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इससे इतर बीज कानून आ रहे हैं…पुलिस देखेगी, किसी कंपनी का खेत में बीज निकल गया तो केस होंगे- टिकैत का दावा

किसान नेता ने आगे दावा किया, "देश को इस लूट से बचाने के लिए कर्मचारी और विभाग व दुकानदार नहीं आए, तब इनकी लगाम किसान ने थाम दी।" वह आगे यह भी बोले कि यह आंदोलन कितना आगे चलेगा? यह नहीं पता है।

Author Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली/चंडीगढ़ | Updated: March 7, 2021 9:28 AM
Rakesh Tikait, BKU, National NewsBKU प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः प्रेमनाथ पांडे)

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि तीन कृषि कानूनों से इतर बीज कानून आ रहे हैं। उनके तहत पुलिस देखेगी और अगर खेत में किसी कंपनी का बीज पाया गया, तो उस किसान के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

शनिवार को किसानों की एक महापंचायत में उन्होंने कहा- हमारी लड़ाई देश में बड़े व्यापारी से है, जो रोटी को तिजोरी की वस्तु बनाना चाहता है। अनाज कोठियों और तिजोरी में बंद करना चाहता है। भूख कितनी लगेगी?…इसके आधार पर कीमतें तय करना चाहता है, तो यह सरकार बड़े व्यापारियों की आई है। बकौल टिकैत, “अगर सरकार किसी पार्टी की होती, तो समझौता हो जाता। पहले भी सरकारें रही हैं…जब भी आंदोलन हुए, तो सरकारें बातें करती थीं। पहली बार देखा कि इन्होंने तो छोड़ दिया और एक-आधे रास्ते दिल्ली के खुले थे, वे भी बंद कर दिए। यह सरकार नहीं हो सकती। यह पक्के व्यापारी हैं। बड़ी-बड़ी कंपनियां सरकारों के बीच में घुस गई हैं। ये लुटेरे हैं, जो देश लूटने आए हैं।”

किसान नेता ने आगे दावा किया, “देश को इस लूट से बचाने के लिए कर्मचारी और विभाग व दुकानदार नहीं आए, तब इनकी लगाम किसान ने थाम दी।” वह आगे यह भी बोले कि यह आंदोलन कितना आगे चलेगा? यह नहीं पता।

टिकैत ने संबोधन के दौरान समझाया कि आंदोलन किन चीजों पर है। इसी बीच, उन्होंने कहा- बीज कानून आ रहे हैं। बीज विधायक आ रहा है। पुलिस देखेगी कि खेत में क्या बोया जा रहा है। अगर कहीं पर किसी कंपनी का बीज निकल आया, तो मुकदमे दर्ज होंगे। पंजाब में ऐसा हुआ भी है। आलू की किसी ने वैरायटी लगाई थी, गुजरात में…उस पर केस हुआ।

बता दें कि केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के 100 दिन शनिवार को पूरे हुए। इस दौरान किसान बोले कि प्रदर्शनकारी कानूनों वापस लेने की मांग पर अडिग हैं। साथ ही किसान नेताओं ने कहा कि वे सरकार के साथ वार्ता को तैयार हैं, पर बात बिना शर्त होनी चाहिए। वहीं, सरकार का कहना है कि वह आंदोलनकारी किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए कानूनों में संशोधन के लिए तैयार है।

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