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ये आपकी सिलेंडरी कर रहे हैं- गैस के बढ़ते दाम पर रवीश कुमार का तंज, लोग कर रहे ऐसे कमेंट्स

एक यूजर Gaurav Maheshwari ने कमेंट किया, "पहले लोग झूठ बोलते थे और मीडिया सच ढूँढ़ कर लाती थी..अब मीडिया झूठ बोलती है और सोशल मीडिया के लोग सच ढूँढ़ कर लाते हैं..एक कड़वा सत्य।"

petrol, diesel price hikeदिल्ली में एलपीजी गैस की कीमतों के विरोध में प्रदर्शन करते युवक कांग्रेस के लोग। (फोटो- पीटीआई)

तेजी से बढ़ रहे पेट्रोल, डीजल और रसोईं गैस के दाम पर विपक्ष के साथ सोशल मीडिया के यूजर भी मुखर हो गए हैं। उनका कहना है कि मोदी सरकार में महंगाई से एक ओर आम जनता परेशान है तो दूसरी ओर कई लोग कह रहे हैं कि यह विपक्ष का एकतरफा विरोध है। उनका मानना है कि विपक्ष को देश का विकास नहीं दिखता है। देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 91.17 रुपए है तो कोलकाता में यह 91 रुपए 35 पैसे में बिक रहा है। इसी तरह डीजल की कीमत दिल्ली में 84 रुपए 47 पैसे तक पहुंच गई है तो कोलकाता में यह 84 रुपए 35 पैसे हो गया है। इन सब मुद्दों को लेकर वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि, “ये आप हैं, ये आपकी जेब है और ये आपकी सिलेंडरी हो रही है।” उनकी बातों को लेकर सोशल मीडिया पर लोग कई तरह के कमेंट्स कर रहे हैं।

उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है, “सिलेंडर 225 रुपये महंगा हो चुका है। पेट्रोल डीज़ल के दाम भी सौ रुपये छू रहे हैं। सीएनजी महंगी हो गई है और अब पचास रुपये को छू रही है, जितने पर कभी डीज़ल होता था। घरों सप्लाई होने वाली गैस पीएनजी भी महंगी हो चुकी है।”

उन्होंने कहा, “सरकार इंतज़ार कर रही है कि जनता कहां तक बर्दाश्त कर रही है। अभी कहीं चुनाव जीत जाएगी तो कहेगी कम करने की ज़रूरत भी नहीं है। कम भी करेगी तो जहां तक वृद्धि हुई है उसमें मामूली कमी का कोई लाभ नहीं। गोदी मीडिया और व्हाट्स एप ग्रुप के रिश्तेदार बता देंगे कि सस्ता हो गया है। लोग सरकार से कम रिश्तेदार के कमेंट से परेशान हैं।”

https://www.facebook.com/RavishKaPage/posts/266030584887862

उन्होंने लिखा, “बाज़ार में जाइये तो ख़रीदारी बहुत कम है। दुकानदार बता रहे हैं कि ग्राहक नहीं हैं। देश को तालाबंदी में झोंक ये नेता मज़े से चुनावों में घूमते रहे। उल्टा जुर्माने के नाम पर जनता से देश भर में कई सौ करोड़ वसूल लिए गए। रैलियों में लोगों को बुला कर उन्हीं नियमों की धज्जियाँ उड़ती रहीं। माँ बाप की हालत है कि स्कूलों की फ़ीस नहीं दे पा रहे और शिक्षकों की हालत ये है कि उन्हें सैलरी नहीं मिल रही। धर्म के नशे की राजनीति पर इतना आत्मविश्वास हो गया है कि सरकार को अब जनता की तकलीफ़ दिखाई नहीं देती। कह नहीं सकता कि जनता को अपनी तकलीफ़ दिखाई दे रही है या नहीं।”

उनके इस तंज भरे लेख पर कई लोग कमेंट्स भी किए हैं। Ayyub Malik नाम के एक यूजर ने लिखा है, “पहले लकड़ी और उपले से खाना बनाने के कारण औरतों की आँखें जलती थीं। उज्जवाला योजना उनके होठों पर मुस्कान ले आई। पर, हाय री किस्मत! यह मुस्कान क्षणिक रही। गैस सिलिंडर की बढ़ी कीमतों ने उन्हें पुनः लकड़ी और उपलों की शरण में पहुँचा दिया।#सिलिंडर_की_कीमत_800/-_पार।”

Sanjay Agarwal नाम एक एक अन्य यूजर ने लिखा, “सर, बस एक चुनाव जितने की ज़रूरत है जितनी भी समस्या है सब ख़त्म हो जाएगी। किसान आंदोलन की हवा निकल जाएगी, पेट्रोल, डीज़ल और घरेलू गैस के बढ़े हुए दाम सस्ते लगने लग जाएँगे, बाबा रामदेव की करोना की दवाई हाइली इफ़ेक्टिव हो जाएगी जिसका निर्यात कर के राजा मोरध्वज की छाती छप्पन इंच से बढ़ कर सत्तर इंच की हो जाएगी। और सभी देश वासी ये मान लेंगे की बढ़े हुए पेट्रोलियम उत्पाद के दाम सच्ची में देशहित में हैं।”

एक दूसरे यूजर Gaurav Maheshwari ने कमेंट किया, “पहले लोग झूठ बोलते थे और मीडिया सच ढूँढ कर लाती थी..अब मीडिया झूठ बोलती है और सोशल मीडिया के लोग सच ढूँढ कर लाते हैं..एक कड़वा सत्य।”

कुछ यूजरों ने रवीश के विचारों से असहमति भी जताई। Karu Kumar Ram नाम के यूजर ने लिखा “ये दुखी आत्मा रविश कुमार जी कही अपने दुख से आत्महत्या ना कर ले।”

एक अन्य यूजर Santosh Upadhyay ने लिखा, “जब आपको 50 रुपये में डीजल मिल रहा था उस समय आपकी तनख़्वाह कितना था? और अब कितना है रवीश पांडेय भईया? अनुपात निकाल लीजिए। देखिएगा बढोत्तरी प्रतिशत कमाई की बढ़ी आएगी। मुझे तो कोई आपत्ति नहीं है। क्योंकि देश विकसित और सुरक्षित हो रहा है।”

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