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‘अगर आंबेडकर ने इस्लाम क़बूला होता तो क्या बीजेपी को स्वीकार्य होते?’ वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष ने पूछा तो हो गए ट्रोल

मोहन तिवारी नाम के एक यूजर ने लिखा कि 'आप इतनी नफरत कहां से लाते हैं।'

इस ट्वीट के बाद पत्रकार आशुतोष ट्विटर यूजर्स के निशाने पर आ गए हैं। फोटो सोर्स – PTI

वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष ने अपने ट्वीट के जरिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा है। आशुतोष ने ट्वीट करते हुए कहा कि ‘अगर आंबेडकर ने इस्लाम क़बूल किया होता तब भी वह बीजेपी को स्वीकार्य होते?’ लेकिन अपने इस ट्वीट के बाद आशुतोष माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर ट्रोल हो गए। दरअसल आशुतोष ने अपने ट्विट में एक लेख का जिक्र किया है। इस लेख में बताया गया है कि बौद्ध धर्म आंबेडकर की पहली पसंद नहीं था और ना ही धर्म परिवर्तन का यह विचार एक झटके में आया था। लेख में यह भी कहा गया है कि शुरू में तो आंबेडकर दलितों के धर्म परिवर्तन के लिए बौद्ध धर्म के मुकाबले ईसाई धर्म और इस्लाम को बेहतर मानते थे।

लेख में यह भी बताया गया है कि ‘आंबेडकर को लगता था कि मुसलमानों के अल्पसंख्यक होने के बावजूद हिंदू उनसे वैसा व्यवहार करने की हिम्मत नहीं कर सकते जैसा वो दलितों के साथ सदियों से करते आ रहे थे क्योंकि मुसलिम समाज एक इकाई के तौर पर ज़्यादा संगठित था जबकि दलितों की आवाज़ संगठित नहीं थी। आंबेडकर उस समय मानते थे कि सिर्फ़ मुसलमान ही दलितों के समर्थन में खड़े हो सकते हैं।’

अपने ट्वीट  में इसी लेख का जिक्र करते हुए जब आशुतोष ने ट्वीट किया तब उनके ट्वीट पर एक यूजर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि ‘शहनवाज हुसैन, अब्दुल कलाम, क्या मुसलमान नही है। ऐसे और भी बहुत लोग है। और फिर अंबेडकर जी हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई तो बाद में है। पहले तो वे संविधान के रचयिता है। इस नाते सम्मान के हकदार तो है। गुगल पर अच्छे से सर्च करके खबरों को लिखा करें।’

मोहन तिवारी नाम के एक यूजर ने लिखा कि ‘आप इतनी नफरत कहां से लाते हैं।’ एक अन्य यूजर ने इसपर अपनी राय व्यक्त करते हुए लिखा कि ‘जिन पत्रकारों ने पेशे का हर उसूल भुलाकर पिछले 6साल में देश के संविधान,लोकतंत्र व क़ानून के राज की हत्या की कोशिश में सत्ता का का साथ दिया।वही अपने बचाव में आज उसी संविधान, लोकतंत्र,प्रेस की आज़ादी की दुहाई दे रहे हैं।आप हों या आपके विरोधी-याद रहे लोकतंत्र बचेगा,तो अधिकार बचेंगे’

आपको बता दें कि यह पहला मौका नहीं है जब वरिष्ठ पत्रकार अपने ट्वीट को लेकर ट्रोल हुए हों। इससे पहले भी कई बार आशुतोष अपने ट्वीट पर ट्रोल हो चुके हैं।

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