Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के प्रतिष्ठित और रसूखदार व्यवसायी रहे सेठ जुम्मा लाल रूठिया के परिवार की तीसरी पीढ़ी के एक सदस्य ने दावा किया है कि करीब 109 साल पहले तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने उनके दादा से 35000 रुपए का ‘वॉर लोन’ लिया था, जिसे आज तक लौटाया नहीं गया है।
दिवंगत व्यवसायी सेठ जुम्मा लाल रूठिया के पौत्र विवेक रूठिया ने कहा कि पुनर्भुगतान की राशि अब करोड़ों रुपए में होगी। उस समय सोने की क्या कीमत थी और आज क्या है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है। विवेक रूठिया ने चार जून, 1917 को भोपाल में ब्रिटिश राजनीतिक प्रतिनिधि द्वारा हस्ताक्षरित एक प्रमाण पत्र दिखाया गया। जिसमें कहा गया है कि सेठ जुम्मा लाल ने भारतीय वॉर लोन के लिए 35,000 रुपए दिए और इस तरह सरकार एवं साम्राज्य के प्रति अपनी वफादारी दिखाई।
अग्रेंजों ने पैसे उधार लिए थे- विवेक रूठिया
विवेक रूठिया ने कहा कि उन्हें दादाजी की वसीयत में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार के साथ पत्राचार का विवरण देने वाले दस्तावेज मिले, जो स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि अंग्रेजों ने पैसे उधार लिए थे। उन्होंने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, एक संप्रभु राष्ट्र सैद्धांतिक रूप से अपने पिछले ऋणों को चुकाने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।
उन्होंने कहा कि उनके पास सभी दस्तावेज हैं और वह अपने कानूनी सलाहकार से सलाह लेने के बाद ब्रिटेन सरकार को कानूनी नोटिस भेजने की तैयारी कर रहे हैं। विवेक रूठिया ने कहा कि उन्हें वसीयत में ब्रिटिश हुकूमत के साथ हुई लिखा-पढ़ी के दस्तावेज मिले हैं, जिससे साफ होता है कि अंग्रेजों ने यह राशि भोपाल रियासत में अपने प्रबंधन को व्यवस्थित करने के लिए ली थी।
स्थानीय लोगों ने बताया कि आजादी से पहले रूठिया परिवार सीहोर और भोपाल रियासत के सबसे बड़े पूंजीपति परिवारों में शामिल था तथा आज भी सीहोर शहर की 40 से 45 फीसद बसाहट उनकी जमीन पर बसी है। विवेक रूठिया ने कहा कि इंदौर, सीहोर और भोपाल में कई ऐसी संपत्तियां हैं जो रूठिया परिवार के नाम पर रजिस्टर्ड हैं। लेकिन उन्हें उनके बारे में पता नहीं है और अगर उन्हें पता भी है तो उन पर अन्य लोगों का कब्जा है।
तीसरी पीढ़ी के विवेक रूठिया आगे आए
दिवंगत व्यवसायी सेठ जुम्मा लाल रूठिया के पौत्र, विवेक रूठिया अब ब्रिटेन की सरकार को एक कानूनी नोटिस भेजने की योजना बना रहे हैं ताकि उन्हें 1917 में लिया गया यह कथित कर्ज उन्हें वापस मिल सके। विवेक रूठिया ने ब्रिटिश हुकूमत के साथ कर्ज के लेन-देन के दस्तावेज होने का दावा करते हुए कहा कि अंग्रेज देश छोड़कर चले गए लेकिन आज तक इस कर्ज को नहीं लौटाया। ब्रिटिश सरकार को कर्ज देने के 20 साल बाद 1937 में उनके दादा की मौत हो गई थी। साल 1917 में प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) के दौरान, भारत में ब्रिटिश प्रशासन ने अपने युद्ध प्रयासों का समर्थन करने के लिए स्थानीय नागरिकों से धन मांगा था।
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भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने मध्य प्रदेश में वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन को लेकर गड़बड़ियों का खुलासा किया है। यह गड़बड़ियां पूरे राज्य में हुई हैं। राज्य की विधानसभा में इस संबंध में 2018 से 2023 के बीच की ऑडिट रिपोर्ट पेश की गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…
