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जानें-समझें: डाटा सुरक्षा के सवाल, सेंधमारी रोकने में कितने गंभीर सेवा प्रदाता

भारत में 50 करोड़ से ज्यादा वेब उपयोगकर्ता हैं। भारत का आनलाइन बाजार दूसरे स्थान पर है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि आनलाइन बाजार को विनियमित किया जाए।

भारत में वेब यूजर और ऑनलाइन काम (ऊपर) तथा शुभ रे,अध्यक्ष इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (नीचे बाएं) और पवन दुग्गल साइबर मामलों के विशेषज्ञ (नीचे दाएं)।

डाटा सुरक्षा का मुद्दा इन दिनों चर्चा में है। हाल में ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन ने संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सामने पेश होने से मना कर दिया। इसको लेकर सांसद मीनाक्षी लेखी की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा कि अमेजन का कोई प्रतिनिधि अगर 28 अक्तूबर को पेश नहीं हुआ तो यह विशेषाधिकार हनन के समान होगा। जेपीसी के सदस्यों ने फेसबुक की प्रतिनिधि से लंबी पूछताछ की है और गूगल, ट्विटर एवं पेटीएम के प्रतिनिधियों को तलब किया है। यह उम्मीद की जाती है कि सोशल मीडिया कंपनी को अपने विज्ञापनदाताओं के वाणिज्यिक फायदे के लिए अपने उपभोक्ताओं के डाटा में सेंध नहीं लगाने देनी चाहिए। सवाल बने हुए हैं कि लोगों की निजी जानकारी की सुरक्षा में सेंधमारी रोकने को लेकर ये सेवा प्रदाता कंपनियां कितनी गंभीर हैं।

उपयोक्ताओं के डाटा की चिंता
डाटा सुरक्षा विधेयक, 2019 पर संसद की संयुक्त समिति समीक्षा कर रही है और इसी सिलसिले में संबंधित पक्षों की सुनवाई की जा रही है। समिति के समक्ष पेश अपनी प्रतिनिधि के पेश होने के बाद सोशल नेटवर्किंग कंपनी फेसबुक ने कहा कि देश में अपनाए जा रहे डाटा सुरक्षा कानून में भारत की डिजीटल अर्थव्यवस्था और वैश्विक डिजीटर कारोबार को गति देने की क्षमता है। संसदीय समिति ने फेसबुक से यह जानना चाहा कि उसके राजस्व का कितना हिस्सा देश में डाटा सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होता है। अभी तक संसदीय समिति के सामने जो बातें आई हैं, उसके आधार पर इसके एक सदस्य ने कहा है कि सोशल मीडिया मंच को उपयोक्ताओं के डाटा का उपयोग अपने विज्ञापन दाताओं के वाणिज्यिक लाभ या चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए नहीं करना चाहिए।

निजी जानकारी और कारोबारी मुनाफा
इंटरनेट पर निर्भरता के मौजूदा दौर में निजी डाटा की मदद से करोड़ों के कारोबार खड़े किए जा रहे हैं। दरअसल, इस दौर में उपयोक्ताओं की निजी जानकारी का इस्तेमाल कच्चे माल की तरह किया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि कानून के जरिए भारतीयों को अपने आंकड़े पर ज्यादा नियंत्रण दिया जाए। इस कानून के हिसाब से उपयोक्ता के निजी डाटा के उपयोग की इजाजत मांगनी पड़ेगी। डाटा सुरक्षा कानून पर करीब दो साल से काम चल रहा है। डाटा सुरक्षा विधेयक, 2019 वास्तव में नागरिकों को निजी डाटा हासिल करने, उसे ठीक करने, उसे मिटाने, अपडेट करने और एक से दूसरी कंपनी में पोर्ट आदि करने की भी सुविधा दे सकता है। डाटा की सुरक्षा से संबंधित शिकायत करने का भी जरिया मिलेगा। सरकार चाहती है कि कुछ तरह का डाटा भारत में ही स्टोर किया जाना जरूरी है।

