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संत रामपाल पर राजद्रोह का केस दर्ज, आश्रम में 4 महिलाओं के शव मिले

झड़प के एक दिन बाद, ‘स्वयंभू संत’ रामपाल के साथ किसी तरह की बातचीत से इंकार करते हुए प्रशासन ने उनके खिलाफ राजद्रोह और अन्य गंभीर मामले दर्ज कर उन पर तथा उनके अनुयायियों पर दबाव बढ़ा दिया है। वहीं, हरियाणा में आश्रम के भीतर चार महिलाओं के शव मिले हैं। हरियाणा के पुलिस महानिदेशक […]

Author November 19, 2014 6:23 PM
‘स्वयंभू’ संत रामपाल पर कोर्ट का आदेश न मानने पर राजद्रोह का केस दर्ज किया गया है (फोटो: एपी)

झड़प के एक दिन बाद, ‘स्वयंभू संत’ रामपाल के साथ किसी तरह की बातचीत से इंकार करते हुए प्रशासन ने उनके खिलाफ राजद्रोह और अन्य गंभीर मामले दर्ज कर उन पर तथा उनके अनुयायियों पर दबाव बढ़ा दिया है। वहीं, हरियाणा में आश्रम के भीतर चार महिलाओं के शव मिले हैं।

हरियाणा के पुलिस महानिदेशक एस एन वशिष्ठ ने आज बताया कि रामपाल अभी भी आश्रम के भीतर हैं और जोर दिया कि अवमानना के एक मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में शुक्रवार को पेशी के लिए उनको गिरफ्तार किए जाने तक पुलिस अपना ‘अभियान’ जारी रखेगी।

उन्होंने कहा कि हिसार जिले के बरवाला में आश्रम के अधिकारियों ने चार महिलाओं के शव और एक शिशु सहित दो बीमार लोगों को सुपुर्द किया। दोनों बीमारों की बाद में अस्पताल में मौत हो गयी। सबकी मौत के कारणों की जांच की जाएगी।

पुलिस और रामपाल के समर्थकों की ‘निजी सेना’ के बीच भिड़ंत के एक दिन बाद आश्रम के आसपास का इलाका जंग का मैदान जैसा लग रहा है। समर्थकों ने कथित तौर पर गोलीबारी की और सुरक्षा बलों पर पेट्रोल बम फेंके थे।

डीजीपी ने बताया कि रामपाल के करीब 15,000 अनुयायी आश्रम में डेरा डाले थे जिसमें से 10,000 को बाहर निकाल दिया गया है। आश्रम से निकलने वाले कई लोगों ने बताया कि रामपाल की ‘निजी सेना’ ने किस तरह उन्हें निकलने से रोक रखा था।

वशिष्ठ ने चंडीगढ़ में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है, ऐसी कोई योजना तक नहीं है। वह गंभीर अपराधों के आरोपी हैं। मेरा उन्हें सुझाव है कि उन्हें कानून के समक्ष समर्पण कर देना चाहिए।’’

पुलिस ने बीती रात रामपाल, आश्रम के प्रवक्ता राज कपूर, एक अन्य महत्वपूर्ण पदाधिकारी पुरुषोत्तम दास तथा कई अन्य अनुयायियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में नए मामले दर्ज किए।

रामपाल के खिलाफ धारा 121 (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने, या युद्ध छेड़ने का प्रयास, या युद्ध छेड़ने के लिए भड़काने का प्रयास), 121 ए (राज्य के खिलाफ कुछ विशेष अपराधों को अंजाम देने के लिए साजिश रचना) और 122 (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के मकसद से हथियार आदि एकत्र करना) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

इसके अतिरिक्त आरोपियों के खिलाफ धारा 123 (युद्ध छेड़ने की मंशा को छिपाने) और हत्या का प्रयास, मारपीट तथा शस्त्र अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

कल पुलिस और रामपाल समर्थकों के बीच आश्रम में छिड़े संघर्ष के बाद ताजा मामले दर्ज किए गए। समर्थकों पर आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से गोलीबारी की और पेट्रोल बम फेंके। रामपाल पहले ही हत्या के एक मामले में आरोपी हैं।

इस सप्ताह के शुरू में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने सरकार को अदालत की अवमानना के मामले में रामपाल को पेश करने के लिए शुक्रवार तक का समय दिया था। इसके बाद से प्रशासन सतलोक आश्रम के भीतर और बाहर मौजूद उनके अनुयायियों से वहां से चले जाने और अदालत के आदेश के पालन में मदद करने को कह रहा था।

मौतों के बारे में पुलिस महानिदेशक ने कहा कि मृत मिलीं चारों महिलाओं के शवों पर कोई घाव नहीं हैं। अब तक पुलिस यह नहीं जानती कि किस समय और किन परिस्थितियों में उनकी मौत हुई। इन मौतों के सही कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जाएगी।

वशिष्ठ ने कहा कि मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए शवों का पोस्टमार्टम किया जाएगा। शिशु मध्यप्रदेश के रीवा जिले का था।
डीजीपी ने बताया कि उपद्रव सहित ताजा मामला दर्ज कराए जाने के आरोपों के बाद रामपाल के आश्रम के 20 पदाधिकारियों सहित करीब 270 समर्थकों के अलावा उनकी ‘निजी सेना’ के 250 सदस्यों को हिरासत में लिया गया।

उन्होंने बताया कि जांच के बाद इसमें शामिल पाए गए लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘उनके खिलाफ जांच आगे बढ़ने के साथ सबूत मिलने के आधार पर नये मामले दर्ज किये जाएंगे।’’

डीजीपी ने कहा कि आश्रम से और अनुयायियों को बाहर आने की इजाजत देने के लिए कल रात अभियान अस्थायी तौर पर रोक दिया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘अब तक 10,000 अनुयायी बाहर आए हैं। हमें लगता है कि अभी भी करीब 5,000 अनुयायी भीतर में हैं। इन अनुयायियों में महिलाएं, बच्चे और यहां तक कि बुजुर्ग भी हैं। उनमें से अधिकतर उत्तरप्रदेश, राजस्थान और मध्यप्रदेश के रहने वाले हैं।’’

डीजीपी के साथ अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) पी के महापात्र और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजीव कौशल भी थे। डीजीपी ने कहा, ‘‘हम बेकसूर लोगों की जान बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसलिए हम अभियान के लिए कोई समय निर्धारित नहीं कर रहे हैं क्योंकि हमारी पूरी प्राथमिकता बेकसूर लोगों की जान बचाना है।’’ उन्होंने कहा कि सुरक्षा कर्मियों ने अभी तक आश्रम में प्रवेश नहीं किया है। उन्होंने इस बात से इंकार किया कि पुलिस की तरफ से कोई देरी या लापरवाही हुयी।

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