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Rampal Case: हत्या के दो मामलों के दोषी रामपाल को उम्रकैद की सजा

Baba Rampal Case:

Rampal Case Verdict: हरियाणा के स्वयंभू को हत्या के दो मामलों में दोषी करार दिया गया है।

Baba Rampal Case: स्वयंभू संत और सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल को हत्या के दो मामलों में मंगलवार (16 अक्टूबर) को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। 11 अक्टूबर को हिसार की सेंट्रल जेल के जज ने सतलोक आश्रम विवाद में फैसला सुनाते हुए उसे दोषी करार दिया था। आपको बता दें कि 14 नवंबर 2014 को हाईकोर्ट ने उसे एक मामले में पेश होने का आदेश दिया था।

रामपाल तब कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ था, जिसके बाद कोर्ट ने उसे पेश करने के आदेश दिए। पुलिस प्रशासन ने इसके बाद आश्रम से रामपाल को निकालने के लिए खास तौर पर ऑपरेशन चलाया। उस दौरान रामपाल के अनुयायियों और पुलिस के बीच में हाथापाई और धक्का-मुक्की हुई थी। हिंसा में तब कुल छह लोगों की जान चली गई थी। मृतकों में पांच महिलाएं और एक बच्चा शामिल थे। पुलिस ने उसके बाद रामपाल को दबोच लिया था।

जानिए रामपाल को?: खुद के संत होने का दावा करने वाला रामपाल मूलरूप से हरियाणा के सोनीपत स्थित गोहाना तहसील के धनाना गांव का निवासी है। हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में वह जूनियर इंजीनियर रह चुका है। उन दिनों वह 107 वर्षीय कबीरपंथी संत स्वामी रामदेवानंद महाराज के संपर्क में आया था और तभी से उनका शिष्य बन गया था।

नौकरी छोड़ पकड़ी थी सत्संग की राहः 1995 में नौकरी छोड़ वह सत्संग करने लगा। धीमे-धीमे वह लोकप्रिय होता गया और उसके अनुनायियों की संख्या भी बढ़ी। एक महिला अनुनायी ने तो उसे करोंथा गांव में आश्रम बनाने के लिए जमीन तक दे दी थी। आगे 1999 में रामपाल ने बंदी छोड़ ट्रस्ट की मदद से सतलोक आश्रम की स्थापना की।

किताब पर टिप्पणी कर विवाद में भी घिराः रामपाल इसके अलावा 2006 में एक और विवाद में भी घिरा था। उसने तब स्वामी दयानंद सरस्वती की किताब पर टिप्पणी की थी, जिस पर आर्य समाज ने आपत्ति जताई थी। नौबत दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच झड़प तक की आ गई थी, जिसमें एक व्यक्ति की जान भी चली गई थी। जिला प्रशासन ने तब जुलाई 2006 में रामपाल के आश्रम को कब्जे में लेने के साथ उसके 24 समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि, 2009 में उसे वह आश्रम दोबारा मिल गया था।

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