Tamil Nadu News: मद्रास हाई कोर्ट ने मंगलवार को विजय की टीवीके पार्टी के विधायक आर श्रीनिवास सेतुपति को विधानसभा के फ्लोर टेस्ट में मतदान करने या भाग लेने से रोक दिया। डीएमके नेता के.आर. पेरियाकरुप्पन की तरफ से दायर की गई याचिका पर जस्टिस एल. विक्टोरिया गौरी और एन. सेंथिलकुमार की बेंच ने अंतरिम आदेश पारित किया। पेरियाकरुप्पन चुनाव में सेतुपति से एक वोट से हार गए थे। पेरियाकरुप्पन ने मतगणना में अनियमितताओं और विसंगतियों का आरोप लगाया था।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर सेतुपति ऐसी कार्यवाही में भाग लेते हैं और उनका वोट निर्णायक साबित होता है, तो इसका प्रभाव उनके निर्वाचन क्षेत्र से कहीं ज्यादा दूर तक फैल सकता है और राज्य के संवैधानिक शासन को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, अदालत ने साफ किया कि इस आदेश से उनका चुनाव अमान्य नहीं माना जाएगा।
कोर्ट ने टिप्पणी की, “हम इस स्तर पर छठे प्रतिवादी के चुनाव को अमान्य घोषित नहीं कर रहे हैं। न ही यह न्यायालय याचिकाकर्ता को उनके स्थान पर नियुक्त कर रहा है। हम केवल इस बात पर विचार कर रहे हैं कि एक वोट के परिणाम में गंभीर चुनावी अनियमितताओं की प्रथम दृष्टया जांच लंबित रहने के दौरान, क्या निर्वाचित उम्मीदवार को ऐसी कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए जहां उसका वोट सदन में सत्ता संतुलन को बदल सकता है।”
याचिकाकर्ता ने क्या आरोप लगाया?
अपनी याचिका में पेरियाकरुप्पन ने तर्क दिया था कि विवादित पोस्टल बैलेट उनके तिरुप्पत्तूर निर्वाचन क्षेत्र के लिए था, लेकिन गलती से किसी अन्य तिरुप्पत्तूर निर्वाचन क्षेत्र में भेज दिया गया और वहां खारिज कर दिया गया। उन्होंने बताया कि उन्होंने चुनाव अधिकारियों को इस संबंध में अभ्यावेदन भेजे थे, जिनका कोई उत्तर नहीं दिया गया।
कोर्ट ने टिप्पणी की, “एक वोट से तय होने वाले चुनाव में, हर एक मत न केवल प्रासंगिक होता है, बल्कि संभावित रूप से निर्णायक भी होता है। पोस्टल बैलेट के संबंध में याचिकाकर्ता की शिकायत मात्र पुनर्गणना का अनुरोध नहीं है। यह शिकायत है कि कथित तौर पर एक निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित वोट को दूसरे निर्वाचन क्षेत्र के अधिकारी द्वारा संसाधित किया गया।”
इसमें आगे कहा गया है कि अगर यह आरोप अंततः सही पाया जाता है, तो मामला केवल गिनती की गलती का नहीं होगा, बल्कि एक वैध चुनावी रिकॉर्ड के प्रबंधन में अधिकार क्षेत्र संबंधी दोष का होगा। आदेश में कहा गया, “लोकतंत्र वोटिंग के माध्यम से ही जिंदा रह सकता है।”
इसमें कहा गया, “चुनाव से संबंधित मामलों में भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते समय न्यायालय को संवैधानिक सावधानी बरतनी चाहिए। वह अंतरिम संरक्षण की आड़ में चुनाव याचिका के लिए आरक्षित प्रोहिबिटेड एरिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। साथ ही, जहां महत्वपूर्ण चुनावी सामग्री के संरक्षण के लिए एक संकीर्ण और असाधारण याचिका दायर की जाती है, ताकि समय बीतने के साथ सच्चाई खो न जाए, वहां संवैधानिक न्यायालय असहाय दर्शक नहीं बन सकते।”
मद्रास हाई कोर्ट के अनुसार, इस मामले में एक विसगंति का खुलासा हुआ है। जहां पर एक पोस्टल बैलेट को निर्वाचन क्षेत्र में मौजूद कथित तौर पर समान नाम वाले दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में भेज दिया गया और वहां उसे अस्वीकार कर दिया गया।
मद्रास हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे टीवीके विधायक
बता दें कि मद्रास हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ विधायक श्रीनिवास सेतुपति ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। वरिष्ठ वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंहवी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए आगामी फ्लोर टेस्ट को देखते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की। मामले की तात्कालिकता को ध्यान में रखते हुए मुख्य न्यायाधीश ने बुधवार को इस मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की।
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर
तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर नया और दिलचस्प मोड़ सामने आया है। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के विधायक वेलुमणि और सीवी षणमुगम के नेतृत्व वाले गुट ने सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) को समर्थन देने की घोषणा कर दी है। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और एआईएडीएमके के भीतर आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। पढ़ें पूरी खबर…
