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कृषि क़ानूनों का बीजेपी में विरोध? पार्टी का आग्रह ठुकरा कर एक नेता ने की किसान आंदोलन की तारीफ, दूसरे ने की क़ानून रद करने की मांग

बीजेपी नेता और राज्य के पूर्व गृह मंत्री संपत सिंह ने तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को रद्द करने की बात कही है। रविवार को केंद्र से आग्रह करते हुए संपत सिंह ने कहा कि वह सोमवार को आंदोलनकारी किसानों के साथ होने वाली बैठक से पहले तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को रद्द कर दे।

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केंद्र सरकार के कृषि क़ानूनों के खिलाफ किसान दिल्ली से सटी सीमाओं पर पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से आंदोलन कर रहे हैं। किसान नेता और केंद्र सरकार के बीच कई दौर की हो चुकी है लेकिन अबतक कोई समाधान नहीं निकला है। सरकार कानून को वापस लेने के लिए तैयार नहीं है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अंदर इस कानून को लेकर विरोध दिखाई दे रहा है।

बीजेपी नेता और राज्य के पूर्व गृह मंत्री संपत सिंह ने तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को रद्द करने की बात कही है। रविवार को केंद्र से आग्रह करते हुए संपत सिंह ने कहा कि वह सोमवार को आंदोलनकारी किसानों के साथ होने वाली बैठक से पहले तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को रद्द कर दे। बीजेपी नेता ने कहा “इन सभी कानून को वापस लिया जाना चाहिए और एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर सरकार द्वारा फसलों की खरीद की गारंटी देने वाले एक नए कानून को उनके स्थान पर लाया जाना चाहिए।”

संपत ने कहा “जब सरकार आश्वासन दे रही है कि एमएसपी जारी रहेगा, तो इसे लेकर कानून क्यों नहीं बना देती। एमएसपी को कानूनी रूप देने से, किसानों को भरोसा हो जाएगा कि वे सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर अपनी फसल बेच सकेंगे।” भाजपा नेता ने कहा, “केंद्र को किसान को विपक्षी दलों की तरह नहीं देखना चाहिए। उन्हें राजनीतिक दल मानना किसानों का अपमान है।” संपत सिंह ने कहा सरकार को पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का नारा ‘जय जवान जय किसान’ फिर से याद करना चाहिए।

बीजेपी के एक और नेता ने किसान आंदोलन की तारीफ की है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बीरेंद्र सिंह ने आंदोलनकारी किसानों को अपना समर्थन दिया और शुक्रवार को रोहतक के सांपला में किसान नेता छोटू राम की प्रतिमा के पास एक दिवसीय धरना भी दिया।

बीरेंद्र के बेटे बृजेन्द्र सिंह बीजेपी के सांसद हैं। बीजेपी नेता ने कहा, “मैं इस आंदोलन में शामिल हो गया क्योंकि मैं पहले एक किसान हूं और बाद में एक राजनीतिज्ञ हूं। जैसा कि मैं छोटू राम के परिवार का हूं, मेरा पहला कर्तव्य किसानों के साथ खड़ा होना है। मुझे सर छोटू राम विचार मंच के सदस्यों ने किसानों की आवाज उठाने के लिए कहा क्योंकि उन्हें लगता है कि तीन नए कानून उनके लिए हानिकारक हैं।”

उन्होंने कहा, ‘सरकार और किसानों को बातचीत जारी रखनी चाहिए और इस मुद्दे का समाधान निकालना चाहिए। मैं दिल्ली की सीमा पर विरोध कर रहे किसानों में शामिल होने के लिए तैयार हूं और अगर वे मुझे अनुमति देते हैं तो उनके साथ भूख हड़ताल पर बैठूँगा।” बीरेंद्र ने कहा कि कोई किसानों को नहीं उकसा रहा है, वे अपनी मर्जी से आंदोलन कर रहे हैं।

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