West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में अब नया राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है। चुनाव आयोग ने 144-फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान का आदेश दिया है। इसके बाद अब तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को चुनौती दी है।
डायमंड हार्बर से सांसद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “तुम्हारे बांग्ला बिरोधी गुजराती गिरोह और उनके कठपुतली ज्ञानेश कुमार के लिए दस जन्म भी मेरे डायमंड हार्बर मॉडल में जरा सी भी सेंध नहीं लगा पाएंगे। अपनी पूरी ताकत लगा दो। मैं पूरे भारत संघ को चुनौती देता हूं, फाल्टा आओ।”
दिल्ली के किसी गॉडफादर को भेजो- टीएमसी सांसद
उन्होंने आगे कहा, “अपने सबसे मजबूत उम्मीदवार को भेजो, दिल्ली के किसी गॉडफादर को भेजो। अगर हिम्मत है तो फाल्टा से चुनाव लड़ो।” चुनाव आयोग ने शनिवार को फालटा में 21 मई को दोबारा मतदान कराने और 24 मई को मतगणना की घोषणा की। पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने आरोप लगाया था कि विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के दौरान डायमंड हार्बर निर्वाचन क्षेत्र के फाल्टा में कई मतदान केंद्रों पर मतदाताओं को पार्टी के उम्मीदवार को चुनने से रोका गया था।
285 मतदान केंद्रों में से 60 मतदान केंद्रों (निर्वाचन क्षेत्र का 21%) पर काले मास्किंग टेप और स्याही से बटनों को खराब कर दिया गया था। इन बूथों पर 53,967 मतदाता (23 लाख मतदाताओं का 22.8%) मतदान करते थे। चुनाव आयोग ने कहा, “इससे दर्ज किए गए वोटों की निष्पक्षता से समझौता हुआ और जनादेश का पता लगाना असंभव हो गया।” आयोग ने आगे कहा कि वीडियो फुटेज में खामियों का मतलब है कि फाल्टा में अन्य जगहों पर भी इसी तरह की छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा की कुल 294 सीटें हैं, जिनमें बहुमत के लिए 148 सीटों की जरूरत है। इन चुनावों पर सबकी नजर है, क्योंकि प्रमुख राजनीतिक दल कड़ी टक्कर दे रहे हैं। ऐसे कड़े मुकाबले में, फाल्टा के परिणाम घोषित होने में देरी के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अगर प्रमुख दलों के बीच अंतर कम रहा, तो चुनाव का अंतिम परिणाम इसी एक सीट पर निर्भर हो सकता है।
कौन हैं अभिषेक बनर्जी के करीबी इशराफिल चौकीदार
इस पूरे विवाद के केंद्र में एक नाम लगातार चर्चा में है, वह है इशराफिल चौकीदार। उन्हें फाल्टा से टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान का करीबी सहयोगी बताया जाता है। आरोप है कि स्थानीय स्तर पर उनका प्रभाव काफी मजबूत है और वे चुनावी माहौल को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। इसी वजह से वे विपक्ष और स्थानीय लोगों के निशाने पर आ गए हैं। पढ़ें पूरी खबर…
