volksvagen और बोइंग भी शामिल हैं।

लीक हुए डेटा से पता चला है कि कम से कम सात सीपीसी शाखाओं का भारत से सीधा संबंध है और इनमें लगभग 91 सदस्य काम कर रहे हैं। शंघाई में कॉन्सुलेट जनरल ऑफ इंडिया ने जिन विदेशी लोंगों को हायर किया है उनमें एक सीपीसी का सदस्य भी है। द इंडियन एक्सप्रेस ने निजता के अधिकार की वजह से उस सदस्य का नाम, लिंग और जन्मदिन नहीं बताया है। पता चला है कि वह सीपीसी का सदस्य शंघाई में भारतीय दूतावास में तीन साल काम करता रहा।

डेटा लीक के बाद 19.5 लाख सीपीसी सदस्यों के बारे में जानकारियां मिली हैं। शंघाई में कम से कम 10 वाणिज्य दूतावासों में सीपीसी के सदस्य एक्सपर्ट, लिपिक, कार्यकारी सहायक, आर्थिक सलाहकार के रूप में भर्ती हुए हैं। यह भी पता चला है कि ये सदस्य सीधे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के प्रति जवाबदेह हैं। यह डेटा शंघाई के एक सर्वर से चुराया गया है। भारत में चीनी दूतावास ने इस विषय पर पूछे गए सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया है।

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