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सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जज ने खारिज की हिन्दू राष्ट्र की थ्योरी, बोले- संविधान निर्माताओं ने बनाया था ‘रिपब्लिक ऑफ इंडिया’

जस्टिस चंद्रचूड़ ने असहमति को लोकतंत्र का ‘सेफ्टी वॉल्व’करार दिया। उन्होंने कहा किसी मुद्दे पर असहमति को राष्ट्र-विरोधी और लोकतंत्र-विरोधी बता देना संवैधानिक मूल्यों और लोकतंत्र को बढ़ावा देने के प्रति देश की प्रतिबद्धता के मूल विचार पर चोट करता है।

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जज डीवाई चंद्रचूड़। फोटो: Indian Express

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जज डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को हिंदू राष्ट्र और मुस्लिम राष्ट्र की थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया है। जज ने कहा है कि संविधान निर्माताओं ने ‘रिपब्लिक ऑफ इंडिया’ की बुनियाद रखी है। गुजरात में अपने एक लेक्चर के दौरान चंद्रचूड़ ने यह बातें कही। वह 15वें जस्टिस पीडी देसाई मेमोरियल लेक्चर में ‘द ह्यूज दैट मेक इंडिया: बहुलता से बहुवाद तक’ विषय पर अपने विचार रखने अहमदाबाद पहुंचे थे।

इस दौरान उन्होंने कहा ‘संविधान के निर्माताओं ने हिंदू इंडिया और मुस्लिम इंडिया की थ्योरी को खारिज किया है। उन्होंने सिर्फ और सिर्फ ‘रिपब्लिक ऑफ इंडिया’ को मान्यता दी है। हमारा संविधान बहुलवाद की परिकल्पना करता है और कोई भी व्यक्ति या संस्था भारत के विचार पर एकाधिकार का दावा नहीं कर सकती है।’

लेक्चर के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने असहमति को लोकतंत्र का ‘सेफ्टी वॉल्व’ करार दिया। उन्होंने कहा ‘किसी मुद्दे पर असहमति को राष्ट्र-विरोधी और लोकतंत्र-विरोधी बता देना संवैधानिक मूल्यों और लोकतंत्र को बढ़ावा देने के प्रति देश की प्रतिबद्धता के मूल विचार पर चोट करता है। मतभेद और असहमति होना लोकतंत्र का मूल तत्व है। इससे किसी भी मुद्दे पर लोगों की भावनाएं सामने आती है। जब किसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र के खिलाफ और राष्ट्रविरोधी आंदोलन में तब्दील हो जाए तो यह संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ मानी जाती है। असहमति और मतभेदों को रोकने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था का उल्लंघन है।’

जस्टिस की यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है जब देश के अलग-अलग हिस्सों संशोधित नागरिकता कानून और एनआरसी के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन हो रहा है। दिल्ली के शाहीन बाग में बीते दो महीने से संशोधित नागरिकता कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है। प्रदर्शनकारियों में अधिकतर महिलाएं हैं। यह लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

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