Sujit Bose Arrested: प्रवर्तन निदेशालय ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और टीएमसी नेता सुजीत बोस को कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया। सीजीओ कॉम्प्लेक्स में सुजीत बोस ईडी के सामने पेश हुए थे। करीब दस घंटे की पूछताछ के बाद बोस को गिरफ्तार किया गया।
केंद्रीय एजेंसी ने अपने बयान में कहा, “पश्चिम बंगाल सरकार के पूर्व मंत्री श्री सुजीत बोस को आज (11.05.2026) नगरपालिका भर्ती घोटाले के सिलसिले में ईडी द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है।” ईडी ने आगे आरोप लगाया कि जांचकर्ताओं को पूर्व मंत्री से जुड़े बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकदी जमा मिली। सुजीत बोस राज्य की कई नगरपालिकाओं में अवैध नियुक्तियों और बड़े वित्तीय लेन-देन के सिलसिले में लंबे समय से ईडी की निगरानी में थे। हालांकि वे 1 मई को ईडी के सामने पेश हुए थे, लेकिन चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद यह उनकी पहली पेशी थी।
ईडी ने ली थी तलाशी
गौरतलब है कि इस मामले की जांच में ईडी के अधिकारियों ने पहले सुजीत बोस के लेकटाउन स्थित घर, ऑफिस और उनके ढाबे की तलाशी ली थी। सोमवार को जांचकर्ताओं ने वहां से बरामद कई डिजिटल डाक्यूमेंट और हार्ड ड्राइव की जानकारी के आधार पर उनसे पूछताछ की। हालांकि, सुजीत बोस गिरफ्तारी से पहले तक खुद को निर्दोष बताते रहे। उन्होंने दावा किया कि सीबीआई द्वारा इसी मामले में दायर आरोपपत्र में उनका नाम नहीं है।
ईडी मंगलवार को उन्हें स्पेशल कोर्ट में पेश करेगी और उनकी हिरासत के लिए आवेदन करेगी। माना जा रहा है कि दक्षिण दमदम और बिधाननगर के आसपास के इलाकों में अपना दबदबा रखने वाले सुजीत बोस का पतन राज्य के राजनीतिक समीकरण में बड़ा बदलाव ला सकता है।
कौन हैं सुजीत बोस?
1 दिसंबर 1962 को जन्मे सुजीत बोस सालों से तृणमूल कांग्रेस का एक प्रमुख चेहरा रहे हैं। इस बार बोस बिधाननगर से चुनाव हार गए। यहां से उन्होंने पहली बार 2009 में जीत हासिल की थी और तब से इस सीट पर बने रहे थे। हालांकि बोस ने सालों से इस क्षेत्र में एक मजबूत जनसमर्थन आधार बनाया था, लेकिन सड़कों की खराब हालत, कूड़ा-करकट के संग्रहण न होने और जलभराव को लेकर मतदाताओं की टीएमसी और विशेष रूप से उनके प्रति असंतोष की वजह से वह 37,330 वोटों से हार गए।
कोलकाता के बाहरी इलाके में बसा बिधाननगर उत्तर 24 परगना जिले के अंतर्गत आता है और इसका नाम पूर्व मुख्यमंत्री बिधान चंद्र रॉय के नाम पर रखा गया है। राज्य में 2008 के परिसीमन के बाद इस निर्वाचन क्षेत्र का गठन हुआ था। पहले बेलगाछिया पूर्व निर्वाचन क्षेत्र के नाम से जाना जाने वाला बिधाननगर क्षेत्र कभी CPI(M) का गढ़ हुआ करता था और 1977 से 2009 में अपनी मृत्यु तक राज्य के परिवहन मंत्री सुभाष चक्रवर्ती ने इसका प्रतिनिधित्व किया था। चक्रवर्ती की मृत्यु के बाद, TMC ने बोस की मदद से बिधाननगर में अपनी पैठ बनाई।
बोस ने CPI(M) की यूथ विंग, डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के नेता के रूप में शुरुआत की। वे चक्रवर्ती के करीबी सहयोगी बन गए। हालांकि, 1990 के दशक के अंत तक, उनके बीच दूरियां बढ़ने लगीं। 2001 में, बोस टीएमसी में शामिल हो गए और पांच साल बाद उन्होंने बेलगाछिया पूर्व से चक्रवर्ती के खिलाफ अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा। हालांकि, उनके पूर्व गुरु ने उन्हें 1,749 वोटों से हराकर जीत हासिल की।
चक्रवर्ती का 2009 में निधन हो गया और बोस ने उसके बाद हुए उपचुनाव में सीपीआई (एम) के दिग्गज नेता की पत्नी रमाला को हराया और 28360 वोटों से जीत हासिल करके पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। उन्होंने बाद के विधानसभा चुनाव भी जीते और 2021 में जीत के बाद पहली बार मंत्री नियुक्त हुए। बोस सिर्फ कोलकाता के ही प्रभावशाली नेता नहीं थे, बल्कि उन्होंने उत्तर बंगाल में भी पार्टी का आधार मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
सीएम शुभेंदु अधिकारी की पहली कैबिनेट बैठक में लिए गए 6 बड़े फैसले
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को हावड़ा के नाबन्ना में अपनी पहली कैबिनेट मीटिंग की, जिसमें उन्होंने छह बड़े फैसलों को मंजूरी दी है। शुभेंदु कैबिनेट में अभी तक केवल पाँच मंत्री शामिल हैं जिन्होंने शनिवार को मुख्यमंत्री के साथ ही पद की शपथ ली थी। कैबिनेट बैठक में सीएम शुभेंदु के अलावा मंत्री दिलीप घोष, अग्निमित्रा पाल, निशिथ प्रमाणिक, अशोक कीर्तनिया और खुदीराम टुडू शामिल थे। पढ़ें पूरी खबर…
