बीजेपी ने नागेंद्र नाथ त्रिपाठी को राष्ट्रीय संगठक नियुक्त किया है। नागेंद्र नाथ त्रिपाठी के पास आरएसएस, एबीवीपी और बीजेपी में लगभग चार दशक तक काम करने का अनुभव है। त्रिपाठी को वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से संपर्क बनाने की जिम्मेदारी दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, बीजेपी के इस कदम का मकसद ऐसे कार्यकर्ताओं की पहचान करना है जो लंबे वक्त से संगठन के लिए काम कर रहे हैं और मौजूदा वक्त में किसी सांगठनिक या प्रशासनिक पद पर नहीं हैं।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ सालों से पार्टी नेतृत्व इस बात को महसूस कर रहा था कि एनडीए में कई दलों के आने और चुनावी तैयारियों पर ध्यान देने की वजह से संगठन में बड़ी संख्या में ऐसे कार्यकर्ता हैं जो खुद को ‘उपेक्षित’ महसूस कर रहे हैं। इसी वजह से पार्टी ने त्रिपाठी को यह जिम्मेदारी दी है।
71 साल के त्रिपाठी हाल ही में बिहार और झारखंड के क्षेत्रीय संगठन मंत्री के रूप में काम कर रहे थे। अपनी नई नियुक्ति के रूप में अब वह दिल्ली में बैठेंगे क्योंकि बीजेपी अब संघ परिवार के पुराने कार्यकर्ताओं के साथ अपना संबंध मजबूत करना चाहती है।
संत कबीर नगर जिले से हैं त्रिपाठी
उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले से आने वाले त्रिपाठी ने आरएसएस के पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में अपना सफर शुरू किया था। जब वह आजमगढ़ में विभाग प्रचारक थे तो उन्हें एबीवीपी में पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई। पिछले कुछ सालों में उन्होंने संगठन के कई पदों पर काम किया और हिंदी इलाकों में आरएसएस के प्रमुख संगठनकर्ता के रूप में सामने आए।
बाद में उन्हें क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाया गया जहां वह उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार में संगठन के का काम देखने लगे। संघ के कार्यकर्ताओं का कहना है कि वह बेहद लो प्रोफाइल रहने वाले व्यक्ति हैं और संघ परिवार में उनके कार्यकर्ताओं से बेहद गहरे संबंध हैं।
महासचिव (संगठन) की मिली जिम्मेदारी
साल 2002 में त्रिपाठी को बड़ी जिम्मेदारी तब मिली जब उन्हें आरएसएस से बीजेपी में भेजा गया और उत्तर प्रदेश का महासचिव (संगठन) बनाया गया। त्रिपाठी को पूरे उत्तर प्रदेश में संगठन के कामों की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई। बीजेपी में महासचिव (संगठन) को बहुत ताकतवर पद माना जाता है और यह पार्टी और संघ के बीच अहम कड़ी के रूप में काम करता है। अपने कार्यकाल के दौरान त्रिपाठी ने संगठन को मजबूत और इसके विस्तार के लिए काम किया।
उत्तर प्रदेश में 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले त्रिपाठी को बिहार भेजा गया और उन्हें पार्टी संगठन का काम सौंपा गया। इसके बाद उन्हं झारखंड की भी जिम्मेदारी दी गई और वह बीजेपी और आरएसएस के पदाधिकारियों के साथ मिलकर काम करते रहे।
बहरहाल, त्रिपाठी की नियुक्ति को बीजेपी और आरएसएस के बीच समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
बीजेपी छोड़ने से पहले अन्नामलाई का आखिरी दांव
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