वैयक्तिक डाटा संरक्षण विधेयक, 2019
वर्ष 2017 में व्यक्तिगत या निजी डेटा को सुरक्षित करने के संबंध में सिफारिश देने के लिए न्यायमूर्ति बीएन श्रीकृष्ण की अध्यक्षता में 10 सदस्यीय समिति गठित की गई थी। इस समिति ने व्यक्तिगत या निजी डेटा को सुरक्षित करने के संबंध में एक मसविदा भारत सरकार के समक्ष पेश किया था। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने 11 दिसंबर , 2019 को लोकसभा में निजी डाटा सुरक्षा विधेयक, 2019 को पेश किया था। बाद में इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों की एक संयुक्त प्रवर समिति के पास भेज दिया गया था। यह विधेयक व्यक्तिगत डाटा की गोपनीयता की रक्षा करने और विनियमों के लिए भारतीय डेटा संरक्षण प्राधिकरण को स्थापित करने का प्रावधान करता है। संसद में पारित होने से पूर्व इस बिल की जांच संयुक्त सीमिति द्वारा की जा रही है।

निजी डाटा के मायने
इस विधेयक में डाटा को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। निजी डाटा, संवेदनशील निजी डाटा और अति संवेदनशील निजी डाटा। इस विधेयक में निजी डेटा को आॅनलाइन या आॅफलाइन एकत्र की गई किसी भी जानकारी के रूप में परिभाषित करता है, जिसका उपयोग किसी व्यक्ति की पहचान करने के लिए किया जा सकता हो, जैसे नाम, पता, फोन नंबर, स्थान, खरीदारी की हिस्ट्री, फोटोग्राफ, टेलीफोन रिकॉर्ड, खाद्य प्राथमिकताएं, फिल्म प्राथमिकताएं, आॅनलाइन सर्च हिस्ट्री, मैसेज, उपयोगकर्ता की डिवाइस और सोशल मीडिया एक्टिविटी आदि। वहीं संवेदनशील निजी डाटा में स्वास्थ्य, वित्तीय सेवा, लैंगिग रुझान, बायोमेट्रिक्स (चेहरे की फोटो, उंगलियों के निशान, आईरिस स्कैन), जाति या जनजाति, धार्मिक या राजनीतिक मान्यताएं आदि आते हैं। अति संवेदनशील डाटा को सरकार ने परिभाषित नहीं किया है।

क्या कहते हैं जानकार

भारत में 50 करोड़ से ज्यादा वेब उपयोगकर्ता हैं। भारत का आनलाइन बाजार दूसरे स्थान पर है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि आनलाइन बाजार को विनियमित किया जाए। सरकार डाटा संरक्षण विधेयक के माध्यम से डाटा सुरक्षा और उसके संरक्षण के मुद्दे को संबोधित करने का प्रयास कर रही है।
-शुभ रे, अध्यक्ष, इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन आॅफ इंडिया

हमारे देश में निजी डाटा चोरी एक बड़े उद्योग का रूप लेता जा रहा है। बड़ी कंपनियां अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए डाटा का इस्तेमाल करती हैं। किसी भी नई अर्थव्यवस्था के लिए डाटा आत्मा का काम करता है। डाटा सुरक्षा को लेकर धरातल पर अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
– पवन दुग्गल, साइबर मामलों के विशेषज्ञ

निजी डाटा चोरी के कांड

’ इंटरनेट सर्च इंजन याहू ने 2017 में माना कि 2013 में उसके तीन अरब एकाउंट पर हैकर्स ने सेंध मारी थी
’ ई-कॉमर्स कंपनी ईबे ने 2014 में 14.5 करोड़ उपयोक्ताओं के डाटा चोरी किए जाने की शिकायत की थी। हैकर्स ने कंपनी नेटवर्क में जगह बनाई और सर्वर में 229 दिनों तक बने रहे।
’ पिज्जा हट ने 2017 में अपनी वेबसाइट और ऐप के हैक होने और 60 हजार अमेरिकी ग्राहकों के निशाना बनने की बात कही थी।
’ उबर ने 2017 में करीब 5.7 करोड़ यूजर्स के डाटा लीक होने की बात कही।
’ जोमैटो ने कहा कि उसके करीब 1.7 करोड़ यूजर्स का डाटा चुरा लिया गया।
’ इक्वीफैक्स पर साइबर हमले में करीब 14.55 करोड़ लोगों का निजी डाटा चोरी हो गया।
’ लिंक्डइन से 2012 में करीब 65 लाख उपयोक्ताओं की जानकारी चुरा ली गई। 2017 में कंपनी ने 10 करोड़ खातों की चोरी की बात मानी।

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