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अमित शाह ने राम जेठमलानी के बीजेपी से निष्कासन पर जताया अफसोस, केस वापस लेने को राजी हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री

साल 2013 भारतीय जनता पार्टी ने वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सदस्य राम जेठमलानी को अनुशासनहीनता के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था।

वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

सीनियर वकील और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम जेठमलानी और भाजपा ने संयुक्त रूप से दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में लंबित मुकदमे को खत्म करने के लिए अर्जी दाखिल किया है। जेठमलानी ने यह मुकदमा भाजपा से निष्कासित करने के खिलाफ दायर किया था। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और पार्टी के राष्‍ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव ने राम जेठमलानी के बीजेपी से निष्कासन पर अफसोस जताया है। साल 2013 भारतीय जनता पार्टी ने वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सदस्य राम जेठमलानी को अनुशासनहीनता के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। जेठमलानी को लिखे एक पत्र में भाजपा महासचिव अनंत कुमार ने कहा था कि पार्टी के संसदीय बोर्ड ने जेठमलानी को प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित करने के लिए सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। अनंत कुमार ने यहां तक कहा था कि पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने के लिए जेठमलानी के खिलाफ अतिरिक्त कार्रवाई भी की जाएगी।

 

(फोटो twitter/@utkarsh_aanand)

 

(फोटो twitter/@utkarsh_aanand)

मान गए जेठमलानी: बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और महासचिव भुपेन्द्र यादव द्वारा पार्टी से निष्कासन को लेकर लिखित में अफसोस जताने के बाद मामले को बंद करने का फैसला लिया है। वर्ष 2013 में जेठमलानी ने बीजेपी के खिलाफ मुकदमा कर अपने निष्कासन को चुनौती दी थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अपनी अर्जी में नुकसान की भरपाई के लिए 50 लाख रुपए की मांग भी की थी। 3 दिसंबर को बीजेपी के महासचिव भुपेन्द्र यादव के हस्ताक्षर वाले एक पत्र में कहा गया कि बचाव पक्ष के अध्यक्ष और महासचिव ने याचिकाकर्ता से मुलाकात की और मुलाकात के दौरान उन्होंने निष्कासन को लेकर अपना गहरा अफसोस जताया। पत्र में यह भी लिखा गया कि उन दोनों ने पार्टी के प्रति याचिकाकर्ता के योगदान को भी स्वीकार किया। पत्र में इस बात की जानकारी दी गई कि राम जेठमलानी यानी याचिककर्ता ने उनकी माफी की अर्जी को मान लिया और दोनों पक्षों ने मिलकर इसे सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने का फैसला लिया है। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से इस मामले को खत्‍म करने के लिए संयुक्‍त रूप से कोर्ट में अर्जी डाली गई।

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